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नोबेल पुरस्कार को लेकर थरूर का सवाल, सरकार की चुप्पी पर उठाए सवाल

जब दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद की व्यवस्था के कारण गैर-श्वेत समुदायों को गंभीर भेदभाव का सामना करना पड़ता था। इन परिस्थितियों के बावजूद पिल्लई ने कानून के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई और मानवाधिकारों तथा अंतरराष्ट्रीय न्याय से जुड़े महत्वपूर्ण दायित्व निभाए...

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Gauravshali Bharat News
  • October 19, 2026 1:09 pm IST, Published 2 hours ago

भारतीय मूल की न्यायविद नवानेथम पिल्लई को वर्ष 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार मिलने के बाद भारत में राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया है कि इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मान के बावजूद भारत सरकार की ओर से उन्हें बधाई संदेश क्यों नहीं दिया गया। इस मुद्दे पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के महासचिव डी राजा ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पिल्लई की उपलब्धि का सम्मान करने और उन्हें बधाई देने का आग्रह किया है।

शशि थरूर ने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए नवानेथम पिल्लई का एक वीडियो साझा किया। इस वीडियो में उनके जीवन, संघर्ष और मानवाधिकारों के क्षेत्र में किए गए कार्यों को दर्शाया गया है। थरूर ने अपनी पोस्ट में कहा कि पिल्लई को नोबेल शांति पुरस्कार मिले छह दिन बीत चुके हैं, लेकिन भारत सरकार की ओर से उन्हें बधाई तक नहीं दी गई। उन्होंने इस स्थिति पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए संबंधित फैसले को निंदनीय बताया।

थरूर का कहना है कि भारतीय मूल की ऐसी प्रतिष्ठित शख्सियत की उपलब्धि पर देश को गर्व होना चाहिए। उनके मुताबिक, मानवाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय न्याय के लिए जीवनभर काम करने वाली पिल्लई का सम्मान केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि भारतीय मूल के लोगों के लिए भी गौरव का विषय है। सरकार की ओर से आधिकारिक संदेश नहीं आने को लेकर उन्होंने अपनी नाराजगी स्पष्ट रूप से जाहिर की। इस मामले में डी राजा ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की कि नवानेथम पिल्लई को बधाई दी जाए और उनकी उपलब्धि का सम्मान किया जाए। एक मीडिया चैनल से बातचीत के दौरान राजा ने कहा कि इस तरह की अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि का जश्न पूरे देश को मनाना चाहिए। उनके बयान के बाद यह मुद्दा राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बन गया है।

हालांकि, इस विषय पर बहस के बीच यह ध्यान रखना जरूरी है कि किसी आधिकारिक बधाई संदेश की अनुपस्थिति को लेकर उठे सवाल और पुरस्कार से संबंधित तथ्य अलग-अलग विषय हैं। पुरस्कार की घोषणा, उसकी श्रेणी और सम्मानित व्यक्ति के योगदान की पुष्टि विश्वसनीय आधिकारिक स्रोतों से की जानी चाहिए। शशि थरूर इससे पहले भी नवानेथम पिल्लई को बधाई देते हुए उनके योगदान की सराहना कर चुके हैं। उन्होंने अपनी पोस्ट में मानवाधिकारों की रक्षा, अंतरराष्ट्रीय न्याय को मजबूत करने और दुनिया भर में कानून के शासन को बढ़ावा देने के लिए पिल्लई के लंबे संघर्ष को प्रेरणादायक बताया था। थरूर ने यह भी उल्लेख किया था कि संयुक्त राष्ट्र में सेवा दे चुके लोगों के लिए उनकी उपलब्धि विशेष महत्व रखती है।

नवानेथम पिल्लई का जीवन संघर्ष और दृढ़ संकल्प की कहानी के रूप में देखा जाता है। उनका जन्म 23 सितंबर 1941 को दक्षिण अफ्रीका के डरबन में हुआ था। वह तमिल भारतीय मूल के परिवार से आती हैं। उनके पिता बस चालक थे और उनका बचपन ऐसे दौर में बीता, जब दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद की व्यवस्था के कारण गैर-श्वेत समुदायों को गंभीर भेदभाव का सामना करना पड़ता था। इन परिस्थितियों के बावजूद पिल्लई ने कानून के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई और मानवाधिकारों तथा अंतरराष्ट्रीय न्याय से जुड़े महत्वपूर्ण दायित्व निभाए। संयुक्त राष्ट्र में मानवाधिकारों के लिए उच्चायुक्त के रूप में उनकी भूमिका भी उनके सार्वजनिक जीवन का अहम हिस्सा रही है।

फिलहाल, इस प्रकरण ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय मूल की हस्तियों की उपलब्धियों को सम्मान देने और सरकारों की आधिकारिक प्रतिक्रियाओं को लेकर बहस छेड़ दी है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर और डी राजा की मांग के बाद अब इस बात पर चर्चा हो रही है कि ऐसी उपलब्धियों को राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर देखा जाना चाहिए।

 

 

 

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