श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने 504 बांग्लादेशी नागरिकों को डिपोर्ट किए जाने के बाद अब प्रदेश में रह रहे 15 हजार से अधिक रोहिंग्याओं के सत्यापन और पहचान की प्रक्रिया तेज करने की तैयारी शुरू कर दी है। प्रशासन की ओर से संबंधित लोगों का डाटा तैयार किया जा रहा है और उनकी पहचान व दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
बताया जा रहा है कि बांग्लादेशी और रोहिंग्या लोगों की पहचान और सत्यापन की प्रक्रिया इसी साल अगस्त में केंद्र सरकार के एक उच्चस्तरीय दल के जम्मू-कश्मीर दौरे के बाद तेज हुई। यह दल प्रदेश में जनसांख्यिकीय बदलाव से जुड़े मामलों का आकलन करने के लिए पहुंचा था।
पिछले महीने जम्मू के नरवाल इलाके में रोहिंग्या बस्ती को खाली कराया गया था। इसके अलावा रैका के जंगल क्षेत्र में वन भूमि पर कथित तौर पर कब्जा कर बनाई गई रोहिंग्या झुग्गियों को भी प्रशासन ने हटाया था।
अधिकारियों के अनुसार, अवैध कब्जे और दस्तावेजों से जुड़े मामलों में आगे भी कार्रवाई जारी रह सकती है। प्रशासन ने ऐसे मामलों की पहचान के लिए स्थानीय स्तर पर सत्यापन प्रक्रिया को तेज करने के संकेत दिए हैं।
केंद्रीय दल से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में 504 बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान की गई है। उपलब्ध आंकड़ों में कश्मीर क्षेत्र में इनकी संख्या अधिक बताई गई है।
वहीं, रोहिंग्याओं को शामिल करने पर जम्मू-कश्मीर में ऐसे लोगों की कुल संख्या 15 हजार से अधिक बताई जा रही है। प्रशासन अब इनकी पहचान, निवास और दस्तावेजों से संबंधित जानकारी को सत्यापित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है।
सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे मामले के सुरक्षा पहलुओं की भी जांच कर रही हैं। पुलिस और अन्य एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कथित तौर पर बाहरी लोगों को जम्मू-कश्मीर तक पहुंचने में किस तरह की मदद मिली और इसमें कोई संगठित नेटवर्क शामिल है या नहीं।
प्रशासन का कहना है कि सत्यापन और जांच की प्रक्रिया के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।