नई दिल्ली । स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वाले करोड़ों उपभोक्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने मोबाइल फोन में इस्तेमाल होने वाले ग्लास स्क्रीन प्रोटेक्टर की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नए नियम बनाए हैं। इसके तहत स्मार्टफोन के ग्लास स्क्रीन प्रोटेक्टर को भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के निर्धारित मानकों के अनुरूप बनाना होगा। नई व्यवस्था 1 अप्रैल 2027 से लागू होगी। इस फैसले से खराब गुणवत्ता वाले स्क्रीन गार्ड की बिक्री पर नियंत्रण लगाने और ग्राहकों को बेहतर उत्पाद उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है।
1 अप्रैल 2027 से लागू होंगे नए नियम
केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी वस्तु (अनिवार्य पंजीकरण की आवश्यकता) आदेश, 2021 में संशोधन करते हुए स्मार्टफोन के ग्लास स्क्रीन प्रोटेक्टर को अनिवार्य पंजीकरण के दायरे में शामिल किया है।
नई व्यवस्था के तहत संबंधित कंपनियों को भारतीय मानक IS 19348:2025 का पालन करना होगा। सरकार ने निर्माताओं और संबंधित कारोबारियों को नए नियमों के अनुसार तैयारी करने के लिए समय दिया है।
इसका उद्देश्य बाजार में गुणवत्तापूर्ण उत्पादों की उपलब्धता बढ़ाना और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना है।
बिना BIS पंजीकरण के नहीं बिकेंगे संबंधित उत्पाद
नए नियम प्रभावी होने के बाद कंपनियों को निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुसार ग्लास स्क्रीन प्रोटेक्टर तैयार करने होंगे। इसके लिए संबंधित उत्पादों का आवश्यक परीक्षण और BIS पंजीकरण कराना होगा।
नियमों के दायरे में आने वाले उत्पाद निर्धारित आवश्यकताओं को पूरा करने के बाद ही बाजार में बेचे जा सकेंगे।
इस फैसले का असर उन कंपनियों पर पड़ सकता है, जो बिना पर्याप्त गुणवत्ता परीक्षण के सस्ते स्क्रीन प्रोटेक्टर तैयार करती हैं।
खराब क्वालिटी वाले स्क्रीन गार्ड पर लगेगी रोक
वर्तमान में मोबाइल एक्सेसरीज के बाजार में अलग-अलग कीमतों और गुणवत्ता वाले स्क्रीन गार्ड उपलब्ध हैं। कई बार ग्राहक कम कीमत के कारण ऐसे उत्पाद खरीद लेते हैं, जिनकी गुणवत्ता के बारे में विश्वसनीय जानकारी उपलब्ध नहीं होती।
खराब गुणवत्ता वाला स्क्रीन गार्ड मामूली दबाव या टक्कर लगने पर टूट सकता है। कुछ उत्पाद मोबाइल की टच स्क्रीन के इस्तेमाल को भी प्रभावित कर सकते हैं।
नई व्यवस्था के माध्यम से सरकार ऐसे उत्पादों की गुणवत्ता को निर्धारित मानकों के अनुरूप सुनिश्चित करना चाहती है।
क्या महंगे हो जाएंगे मोबाइल स्क्रीन गार्ड?
सरकार के इस फैसले के बाद स्क्रीन गार्ड की कीमतों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। गुणवत्ता परीक्षण, पंजीकरण और उत्पादन प्रक्रिया में बदलाव के कारण कुछ कंपनियों की लागत बढ़ सकती है।
इसका असर बाजार में उपलब्ध कुछ उत्पादों की कीमतों पर पड़ने की संभावना है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि नए नियम लागू होने के बाद स्क्रीन गार्ड की कीमतों में कितना बदलाव होगा।
सरकार ने इस अधिसूचना में स्क्रीन गार्ड की खुदरा कीमत निर्धारित नहीं की है।
ग्राहकों को क्या फायदा मिलेगा?
नई व्यवस्था से उपभोक्ताओं को निर्धारित मानकों के अनुरूप तैयार किए गए ग्लास स्क्रीन प्रोटेक्टर खरीदने में मदद मिल सकती है।
ग्राहक संबंधित उत्पाद के BIS पंजीकरण की जानकारी के आधार पर उसकी प्रमाणिकता जांच सकेंगे। इससे बाजार में गुणवत्ता संबंधी पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।
हालांकि, BIS प्रमाणित स्क्रीन गार्ड होने का मतलब यह नहीं है कि मोबाइल गिरने पर उसकी स्क्रीन कभी नहीं टूटेगी। मोबाइल की सुरक्षा गिरने की ऊंचाई, टक्कर की स्थिति और अन्य कारणों पर भी निर्भर करती है।
छोटे दुकानदारों और कारोबारियों पर भी पड़ेगा असर
नए नियम लागू होने के बाद मोबाइल एक्सेसरीज के थोक विक्रेताओं और खुदरा दुकानदारों को भी संबंधित उत्पादों की खरीद करते समय निर्धारित मानकों का ध्यान रखना होगा।
कारोबारियों के लिए यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होगा कि वे नियमों के दायरे में आने वाले प्रमाणित उत्पाद ही बेचें।
दूसरी ओर, गुणवत्तापूर्ण स्क्रीन प्रोटेक्टर बनाने वाली घरेलू कंपनियों के लिए यह व्यवस्था नए व्यावसायिक अवसर पैदा कर सकती है।
स्क्रीन गार्ड खरीदते समय रखें इन बातों का ध्यान
मोबाइल स्क्रीन गार्ड खरीदते समय ग्राहकों को उसकी गुणवत्ता, निर्माता और मोबाइल मॉडल के साथ अनुकूलता की जांच करनी चाहिए।
सिर्फ महंगी कीमत या आकर्षक पैकेजिंग को बेहतर गुणवत्ता का प्रमाण नहीं मानना चाहिए।
नए नियम लागू होने के बाद ग्राहक संबंधित BIS पंजीकरण विवरण की जांच करके उत्पाद खरीद सकेंगे।
केंद्र सरकार का यह फैसला मोबाइल एक्सेसरीज बाजार में गुणवत्ता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अब निर्माताओं और आयातकों को निर्धारित समयसीमा तक नए मानकों के अनुरूप अपनी तैयारियां पूरी करनी होंगी।