खरगे का ज्ञानेश कुमार को हटाने और बैलेट पेपर की मांग

2023 में संसद द्वारा पारित मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति, सेवा शर्तों और कार्यकाल से संबंधित कानून भी इस विवाद के केंद्र में है। इस कानून के तहत चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया निर्धारित की गई है। कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दलों ने इसके प्रावधानों पर आपत्ति जताई है। उनका तर्क है कि नियुक्ति व्यवस्था में कार्यपालिका की भूमिका को लेकर निष्पक्षता संबंधी चिंताएं पैदा होती हैं।

Advertisement
Gauravshali Bharat
Gauravshali Bharat News
  • October 21, 2026 2:10 pm IST, Published 2 hours ago

कलबुर्गी: कर्नाटक के कलबुर्गी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और चुनाव आयुक्तों को कानूनी संरक्षण देने वाले कानून को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा 2023 में लाए गए कानून से चुनाव आयुक्तों की जवाबदेही प्रभावित होती है। खरगे ने इस कानून को वापस लेने, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के स्थान पर बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की लड़ाई किसी एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि चुनावी व्यवस्था में निष्पक्षता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए है।

खरगे ने अपने बयान में कहा कि 2023 में भाजपा सरकार द्वारा लाए गए कानून को समाप्त किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, इस कानून के तहत चुनाव आयुक्तों को मिलने वाला संरक्षण उनकी जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी गलतियों के लिए जिम्मेदारी तय करने के बजाय अधिकारियों को कानूनी सुरक्षा दी जा रही है। हालांकि, ये खरगे के राजनीतिक आरोप हैं और इनकी पुष्टि के लिए संबंधित मामलों तथा कानूनी प्रावधानों को अलग-अलग देखना जरूरी है।

कांग्रेस अध्यक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का नाम लेते हुए भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और भरोसेमंद बनाना है, तो संवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप काम होना चाहिए। खरगे ने ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग करते हुए कहा कि केवल किसी एक अधिकारी को बदलना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि पूरी चुनावी व्यवस्था में सुधार की जरूरत है। उनके अनुसार, लोकतंत्र में चुनाव आयोग की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है, इसलिए उसकी निष्पक्षता पर जनता का विश्वास कायम रहना चाहिए।

खरगे ने EVM के इस्तेमाल पर भी आपत्ति जताई और बैलेट पेपर के जरिए मतदान कराने की मांग दोहराई। उनका कहना था कि लोकतंत्र को मजबूत रखने के लिए चुनाव प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिस पर मतदाताओं को पूरा भरोसा हो। कांग्रेस लंबे समय से चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और EVM से जुड़े सवालों को उठाती रही है। वहीं, EVM की विश्वसनीयता और चुनाव प्रक्रिया की सुरक्षा को लेकर होने वाली बहस में चुनाव आयोग की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण तथा उपलब्ध तकनीकी और कानूनी तथ्यों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने बयान में कहा कि उनकी पार्टी का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली प्रभावित हुई है और कांग्रेस इन्हें दुरुस्त करने के लिए संघर्ष कर रही है। खरगे के मुताबिक, चुनावी संस्थाओं की स्वतंत्रता और निष्पक्षता लोकतंत्र की बुनियादी जरूरतें हैं। यदि लोगों को चुनाव व्यवस्था पर भरोसा नहीं रहेगा, तो लोकतांत्रिक प्रक्रिया को लेकर सवाल बढ़ सकते हैं।

2023 में संसद द्वारा पारित मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति, सेवा शर्तों और कार्यकाल से संबंधित कानून भी इस विवाद के केंद्र में है। इस कानून के तहत चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया निर्धारित की गई है। कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दलों ने इसके प्रावधानों पर आपत्ति जताई है। उनका तर्क है कि नियुक्ति व्यवस्था में कार्यपालिका की भूमिका को लेकर निष्पक्षता संबंधी चिंताएं पैदा होती हैं। दूसरी ओर, कानून के समर्थक इसे निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति और सेवा शर्तों को स्पष्ट करने वाला कानूनी ढांचा बताते हैं।

खरगे के बयान से एक बार फिर चुनाव आयोग की स्वतंत्रता, चुनाव आयुक्तों की जवाबदेही और मतदान प्रणाली को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने के संकेत हैं। कांग्रेस इन मुद्दों पर बदलाव की मांग कर रही है, जबकि इन मांगों पर आगे की चर्चा राजनीतिक सहमति, संवैधानिक प्रावधानों और कानूनी प्रक्रिया के दायरे में होगी। फिलहाल, खरगे ने स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी चुनावी व्यवस्था में सुधार और लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का विश्वास बनाए रखने के मुद्दे पर अपना विरोध जारी रखेगी।

 

Advertisement