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नासिक कुंभ मेला स्थल के पास भूजल में मिला जहरीला क्रोमियम-6

तय सीमा से 1,000 गुना ज्यादा मात्रा; स्वास्थ्य को लेकर बढ़ी चिंता नासिक। महाराष्ट्र के नासिक में अगस्त 2027 में आयोजित होने वाले कुंभ मेले से पहले भूजल प्रदूषण को लेकर चिंता बढ़ गई है। कुंभ मेला क्षेत्र के पास स्थित अंबड औद्योगिक क्षेत्र के भूजल की प्रयोगशाला जांच में क्रोमियम-6 की अत्यधिक मात्रा मिलने […]

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  • October 13, 2026 8:50 am IST, Published 2 hours ago

तय सीमा से 1,000 गुना ज्यादा मात्रा; स्वास्थ्य को लेकर बढ़ी चिंता

नासिक। महाराष्ट्र के नासिक में अगस्त 2027 में आयोजित होने वाले कुंभ मेले से पहले भूजल प्रदूषण को लेकर चिंता बढ़ गई है। कुंभ मेला क्षेत्र के पास स्थित अंबड औद्योगिक क्षेत्र के भूजल की प्रयोगशाला जांच में क्रोमियम-6 की अत्यधिक मात्रा मिलने का दावा किया गया है। जांच के अनुसार, पानी में इस जहरीले रासायनिक तत्व की मात्रा 50.3 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज की गई, जो पेयजल के लिए बताई गई 0.05 मिलीग्राम प्रति लीटर की सीमा से 1,000 गुना से भी अधिक है।

यह जांच दक्षिण एशिया बांध, नदियां और जन संगठन (SANDRP) के लिए कराई गई थी। रिपोर्ट सामने आने के बाद स्थानीय लोगों की सेहत, भूजल की गुणवत्ता और गोदावरी नदी के पानी को लेकर सवाल उठने लगे हैं। संगठन ने दूषित नालों और गोदावरी नदी के पानी की भी जांच कराने की मांग की है।

क्या है क्रोमियम-6 और कितना खतरनाक है?

क्रोमियम-6, जिसे हेक्सावैलेंट क्रोमियम भी कहा जाता है, क्रोमियम का एक जहरीला रासायनिक रूप है। इसका उपयोग कुछ औद्योगिक प्रक्रियाओं में किया जाता है, जिनमें धातुओं पर परत चढ़ाना और सतहों का उपचार शामिल है।

इस रासायनिक तत्व के संपर्क में आने से स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय कैंसर अनुसंधान एजेंसी ने क्रोमियम-6 के यौगिकों को मनुष्यों में कैंसर पैदा करने वाला माना है। दूषित पानी के लंबे समय तक सेवन से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं।

हालांकि, नासिक के भूजल में इसकी मौजूदगी से जुड़े स्थानीय स्वास्थ्य प्रभावों का आकलन करने के लिए विस्तृत वैज्ञानिक जांच आवश्यक है।

बोरवेल से पीला पानी आने की शिकायत

रिपोर्ट के मुताबिक, अंबड औद्योगिक क्षेत्र के आसपास रहने वाले लोग बोरवेल से पीला पानी आने की शिकायत कर रहे हैं। दूषित पानी के संपर्क में आने से बच्चों सहित कुछ लोगों की त्वचा पर चकत्ते, छाले और दर्दनाक घाव होने की बात भी सामने आई है।

इन शिकायतों की स्वतंत्र चिकित्सकीय और पर्यावरणीय जांच जरूरी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि त्वचा संबंधी समस्याओं का संबंध वास्तव में पानी में मौजूद प्रदूषकों से है या नहीं।

कंपनी को कारण बताओ नोटिस, फैक्टरियों पर भी कार्रवाई

महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 30 सितंबर को एक कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। खबर के अनुसार, क्षेत्र की 15 फैक्टरियों को बंद करने के नोटिस दिए जाने या उन्हें सील किए जाने की कार्रवाई भी हुई है।

नासिक के जिलाधिकारी आयुष प्रसाद ने रविवार को क्षेत्र के दौरे पर पहुंचे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सामने भी जांच रिपोर्ट रखी। अब इस मामले में प्रदूषण के स्रोत और औद्योगिक इकाइयों की संभावित भूमिका की जांच महत्वपूर्ण होगी।

कुंभ मेले से पहले गोदावरी के पानी की जांच की मांग

नासिक में अगस्त 2027 में कुंभ मेले का आयोजन प्रस्तावित है। इस दौरान देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। ऐसे में आयोजन से पहले भूजल और नदी के पानी की गुणवत्ता सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण चुनौती है।

SANDRP ने दूषित नालों और गोदावरी नदी के पानी की जांच कराने की मांग की है। यदि प्रदूषण का प्रभाव नदी तक पहुंचा है, तो उसके स्रोत की पहचान कर समय रहते रोकथाम के उपाय करना जरूरी होगा।

अब सबसे अहम सवाल यह है कि भूजल में क्रोमियम-6 कहां से पहुंचा और स्थानीय लोगों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। कुंभ मेले से पहले वैज्ञानिक जांच, प्रदूषण नियंत्रण और नियमित जल गुणवत्ता निगरानी इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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