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बिलासपुर एयरपोर्ट के विकास पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से तीन सप्ताह में मांगा जवाब

राज्य सरकार बिलासपुर के अलावा अंबिकापुर और जगदलपुर एयरपोर्ट को भी भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को सौंपने के विकल्प पर विचार कर रही है। हालांकि, प्राधिकरण ने इस प्रस्ताव पर स्पष्ट सहमति देने के बजाय राज्य सरकार से जमीन का विवरण, खसरा-वार जानकारी, स्वामित्व और उपलब्ध सुविधाओं से जुड़े दस्तावेज मांगे हैं। इन जानकारियों के आधार पर ही आगे की...

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  • October 14, 2026 6:30 pm IST, Published 2 hours ago

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बिलासपुर एयरपोर्ट पर हवाई सुविधाओं के विस्तार और उसे बेहतर बनाने के मामले में राज्य सरकार तथा भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) से जवाब मांगा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि एयरपोर्ट के विकास को लेकर केवल पत्राचार करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि संबंधित एजेंसियों को जिम्मेदारी तय करके धरातल पर ठोस कदम उठाने होंगे। जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को तीन सप्ताह के भीतर विस्तृत शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है।

मुख्य न्यायाधीश कृष्णा राम महापात्र और न्यायमूर्ति संतोष शर्मा की खंडपीठ ने राज्य सरकार से पूछा है कि बिलासपुर एयरपोर्ट को 4सी श्रेणी में विकसित करने के लिए अब तक क्या प्रयास किए गए हैं। वहीं, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को यह जानकारी देनी होगी कि एयरपोर्ट का प्रबंधन, संचालन और विकास अपने अधीन लेने के प्रस्ताव पर अब तक क्या कार्रवाई हुई है। मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को निर्धारित की गई है।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से बताया गया कि बिलासपुर एयरपोर्ट के रनवे के विस्तार के लिए 63 करोड़ रुपये और नए एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) टावर के निर्माण के लिए 41 करोड़ रुपये का प्रस्ताव संबंधित मंत्रालय को भेजा जा चुका है। हालांकि, इन परियोजनाओं को पूरा करने की जिम्मेदारी किस एजेंसी की होगी, इस पर अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि राज्य सरकार और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के बीच जिम्मेदारी तय नहीं होने से विकास कार्यों की गति प्रभावित हो रही है।

एयरपोर्ट की मौजूदा सुविधाओं को लेकर भी सुनवाई में चर्चा हुई। राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि वर्तमान में बिलासपुर एयरपोर्ट एटीआर श्रेणी के विमानों के संचालन के लिए उपयुक्त है। इसके विपरीत, याचिकाकर्ताओं ने रनवे की लंबाई को लेकर चिंता जताई। उनका कहना है कि रनवे छोटा होने के कारण गर्मियों में विमानों को अपनी पूरी यात्री क्षमता के साथ उड़ान भरने में परेशानी होती है।

याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, गर्म मौसम में विमान में 72 यात्रियों की जगह केवल 52 यात्रियों को ले जाने की स्थिति बनती है। इससे यात्रियों की उपलब्ध सीटें घटती हैं और विमानन कंपनियों के लिए उड़ानों का परिचालन कम आकर्षक हो सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि बिलासपुर का रनवे अंबिकापुर और जगदलपुर एयरपोर्ट के रनवे से भी छोटा है। उनके अनुसार, रनवे की लंबाई 1,500 मीटर से कम होने के कारण विमानों की पूरी क्षमता का इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है।

अदालत ने भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण की ओर से दाखिल जवाब को लेकर भी सवाल उठाए। पिछली सुनवाई 29 सितंबर को हुई थी, जब हाईकोर्ट ने प्राधिकरण के वरिष्ठ और सक्षम अधिकारी से शपथ पत्र मांगा था। याचिकाकर्ताओं के वरिष्ठ अधिवक्ता आशीष श्रीवास्तव और अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने अदालत को बताया कि अपेक्षित वरिष्ठ अधिकारी के बजाय कनिष्ठ अधिकारी का शपथ पत्र पेश किया गया। मामले में प्राधिकरण से अपेक्षित स्तर पर जानकारी उपलब्ध कराने की जरूरत पर जोर दिया गया।

अदालत के समक्ष पेश जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार बिलासपुर के अलावा अंबिकापुर और जगदलपुर एयरपोर्ट को भी भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को सौंपने के विकल्प पर विचार कर रही है। हालांकि, प्राधिकरण ने इस प्रस्ताव पर स्पष्ट सहमति देने के बजाय राज्य सरकार से जमीन का विवरण, खसरा-वार जानकारी, स्वामित्व और उपलब्ध सुविधाओं से जुड़े दस्तावेज मांगे हैं। इन जानकारियों के आधार पर ही आगे की प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से अपेक्षा जताई है कि बिलासपुर एयरपोर्ट की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। अब राज्य सरकार और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को अदालत के निर्देशों के अनुसार अपना पक्ष रखना होगा। अगली सुनवाई में यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि रनवे विस्तार, नए एटीसी टावर और एयरपोर्ट के प्रबंधन से जुड़े प्रस्तावों पर आगे क्या कार्रवाई की गई है।

 

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