रायपुर: छत्तीसगढ़ में धान खरीदी शुरू होने से पहले राज्य सरकार ने किसानों को बड़ी राहत दी है। संयुक्त खातों में जमीन के सह-खातेदारों के अलग-अलग पंजीयन की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है। अब ऐसे परिवारों में केवल लंबरदार या मुख्य खातेदार का एग्रीस्टैक में पंजीयन कराना पर्याप्त होगा। इसी पंजीयन के आधार पर समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी की जाएगी। सरकार के इस फैसले से उन हजारों किसान परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें पंजीयन के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों और संबंधित केंद्रों के चक्कर लगाने पड़ते थे।
दरअसल, धान खरीदी के लिए किसानों का एग्रीस्टैक पोर्टल पर पंजीयन जरूरी किया गया था। संयुक्त खातों को लेकर पहले व्यवस्था यह थी कि एक ही जमीन पर यदि एक से अधिक लोगों के नाम दर्ज हैं तो सभी सह-खातेदारों का अलग-अलग पंजीयन कराना पड़ता था। इस प्रक्रिया में किसानों को दस्तावेज जुटाने, सत्यापन कराने और पंजीयन पूरा कराने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। खासकर ग्रामीण इलाकों में एक ही परिवार के कई सदस्यों के नाम जमीन दर्ज होने की स्थिति में यह प्रक्रिया अधिक परेशानी वाली बन रही थी।
अब सरकार ने इस व्यवस्था को सरल कर दिया है। नए निर्देश के अनुसार संयुक्त खाते की स्थिति में परिवार के लंबरदार या मुख्य खातेदार का एग्रीस्टैक में पंजीयन ही पर्याप्त माना जाएगा। यानी एक ही खाते से जुड़े सभी सह-खातेदारों को अलग-अलग पंजीयन कराने की जरूरत नहीं होगी। धान बेचने के लिए पात्रता और खरीदी की प्रक्रिया मुख्य खातेदार के पंजीयन के आधार पर आगे बढ़ाई जाएगी। सरकार के इस फैसले का सीधा असर धान खरीदी की तैयारी कर रहे किसानों पर पड़ेगा। पंजीयन की प्रक्रिया सरल होने से किसानों का समय और श्रम दोनों बचेंगे। साथ ही दस्तावेजों के सत्यापन और अलग-अलग सह-खातेदारों के पंजीयन से जुड़ी तकनीकी दिक्कतों में भी कमी आने की संभावना है। संयुक्त परिवारों के लिए यह बदलाव खास तौर पर उपयोगी माना जा रहा है, क्योंकि एक ही कृषि भूमि से जुड़े कई लोगों के अलग-अलग पंजीयन की आवश्यकता अब नहीं रहेगी।
छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी 15 नवंबर से शुरू होने जा रही है। खरीफ सीजन की प्रमुख फसल धान होने के कारण राज्य में इसकी खरीदी को लेकर किसानों और प्रशासन दोनों की तैयारियां तेज हो गई हैं। खाद्य विभाग और सहकारिता विभाग खरीदी केंद्रों की व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। केंद्रों पर बारदाना, तौल, परिवहन और किसानों से जुड़ी अन्य व्यवस्थाओं को लेकर भी तैयारियां की जा रही हैं।
धान खरीदी से पहले पंजीयन व्यवस्था में बदलाव को सरकार की ओर से किसानों की सुविधा के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। एग्रीस्टैक में पंजीयन की प्रक्रिया आसान होने से किसानों को अनावश्यक औपचारिकताओं से राहत मिलेगी। खासकर उन परिवारों को इसका लाभ मिलेगा जिनकी कृषि भूमि संयुक्त खाते में दर्ज है और जिनके कई सदस्य सह-खातेदार हैं।
आने वाले दिनों में धान खरीदी को लेकर सरकार और संबंधित विभागों की ओर से विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं। इसमें खरीदी केंद्रों की व्यवस्था, किसानों के पंजीयन, धान की गुणवत्ता, भुगतान और अन्य प्रक्रियाओं से संबंधित नियमों को स्पष्ट किया जाएगा। फिलहाल संयुक्त खातों में सह-खातेदारों के अनिवार्य पंजीयन की बाध्यता खत्म किए जाने से किसानों के लिए धान बेचने की प्रक्रिया पहले की तुलना में आसान होने की उम्मीद है।