कफ सिरप तस्करी में बड़ा खुलासा, झारखंड से जुड़ा वाराणसी कनेक्शन

कफ सिरप की कथित तस्करी से जुड़े एक मामले की जांच में वाराणसी से झारखंड तक फैले नेटवर्क की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस की कार्रवाई तेज हो गई है।

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  • October 5, 2026 9:49 pm IST, Published 1 hour ago

वाराणसी/रांची। कफ सिरप की कथित तस्करी से जुड़े एक मामले की जांच में वाराणसी से झारखंड तक फैले नेटवर्क की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस की कार्रवाई तेज हो गई है। पुलिस के अनुसार, रोहनिया थाना क्षेत्र से जुड़े इस मामले में कफ सिरप की बड़ी खेप बरामद होने के साथ ही फर्जी दस्तावेजों के जरिए ड्रग लाइसेंस हासिल करने के प्रयास का भी खुलासा हुआ है। मामले में पुलिस ने सरगना बताए जा रहे शुभम जायसवाल से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच शुरू कर दी है।

पुलिस के मुताबिक, झारखंड की राजधानी रांची में ड्रग लाइसेंस हासिल करने के लिए अनुभव प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने के आरोप में कायस्थ टोला, प्रहलादघाट निवासी सरगना शुभम जायसवाल से जुड़े एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है। जांच में सामने आया कि बिजली उपकरणों की सामान्य दुकान चलाने वाले विकास सिंह ने कथित तौर पर रांची में ड्रग लाइसेंस हासिल करने के लिए आवश्यक अनुभव प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने में भूमिका निभाई थी।

बताया जा रहा है कि विकास सिंह करीब दो महीने तक रांची में रहा था। इस दौरान उसने कथित तौर पर भोलानाथ प्रसाद, जिन्हें शुभम का पिता बताया जा रहा है, के सहयोग से संभावी फार्मा नाम से दवा की एजेंसी शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई। पुलिस जांच में यह भी आरोप सामने आया है कि इसी प्रक्रिया के तहत कफ सिरप के कारोबार से जुड़े दस्तावेज तैयार किए गए और ड्रग लाइसेंस हासिल करने के लिए करीब दो वर्ष के अनुभव का प्रमाणपत्र उपलब्ध कराया गया।

500 पेटी कफ सिरप बरामद होने के बाद खुला मामला

मामले में कार्रवाई उस समय तेज हुई जब रोहनिया पुलिस ने करीब 500 पेटी कफ सिरप बरामद किए। पुलिस इस बरामदगी को कथित तस्करी नेटवर्क की जांच की महत्वपूर्ण कड़ी मान रही है। बड़ी मात्रा में कफ सिरप मिलने के बाद पुलिस ने यह पता लगाने का प्रयास किया कि दवा कहां से लाई गई थी, इसे कहां भेजा जाना था और इसके कारोबार के लिए किन लोगों तथा फर्मों का इस्तेमाल किया जा रहा था।

जांच के दौरान पुलिस टीम रांची पहुंची और वहां ड्रग विभाग से संपर्क किया। अधिकारियों से जानकारी जुटाने के दौरान विकास सिंह की भूमिका पुलिस के सामने आई। इसके बाद उसे मामले में आरोपी बनाकर गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई है।

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कफ सिरप की कथित तस्करी का नेटवर्क केवल वाराणसी और रांची तक सीमित था या इसके तार दूसरे राज्यों और शहरों तक भी जुड़े हुए हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि बरामद कफ सिरप वैध तरीके से खरीदा गया था या फिर इसे अवैध आपूर्ति के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था।

बैंक खातों के लेनदेन से जांच को मिली नई दिशा

पुलिस जांच में वित्तीय लेनदेन भी महत्वपूर्ण कड़ी बनकर सामने आया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मामले की जांच के दौरान आरोपी वरुण सिंह के बैंक खाते में रुपये के लेनदेन की जानकारी पुलिस को मिली। पुलिस अब कथित रूप से दवा की खरीद-बिक्री और अन्य गतिविधियों से जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है।

