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Apple Pay की एंट्री से UPI पर पड़ेगा असर? जानिए पूरी कहानी

Apple Pay की सबसे बड़ी विशेषता Apple डिवाइस के साथ उसका एकीकरण है। उपयोगकर्ता को हर भुगतान के समय कार्ड नंबर टाइप करने की जरूरत नहीं पड़ती।

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Gauravshali Bharat News
  • October 3, 2026 4:58 pm IST, Published 13 seconds ago

नई दिल्ली। भारत के डिजिटल पेमेंट बाजार में Apple Pay की आधिकारिक एंट्री ने भुगतान व्यवस्था को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही पोस्ट और वीडियो में यह सवाल उठाया जा रहा है कि क्या Apple Pay आने से Unified Payments Interface यानी UPI के सामने नई चुनौती खड़ी हो सकती है और क्या भारत के बड़े बैंक Apple Pay से दूरी बना रहे हैं। तस्वीर को ध्यान से देखने पर मामला थोड़ा अलग नजर आता है। Apple Pay और UPI दोनों डिजिटल भुगतान से जुड़े हैं, लेकिन दोनों की तकनीक और काम करने का तरीका एक जैसा नहीं है।

भारत में Apple Pay की हुई आधिकारिक शुरुआत

Apple ने 30 सितंबर 2026 को भारत में Apple Pay लॉन्च करने की घोषणा की। शुरुआत में भारत में Apple Pay का इस्तेमाल Axis Bank द्वारा जारी Visa और Mastercard क्रेडिट कार्ड के साथ किया जा सकता है। कंपनी के अनुसार iPhone, iPad और Apple Watch पर यह सुविधा उपलब्ध है, जबकि Mac के लिए सपोर्ट बाद में आने की बात कही गई है।

Apple Pay की मदद से ग्राहक स्टोर, ऐप और ऑनलाइन वेबसाइटों पर भुगतान कर सकते हैं। स्टोर में NFC यानी Near Field Communication तकनीक के माध्यम से कॉन्टैक्टलेस भुगतान किया जा सकता है। भुगतान के समय Face ID, Touch ID या डिवाइस पासकोड के जरिए प्रमाणीकरण किया जाता है। Apple के मुताबिक, सामान्य भुगतान के दौरान कार्ड नंबर को हर बार व्यापारी के साथ साझा करने की जरूरत नहीं होती।

क्या Apple Pay सीधे UPI से मुकाबला करेगा?

यह सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में है, लेकिन दोनों व्यवस्थाओं के बीच बुनियादी अंतर समझना जरूरी है। UPI मुख्य रूप से बैंक खातों के बीच तत्काल डिजिटल भुगतान की व्यवस्था है। इसमें ग्राहक अपने बैंक खाते को UPI ऐप या समर्थित सेवा से जोड़कर दूसरे व्यक्ति अथवा व्यापारी को भुगतान कर सकता है।

इसके विपरीत, भारत में Apple Pay का मौजूदा लॉन्च कार्ड आधारित है। यानी शुरुआत में Axis Bank के पात्र Visa और Mastercard क्रेडिट कार्ड को Apple Pay में जोड़कर भुगतान किया जा सकता है। इसलिए इसे सीधे UPI का विकल्प कहना फिलहाल तकनीकी रूप से सही नहीं होगा।

यही वजह है कि Apple Pay की भारत में एंट्री को डिजिटल भुगतान क्षेत्र में एक नए विकल्प के तौर पर देखना अधिक उचित है, न कि UPI के तत्काल विकल्प के रूप में।

बड़े बैंकों की स्थिति ने बढ़ाई चर्चा

Apple Pay के शुरुआती लॉन्च में केवल Axis Bank के पात्र Visa और Mastercard क्रेडिट कार्ड का समर्थन उपलब्ध है। Apple की आधिकारिक सूची में फिलहाल Axis Bank ही शामिल है और कंपनी ने कहा है कि अतिरिक्त बैंक जुड़ने के साथ सूची अपडेट की जाएगी।

कुछ मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक HDFC Bank, ICICI Bank और SBI Card जैसे बड़े कार्ड जारीकर्ताओं के साथ बातचीत या व्यावसायिक शर्तों को लेकर प्रक्रिया पूरी नहीं हुई थी, इसलिए ये संस्थाएं लॉन्च के समय Apple Pay के साथ उपलब्ध नहीं थीं।

हालांकि, इसे यह कहना सही नहीं होगा कि ये बैंक हमेशा के लिए Apple Pay से दूर रहेंगे। Apple की अपनी जानकारी के अनुसार भविष्य में और बैंक तथा कार्ड नेटवर्क जुड़ सकते हैं। इसलिए वर्तमान स्थिति को लॉन्च-फेज की स्थिति के तौर पर देखना चाहिए।

