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आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ पर मायावती ने वापसी की चर्चाएं खारिज

बसपा उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी स्थिति मजबूत करने और संगठन को सक्रिय बनाने की कोशिश कर रही है। ऐसे समय में पार्टी अध्यक्षका यह संदेश कार्यकर्ताओं के बीच अनुशासन बनाए रखने और नेतृत्व के फैसलों को लेकर…

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  • October 18, 2026 12:46 pm IST, Published 2 hours ago

लखनऊ:  बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने अशोक सिद्धार्थ की पार्टी में वापसी को लेकर चल रही चर्चाओं पर स्पष्टरुख अपनाया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट के जरिए कहा है कि अशोक सिद्धार्थ को किसी भी परिस्थिति में पार्टी में दोबारा शामिल नहींकिया जाएगा। मायावती ने इस संबंध में फैल रही खबरों और चर्चाओं को अफवाह बताते हुए पार्टी के कार्यकर्ताओं तथा समर्थकों से उन परध्यान नहीं देने की अपील की है।

मायावती के इस बयान को बसपा की आंतरिक राजनीति और आकाश आनंद की पार्टी में दोबारा सक्रियता के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहाहै। आकाश आनंद, मायावती के भतीजे हैं, जबकि अशोक सिद्धार्थ उनके ससुर हैं। अशोक सिद्धार्थ पहले बसपा में महत्वपूर्ण संगठनात्मकजिम्मेदारियां संभाल चुके हैं और राज्यसभा के सदस्य भी रह चुके हैं। पार्टी में उनकी भूमिका तथा आकाश आनंद के राजनीतिक भविष्य को लेकरपिछले कुछ समय से लगातार चर्चाएं होती रही हैं।

मायावती ने अपने संदेश में पार्टी के भीतर अनुशासन, संगठन के प्रति निष्ठा और बहुजन आंदोलन के हितों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।उनका कहना है कि कुछ लोग अलग-अलग तरीकों से भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में पार्टी के नेताओं, पदाधिकारियों औरकार्यकर्ताओं को सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने साफ किया कि अशोक सिद्धार्थ की वापसी की संभावना को लेकर चल रही बातों में कोईसच्चाई नहीं है और इस मुद्दे पर किसी तरह का भ्रम नहीं रहना चाहिए।

इस पूरे घटनाक्रम में आकाश आनंद की भूमिका भी चर्चा के केंद्र में है। हाल ही में मायावती ने उन्हें फिर से बसपा में सक्रिय जिम्मेदारी सौंपी औरराष्ट्रीय संयोजक के पद पर नियुक्त किया। इसके बाद पार्टी की आगामी गतिविधियों और चुनावी तैयारियों में उनकी भूमिका को लेकरराजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गईं। मायावती ने कार्यकर्ताओं से आकाश आनंद को सौंपी गई जिम्मेदारियों को सफल बनाने के लिए पूरीमेहनत से काम करने की अपील भी की है।

अशोक सिद्धार्थ को लेकर मायावती का कड़ा रुख इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे पहले पार्टी नेतृत्व और उनके बीच मतभेद सार्वजनिकरूप से सामने आ चुके हैं। अगस्त 2026 में बसपा ने अनुशासनहीनता और पार्टी के निर्देशों का उल्लंघन करने के आरोपों के बीच अशोक सिद्धार्थको निष्कासित करने का फैसला किया था। इसके बाद सितंबर में आकाश आनंद की राजनीतिक भूमिका को लेकर भी कई अहम घटनाक्रमसामने आए। इन घटनाओं ने बसपा के संगठनात्मक फैसलों और नेतृत्व की रणनीति को राजनीतिक चर्चा का विषय बना दिया।

मायावती के ताजा संदेश से यह संकेत मिलता है कि पार्टी नेतृत्व अशोक सिद्धार्थ की वापसी के सवाल पर किसी तरह की गुंजाइश नहीं छोड़नाचाहता। साथ ही, आकाश आनंद को मिली जिम्मेदारी के बाद संगठन के भीतर उनकी भूमिका को स्पष्ट करने की कोशिश भी दिखाई देती है।हालांकि, पार्टी के भविष्य और आगामी चुनावों में इन फैसलों का क्या असर पड़ेगा, यह आने वाले समय में ही स्पष्ट होगा।

बसपा उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी स्थिति मजबूत करने और संगठन को सक्रिय बनाने की कोशिश कर रही है। ऐसे समय में पार्टी अध्यक्षका यह संदेश कार्यकर्ताओं के बीच अनुशासन बनाए रखने और नेतृत्व के फैसलों को लेकर स्पष्टता कायम करने के लिहाज से अहम है।मायावती ने अपने रुख के जरिए यह साफ कर दिया है कि आकाश आनंद की वापसी को अशोक सिद्धार्थ की संभावित वापसी से जोड़कर नहींदेखा जाना चाहिए। पार्टी के कार्यकर्ताओं से उनकी अपील है कि वे अफवाहों से दूर रहें और संगठन के निर्धारित कार्यक्रमों पर ध्यान केंद्रित करें।

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