जांच एजेंसियां यह समझने का प्रयास कर रही हैं कि अलग-अलग व्यक्तियों के बैंक खातों के जरिए रकम का लेनदेन किस उद्देश्य से किया गया। इसके साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि कथित कफ सिरप कारोबार में शामिल लोगों के बीच आर्थिक संबंध किस स्तर तक थे।

ऐसे मामलों में पुलिस आमतौर पर बैंक खातों, मोबाइल फोन, दस्तावेजों, फर्म के रिकॉर्ड और दवा खरीद-बिक्री से संबंधित कागजात की जांच करती है। इससे नेटवर्क में शामिल लोगों की भूमिका और कथित धन प्रवाह की जानकारी जुटाने में मदद मिल सकती है।

शुभम जायसवाल पर जांच का केंद्र, कई पहलू खंगाल रही पुलिस

पुलिस की जांच का एक प्रमुख केंद्र शुभम जायसवाल बताया जा रहा है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, शुभम पर कफ सिरप की कथित तस्करी से जुड़े नेटवर्क में भूमिका होने का आरोप है। जांच में यह भी सामने आया है कि उसके पिता से मिले अनुभव प्रमाणपत्र के आधार पर रांची की शैली ट्रेडर्स का कथित रूप से कंपटीट पर्सन बनने की प्रक्रिया से जुड़ाव रहा।

पुलिस अब यह जांच कर रही है कि अलग-अलग फर्मों के बीच वास्तविक कारोबारी संबंध क्या थे और ड्रग लाइसेंस से जुड़े दस्तावेजों का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया। इसके अलावा यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कफ सिरप की कथित सप्लाई के लिए कौन-कौन से माध्यम इस्तेमाल किए गए।

मामले में वरुण सिंह की भूमिका भी जांच के दायरे में है। पुलिस के अनुसार, वरुण पर भी कफ सिरप की कथित तस्करी में शामिल होने का आरोप है। हालांकि, मामले से जुड़े सभी आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

गिरफ्तारी से पहले फरार बताए गए आरोपी की तलाश

जांच के दौरान पुलिस को यह भी जानकारी मिली कि वरुण सिंह कथित तौर पर शुभम के साथ दुबई भागने की तैयारी में था। इसी वजह से पुलिस उसकी तलाश में जुटी रही। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उसे अभी गिरफ्तार नहीं किया जा सका है।

पुलिस का कहना है कि मामले में फरार आरोपियों की तलाश के साथ-साथ उनके संभावित संपर्कों और आर्थिक गतिविधियों की भी जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि विदेश जाने की कथित तैयारी का इस मामले से कोई सीधा संबंध था या नहीं।

कफ सिरप की अवैध आपूर्ति पर बढ़ी निगरानी

कफ सिरप की बड़ी खेप बरामद होने के बाद यह मामला दवा कारोबार की निगरानी को लेकर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वैध दवा कारोबार के लिए आवश्यक लाइसेंस, दस्तावेज और खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड की जांच इस तरह के मामलों में अहम होती है।

पुलिस और संबंधित विभाग अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि कथित तौर पर लाइसेंस हासिल करने के लिए अनुभव प्रमाणपत्र कैसे तैयार किया गया और संबंधित दस्तावेजों की सत्यता की जांच किस स्तर पर हुई। यदि दस्तावेजों में अनियमितता या फर्जीवाड़ा प्रमाणित होता है तो मामले में संबंधित धाराओं के तहत आगे की कार्रवाई हो सकती है।

फिलहाल पुलिस की जांच बरामद 500 पेटी कफ सिरप, ड्रग लाइसेंस से जुड़े दस्तावेज, संबंधित फर्मों, बैंक खातों और आरोपियों के आपसी संपर्कों पर केंद्रित है। पुलिस की आगे की कार्रवाई से इस कथित नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों और कफ सिरप की सप्लाई की पूरी श्रृंखला के बारे में और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

नोट: इस खबर में आरोपों का उल्लेख पुलिस जांच और उपलब्ध रिपोर्ट के आधार पर किया गया है। आरोपों की अंतिम पुष्टि सक्षम न्यायालय में साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगी।

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