UPI की पहुंच अभी भी बेहद व्यापक

Apple Pay की एंट्री ऐसे समय हुई है जब भारत में UPI पहले से बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहा है। NPCI के आंकड़ों के मुताबिक अगस्त 2026 में UPI पर 24,508.96 मिलियन यानी करीब 24.51 अरब लेनदेन हुए और इनका कुल मूल्य लगभग ₹29.82 लाख करोड़ रहा। उस समय 752 बैंक UPI पर लाइव थे।

सितंबर के आंकड़ों में कुल मासिक लेनदेन में गिरावट दर्ज हुई और लगभग 24.07 अरब लेनदेन हुए। इसके बावजूद रोजाना औसत लेनदेन का स्तर बहुत बड़ा रहा। उपलब्ध आंकड़ों से यह संकेत मिलता है कि UPI भारत की डिजिटल भुगतान व्यवस्था में अभी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

इसलिए केवल Apple Pay के लॉन्च को UPI के कमजोर होने का प्रमाण मानना उचित नहीं होगा।

UPI में भी बदल रहा है शुल्क का ढांचा

इसी बीच UPI को लेकर एक अन्य बड़ा बदलाव भी चर्चा में है। केंद्र सरकार ने सितंबर 2026 में स्पष्ट किया कि व्यक्ति-से-व्यक्ति यानी P2P UPI भुगतान पर नया MDR लागू नहीं होगा। ₹2,000 तक के व्यापारी भुगतान और कुछ शून्य-MDR श्रेणियों में भी शुल्क नहीं लगाया जाएगा। सरकार के अनुसार लगभग 96 प्रतिशत P2M लेनदेन प्रभावित नहीं होंगे।

कुछ निर्धारित व्यापारी लेनदेन पर ₹2,000 से अधिक की राशि के लिए नया MDR ढांचा लागू किया जाना है। इससे भुगतान कंपनियों, बैंकों और व्यापारियों के बीच भुगतान व्यवस्था की अर्थव्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हुई है।

यह बदलाव Apple Pay की भारत में एंट्री से अलग मुद्दा है, लेकिन दोनों घटनाएं देश के डिजिटल भुगतान बाजार में हो रहे बदलाव को समझने के लिए महत्वपूर्ण हैं।

Apple Pay से ग्राहकों को क्या फायदा?

Apple Pay की सबसे बड़ी विशेषता Apple डिवाइस के साथ उसका एकीकरण है। उपयोगकर्ता को हर भुगतान के समय कार्ड नंबर टाइप करने की जरूरत नहीं पड़ती। स्टोर में कॉन्टैक्टलेस मशीन के सामने डिवाइस लाकर प्रमाणीकरण के बाद भुगतान किया जा सकता है। Apple के अनुसार कंपनी Apple Pay के लिए खुद कोई अतिरिक्त भुगतान शुल्क नहीं लेती, हालांकि कार्ड जारी करने वाला बैंक अपनी सामान्य फीस लागू कर सकता है।

दूसरी तरफ UPI की खासियत बैंक खाते से सीधे भुगतान, QR कोड के व्यापक इस्तेमाल और व्यक्ति-से-व्यक्ति भुगतान की सुविधा है। यही अंतर दोनों प्रणालियों को अलग-अलग उपयोग परिस्थितियों में उपयोगी बनाता है।

क्या आने वाले समय में बढ़ेगा मुकाबला?

भारत में Apple Pay का विस्तार यदि और बैंकों तथा कार्ड नेटवर्क तक होता है, तो डिजिटल भुगतान क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा का एक नया आयाम जरूर जुड़ सकता है। लेकिन यह देखना अभी बाकी है कि कितने बैंक Apple Pay को अपनाते हैं, कितने ग्राहक इसका इस्तेमाल करते हैं और क्या भविष्य में Apple की सेवा भारत में UPI जैसी बैंक-टू-बैंक भुगतान सुविधा के साथ किसी व्यापक रूप में जुड़ती है।

फिलहाल उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के आधार पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि Apple Pay भारत में UPI को खत्म करने या कमजोर करने की स्थिति में पहुंच गया है। वास्तविक तस्वीर आने वाले महीनों में बैंक समर्थन, ग्राहक अपनाने और भुगतान व्यवहार के आंकड़ों से ज्यादा स्पष्ट होगी।

निष्कर्ष: वायरल दावे में उठाया गया सवाल दिलचस्प जरूर है, लेकिन वर्तमान स्थिति में Apple Pay को UPI का सीधा विकल्प मानना सही नहीं है। भारत में Apple Pay की शुरुआत मुख्य रूप से समर्थित क्रेडिट कार्ड के जरिए कॉन्टैक्टलेस और ऑनलाइन भुगतान से हुई है, जबकि UPI बैंक खाते आधारित तत्काल भुगतान का व्यापक नेटवर्क बना हुआ है।

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