नई दिल्ली। विश्व पशु दिवस 2026 के अवसर पर टैगोर गार्डन, नई दिल्ली में पशु कल्याण एवं स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। दिल्ली सोसाइटी फॉर प्रिवेंशन ऑफ क्रुएल्टी टू एनिमल्स के सहयोग से आयोजित इस शिविर में कुत्तों और बिल्लियों को निःशुल्क रेबीज़ का टीका लगाया गया। इसके साथ ही बीमार और घायल पशुओं की जांच कर उन्हें आवश्यक उपचार एवं प्राथमिक चिकित्सा भी उपलब्ध कराई गई।
शिविर का आयोजन योगेंद्र कुमार, सहायक अधीक्षक, तिहाड़ जेल के सहयोग से किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पशु प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों ने भाग लिया। शिविर के दौरान पशुओं के स्वास्थ्य की जांच, टीकाकरण और उपचार के साथ लोगों को पशु कल्याण के प्रति जागरूक भी किया गया।
पशुओं को समय पर स्वास्थ्य सुविधा देने पर जोर
आयोजकों के अनुसार, शिविर का प्रमुख उद्देश्य ऐसे पशुओं तक प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना था, जिन्हें सामान्य परिस्थितियों में उपचार या टीकाकरण की सुविधा आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाती। कुत्तों और बिल्लियों के लिए रेबीज़ टीकाकरण को विशेष प्राथमिकता दी गई।
रेबीज़ एक गंभीर और जानलेवा बीमारी है, जिसका संक्रमण संक्रमित पशु के काटने या लार के संपर्क में आने से हो सकता है। ऐसे में पालतू और सामुदायिक कुत्तों का समय पर टीकाकरण सार्वजनिक स्वास्थ्य की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। शिविर के माध्यम से पशु स्वास्थ्य और मानव सुरक्षा के बीच संबंध को लेकर भी लोगों को जागरूक किया गया।
योगेंद्र कुमार ने बताया नियमित टीकाकरण का महत्व
इस अवसर पर योगेंद्र कुमार ने कहा कि पशु कल्याण के लिए इस तरह के स्वास्थ्य और टीकाकरण शिविर समय-समय पर आयोजित किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि रेबीज़ से बचाव के लिए कुत्तों का नियमित टीकाकरण बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि जब लोगों को यह विश्वास होगा कि क्षेत्र में रहने वाले पशुओं का नियमित टीकाकरण और उपचार हो रहा है, तो उनके प्रति अनावश्यक भय कम होगा। इससे मनुष्यों और पशुओं के बीच बेहतर सामंजस्य बनाने में मदद मिलेगी तथा समाज में पशुओं के प्रति प्रेम, दया और करुणा की भावना को बढ़ावा मिलेगा।
पशुओं के प्रति संवेदनशील व्यवहार की अपील
कार्यक्रम में जसमीत कौर ने नागरिकों से कुत्तों, बिल्लियों और अन्य पशुओं के प्रति संवेदनशील व्यवहार करने की अपील की। उन्होंने कहा कि पृथ्वी और प्रकृति पर जितना हमारा अधिकार है, उतना ही इन मूक प्राणियों का भी है। इसलिए मनुष्य का दायित्व है कि वह पशुओं के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता का परिचय दे।
उन्होंने कहा कि पशु हमारे पर्यावरण और सामाजिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उनके साथ मानवीय व्यवहार करना केवल दया का विषय नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार और संवेदनशील समाज की पहचान भी है।
बड़ी संख्या में पशुओं का टीकाकरण और उपचार
शिविर में बड़ी संख्या में कुत्तों और बिल्लियों को रेबीज़ का टीका लगाया गया। बीमार एवं घायल पशुओं की चिकित्सकीय जांच कर उनकी स्थिति के अनुसार उपचार किया गया। इस दौरान पशु प्रेमियों और स्वयंसेवकों ने पशुओं को शिविर तक लाने, उन्हें संभालने और उपचार प्रक्रिया में सहयोग किया।
आयोजकों ने बताया कि इस प्रकार के शिविर विशेष रूप से उन क्षेत्रों में महत्वपूर्ण हैं, जहां बड़ी संख्या में सामुदायिक पशु रहते हैं। नियमित टीकाकरण से पशुओं के स्वास्थ्य की निगरानी में मदद मिलती है और रेबीज़ जैसी गंभीर बीमारी के प्रसार को रोकने की दिशा में भी प्रयास मजबूत होते हैं।
पशु प्रेमियों ने बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा
कार्यक्रम में बी.के. पाण्डेय, इंदर सोनी, मानद पशु कल्याण प्रतिनिधि, पशु प्रेमी जतिन भल्ला, सोनू, जोगिंदर शर्मा, राम निवास यादव, प्रतीक सिंगल, सुरेंद्र पाल सिंह, गुरदीप सिंह और विक्रम सिंह धीर सहित अनेक पशु प्रेमियों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने पशु कल्याण के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका कहना था कि केवल सरकारी या संस्थागत स्तर पर किए जाने वाले प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। स्थानीय नागरिकों, पशु प्रेमियों और सामाजिक संगठनों की भागीदारी से ही पशुओं के लिए बेहतर वातावरण तैयार किया जा सकता है।
उपचार के साथ करुणा की संस्कृति मजबूत करना लक्ष्य
आयोजकों ने कहा कि ऐसे शिविरों का उद्देश्य केवल पशुओं का उपचार और टीकाकरण करना नहीं है। इसके पीछे समाज में पशु प्रेम और करुणा की संस्कृति को मजबूत करने की व्यापक सोच भी है।
उन्होंने कहा कि यदि नागरिक सामुदायिक पशुओं के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपनाएं, घायल या बीमार पशु दिखाई देने पर उनकी मदद के लिए आगे आएं और टीकाकरण को लेकर जागरूक रहें, तो पशु कल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव लाया जा सकता है।
विश्व पशु दिवस के अवसर पर आयोजित यह शिविर इसी संदेश को मजबूत करता दिखाई दिया कि पशु भी समाज और पर्यावरण का अभिन्न हिस्सा हैं। उनके स्वास्थ्य, सुरक्षा और सम्मान के लिए सामूहिक जिम्मेदारी निभाना जरूरी है। टैगोर गार्डन में आयोजित इस पहल ने पशु कल्याण के साथ-साथ इंसान और पशु के बीच सह-अस्तित्व तथा संवेदनशील संबंध का संदेश भी दिया।