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एथेनॉल उत्पादन में गन्ने के रस और चीनी सिरप के इस्तेमाल पर रोक

केंद्र सरकार का बड़ा फैसला नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने वर्ष 2026-27 के आपूर्ति वर्ष के लिए एथेनॉल उत्पादन में चीनी के इस्तेमाल पर रोक लगाने का निर्देश दिया है। सरकार के इस फैसले के तहत गन्ने के रस, चीनी सिरप और बी-हैवी शीरे से एथेनॉल बनाने की अनुमति नहीं होगी। इसके बजाय उत्पादक मक्का, […]

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  • October 17, 2026 8:08 am IST, Published 2 hours ago

केंद्र सरकार का बड़ा फैसला

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने वर्ष 2026-27 के आपूर्ति वर्ष के लिए एथेनॉल उत्पादन में चीनी के इस्तेमाल पर रोक लगाने का निर्देश दिया है। सरकार के इस फैसले के तहत गन्ने के रस, चीनी सिरप और बी-हैवी शीरे से एथेनॉल बनाने की अनुमति नहीं होगी। इसके बजाय उत्पादक मक्का, टूटे चावल और भारतीय खाद्य निगम के अतिरिक्त चावल से एथेनॉल तैयार करने के लिए बोली लगा सकेंगे।

सरकार का यह कदम घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों को नियंत्रित रखने के उद्देश्य से उठाया गया है। महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में कम बारिश के कारण गन्ने की पैदावार प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में चीनी की आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

1,100 करोड़ लीटर एथेनॉल की खरीद के लिए आमंत्रित की गईं बोलियां

तेल विपणन कंपनियों इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने नवंबर 2026 से शुरू होने वाले आपूर्ति वर्ष के लिए लगभग 1,100 करोड़ लीटर एथेनॉल की खरीद के वास्ते बोलियां आमंत्रित की हैं।

नई निविदा में गन्ने के रस, चीनी सिरप और बी-हैवी शीरे से तैयार एथेनॉल को शामिल नहीं किया गया है। इससे एथेनॉल उत्पादकों को दूसरे कच्चे माल पर निर्भर रहना होगा।

मक्का, टूटे चावल और भारतीय खाद्य निगम के अतिरिक्त चावल से एथेनॉल उत्पादन को प्राथमिकता मिलने की संभावना है। हालांकि, इस बदलाव का वास्तविक असर उत्पादन लागत, कच्चे माल की उपलब्धता और बाजार की मांग पर निर्भर करेगा।

चीनी की कीमतों पर नियंत्रण की कोशिश

भारत में चीनी उत्पादन का बड़ा हिस्सा गन्ने पर निर्भर है। यदि गन्ने की पैदावार कम होती है, तो चीनी उत्पादन और बाजार में इसकी उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। ऐसी स्थिति में चीनी का इस्तेमाल एथेनॉल बनाने में किए जाने से घरेलू आपूर्ति पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका रहती है।

सरकार के ताजा फैसले का उद्देश्य चीनी को एथेनॉल उत्पादन की जगह खाद्य उपयोग के लिए उपलब्ध रखना है। इससे बाजार में आपूर्ति बढ़ाने और कीमतों में संभावित तेजी को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, चीनी की वास्तविक कीमतों पर मौसम, उत्पादन, भंडार और मांग जैसे कई कारकों का असर पड़ेगा।

ईंधन में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य

भारत पेट्रोल में एथेनॉल मिलाकर कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में काम कर रहा है। एथेनॉल एक जैव ईंधन है, जिसे गन्ने और अनाज जैसे कृषि उत्पादों से तैयार किया जा सकता है।

देश में पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण यानी ई20 को बढ़ावा दिया गया है। इसका उद्देश्य पेट्रोलियम आयात पर खर्च कम करना, घरेलू स्तर पर ईंधन के विकल्प विकसित करना और उत्सर्जन में कमी लाने में मदद करना है।

लेकिन एथेनॉल उत्पादन के लिए कच्चे माल का चुनाव भी महत्वपूर्ण है। यदि खाद्य उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली फसलों का बड़ा हिस्सा ईंधन बनाने में लगाया जाता है, तो खाद्य आपूर्ति और कीमतों पर असर पड़ सकता है। इसी वजह से सरकार के सामने ईंधन की जरूरतों और खाद्य सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती है।

किसानों और एथेनॉल उद्योग पर क्या होगा असर?

इस फैसले का असर चीनी मिलों, एथेनॉल उत्पादकों और कृषि क्षेत्र से जुड़े कारोबार पर पड़ सकता है। गन्ने से एथेनॉल बनाने वाली इकाइयों को वैकल्पिक कच्चे माल की व्यवस्था करनी पड़ सकती है। वहीं, मक्का और चावल से एथेनॉल बनाने वाले उत्पादकों के लिए मांग बढ़ने की संभावना है।

दूसरी ओर, मक्का और चावल की उपलब्धता, उनकी कीमतों और परिवहन लागत का असर एथेनॉल उत्पादन की कुल लागत पर पड़ेगा। किसानों को इसका कितना लाभ मिलेगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि वैकल्पिक कच्चे माल की मांग और खरीद की व्यवस्था किस तरह आगे बढ़ती है।

फिलहाल, केंद्र सरकार का यह फैसला चीनी की घरेलू उपलब्धता बनाए रखने और एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को जारी रखने के बीच संतुलन बनाने की कोशिश है। आने वाले महीनों में चीनी उत्पादन, अनाज की कीमतों और एथेनॉल की खरीद से जुड़े आंकड़ों से इस फैसले के प्रभाव का बेहतर आकलन हो सकेगा।

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