यूपी में फसल नुकसान का डिजिटल सर्वे 12 अक्टूबर तक होगा पूरा

सरकार ने फसल नुकसान के आकलन को ज्यादा वैज्ञानिक और तथ्यपरक बनाने के लिए मौसम संबंधी आंकड़ों को भी सर्वे प्रक्रिया से जोड़ने का फैसला किया है। इसके लिए भारतीय मौसम विज्ञान विभाग यानी आईएमडी से प्राप्त मौसम और बारिश के आंकड़ों का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके अलावा ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन और ऑटोमेटिक रेन गेज यानी AWS-ARG से मिलने वाली जानकारी भी नुकसान के आकलन में...

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  • October 7, 2026 6:30 pm IST, Published 2 minutes ago

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में बारिश और बाढ़ से प्रभावित किसानों को राहत पहुंचाने के लिए फसल नुकसान का डिजिटल क्रॉप सर्वे 12 अक्टूबर तक पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसानों की फसलों को हुए नुकसान का आकलन केवल लेखपाल और कानूनगो की रिपोर्ट के आधार पर नहीं किया जाएगा। इसके लिए डिजिटल क्रॉप सर्वे में दर्ज जानकारी को मुख्य आधार बनाया जाएगा और आंकड़ों की उच्च स्तर पर जांच भी कराई जाएगी।

प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि सर्वे के दौरान सामने आए फसल नुकसान की वास्तविक स्थिति का मौके पर सत्यापन किया जाए। उप जिलाधिकारी और तहसीलदार डिजिटल क्रॉप सर्वे में दर्ज नुकसान के आंकड़ों की जांच करेंगे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नुकसान और खेतों में मौजूद वास्तविक स्थिति के बीच किसी तरह का अंतर न रहे।

सरकार की ओर से संबंधित अधिकारियों को हर हाल में 12 अक्टूबर तक राहत पोर्टल पर डिजिटल क्रॉप सर्वे के आधार पर फसल नुकसान की फीडिंग पूरी करने को कहा गया है। इसके लिए जिलों और तहसीलों में सर्वे की प्रगति की लगातार निगरानी की जाएगी। अधिकारियों को प्रतिदिन सर्वे से जुड़ी रिपोर्ट गूगल शीट के साथ राहत पोर्टल पर भी दर्ज करनी होगी।

डिजिटल माध्यम से सर्वे और उसकी नियमित रिपोर्टिंग का उद्देश्य फसल नुकसान से जुड़ी जानकारी को एक जगह उपलब्ध कराना है। इससे प्रशासन को अलग-अलग जिलों और तहसीलों में नुकसान की स्थिति पर नजर रखने में मदद मिलेगी। साथ ही यह भी पता लगाया जा सकेगा कि किन क्षेत्रों में बारिश और बाढ़ के कारण किसानों की फसलों को कितना नुकसान हुआ है।

किसानों को राहत देने के लिए बजट की मांग भी सर्वे के दौरान सामने आए वास्तविक आंकड़ों के आधार पर की जाएगी। यानी राहत राशि तय करने में अनुमानित नुकसान के बजाय डिजिटल क्रॉप सर्वे में दर्ज जानकारी को महत्व दिया जाएगा। इससे प्रभावित किसानों के लिए आवश्यक वित्तीय सहायता का आकलन अधिक व्यवस्थित तरीके से किए जाने की उम्मीद है।

सरकार ने फसल नुकसान के आकलन को ज्यादा वैज्ञानिक और तथ्यपरक बनाने के लिए मौसम संबंधी आंकड़ों को भी सर्वे प्रक्रिया से जोड़ने का फैसला किया है। इसके लिए भारतीय मौसम विज्ञान विभाग यानी आईएमडी से प्राप्त मौसम और बारिश के आंकड़ों का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके अलावा ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन और ऑटोमेटिक रेन गेज यानी AWS-ARG से मिलने वाली जानकारी भी नुकसान के आकलन में उपयोग की जाएगी।

इन मौसम संबंधी आंकड़ों के जरिए प्रभावित इलाकों में हुई बारिश की वास्तविक स्थिति का मिलान फसल नुकसान की रिपोर्ट से किया जा सकेगा। इससे प्रशासन को यह समझने में मदद मिलेगी कि किसी क्षेत्र में बारिश की मात्रा कितनी रही और उसके कारण फसलों पर किस स्तर का असर पड़ा। इस प्रक्रिया में डिजिटल सर्वे, प्रशासनिक सत्यापन और मौसम संबंधी आंकड़ों को एक साथ देखा जाएगा।

सरकार के निर्देशों के मुताबिक, लेखपाल और कानूनगो की रिपोर्ट को अकेला आधार नहीं बनाया जाएगा। एसडीएम और तहसीलदार स्तर पर आंकड़ों का क्रॉस-वेरिफिकेशन किया जाएगा, ताकि राहत प्रक्रिया में वास्तविक नुकसान सामने आए। इसके साथ ही सर्वे की दैनिक निगरानी और पोर्टल पर नियमित अपडेट के जरिए पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने की कोशिश की जा रही है।

बारिश और बाढ़ से प्रभावित किसानों के लिए फसल नुकसान का सही आकलन राहत राशि तय करने की प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। ऐसे में 12 अक्टूबर की समयसीमा तक डिजिटल क्रॉप सर्वे पूरा करना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण लक्ष्य है। सर्वे में दर्ज आंकड़ों के आधार पर ही प्रभावित क्षेत्रों और किसानों को राहत देने के लिए आवश्यक बजट की मांग आगे बढ़ाई जाएगी।

 

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