2027 चुनाव से पहले मायावती ने सर्वे को बताया भ्रामक और षड्यंत्र

सपा प्रमुख ने आगामी चुनावों के लिए मजबूत उम्मीदवारों के चयन और जमीनी स्तर पर संगठन को सक्रिय करने की जरूरत पर भी जोर दिया। उनके बयान से स्पष्ट है कि पार्टी चुनाव से पहले अपने समर्थकों का मनोबल बनाए रखने और राजनीतिक आधार मजबूत करने की कोशिश कर रही है। उत्तर प्रदेश में बसपा के सामने भाजपा और सपा जैसी प्रमुख पार्टियों के बीच अपनी स्थिति मजबूत करने की चुनौती होगी। वहीं,...

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  • October 17, 2026 6:35 pm IST, Published 3 minutes ago

उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। विभिन्न सर्वे और चुनावी आकलनों को लेकर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती ने नाराजगी जताई है। उन्होंने इन सर्वेक्षणों को भ्रामक और जनता का ध्यान भटकाने वाला बताते हुए आरोप लगाया कि बसपा को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। मायावती ने पार्टी के कार्यकर्ताओं और समर्थकों से ऐसे दावों से सावधान रहने तथा आगामी चुनावों की तैयारियों में पूरी ताकत से जुटे रहने की अपील की है।

मायावती ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि तीनों राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर बसपा उम्मीदवारों के चयन और जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने का काम कर रही है। इसी बीच कुछ मीडिया संस्थानों और सोशल मीडिया मंचों पर चुनावी सर्वे के नाम पर ऐसे दावे किए जा रहे हैं, जो उनके अनुसार वास्तविक राजनीतिक स्थिति को सही तरीके से प्रस्तुत नहीं करते। उन्होंने आरोप लगाया कि इन सर्वेक्षणों के माध्यम से मतदाताओं को भ्रमित करने और बसपा की राजनीतिक संभावनाओं को कमजोर दिखाने की कोशिश की जा रही है।

बसपा प्रमुख ने मीडिया के एक वर्ग पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव से पहले पार्टी को कमजोर दिखाने की कोशिशें नई नहीं हैं। उन्होंने वर्ष 2007 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का उदाहरण दिया, जब कई राजनीतिक आकलनों के बावजूद बसपा ने पूर्ण बहुमत हासिल कर सरकार बनाई थी। मायावती का कहना है कि उस समय भी पार्टी को लेकर कई तरह के अनुमान लगाए जा रहे थे, लेकिन चुनाव परिणामों ने उन आकलनों को गलत साबित कर दिया। उन्होंने इसी उदाहरण के जरिए समर्थकों को भरोसा बनाए रखने और चुनावी तैयारियों में सक्रिय रहने का संदेश दिया।

वर्ष 2007 में उत्तर प्रदेश में बसपा की जीत पार्टी के राजनीतिक इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना रही थी। उस चुनाव में पार्टी ने पूर्ण बहुमत प्राप्त किया और मायावती मुख्यमंत्री बनी थीं। उनकी सरकार ने सामाजिक न्याय, कानून-व्यवस्था और सर्वजन हिताय-सर्वजन सुखाय के नारे को प्रमुखता दी थी। अब 2027 के चुनावों से पहले मायावती एक बार फिर उसी राजनीतिक अनुभव का उल्लेख कर रही हैं। उनका संदेश है कि चुनावी सर्वेक्षणों को अंतिम परिणाम मानने के बजाय संगठन की मजबूती और जनता के बीच काम करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

मायावती ने उत्तर प्रदेश की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इन दलों के शासन से असंतुष्ट लोगों को बसपा के साथ आने पर विचार करना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से बहुजन समाज के लोगों से अपील की कि वे विरोधी दलों और अन्य राजनीतिक तत्वों की ओर से किए जाने वाले कथित दुष्प्रचार से सतर्क रहें। उनके मुताबिक, पार्टी का लक्ष्य उत्तर प्रदेश में फिर से सरकार बनाना है और इसके लिए कार्यकर्ताओं को लगातार मेहनत करनी होगी।

बसपा प्रमुख ने आगामी चुनावों के लिए मजबूत उम्मीदवारों के चयन और जमीनी स्तर पर संगठन को सक्रिय करने की जरूरत पर भी जोर दिया। उनके बयान से स्पष्ट है कि पार्टी चुनाव से पहले अपने समर्थकों का मनोबल बनाए रखने और राजनीतिक आधार मजबूत करने की कोशिश कर रही है। उत्तर प्रदेश में बसपा के सामने भाजपा और सपा जैसी प्रमुख पार्टियों के बीच अपनी स्थिति मजबूत करने की चुनौती होगी। वहीं, उत्तराखंड और पंजाब में भी पार्टी को अपने संगठन और चुनावी रणनीति के आधार पर मतदाताओं का समर्थन हासिल करना होगा।

चुनाव से पहले सामने आने वाले सर्वे राजनीतिक माहौल का आकलन प्रस्तुत करते हैं, लेकिन उन्हें अंतिम नतीजा नहीं माना जा सकता। वास्तविक परिणाम मतदान, उम्मीदवारों, स्थानीय मुद्दों, गठबंधन और मतदाताओं के फैसले पर निर्भर करते हैं। ऐसे में मायावती का बयान आगामी चुनावों से पहले बसपा की रणनीति और राजनीतिक संदेश के लिहाज से महत्वपूर्ण है। अब यह देखना होगा कि पार्टी अपनी संगठनात्मक तैयारियों को कितना मजबूत कर पाती है और 2027 के विधानसभा चुनावों में मतदाताओं के बीच कितना समर्थन हासिल करती है।

 

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