मदन मित्रा के संन्यास के संकेत,अनैतिक राजनीति पर जताई नाराजगी

पार्टी के भीतर अपनी स्थिति और मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों पर प्रतिक्रिया देते हुए मदन मित्रा ने कहा कि मुश्किल समय में ईश्वर के अलावा कोई किसी को वास्तविक आश्रय नहीं दे सकता। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब उनके राजनीतिक रुख और भविष्य की भूमिका को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि,...

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  • October 23, 2026 12:30 pm IST, Published 1 hour ago

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में अपने बेबाक बयानों और अलग अंदाज के लिए पहचाने जाने वाले तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के विधायक मदन मित्रा ने राजनीति से दूरी बनाने के संकेत देकर सियासी हलकों में चर्चा तेज कर दी है। कामारहाटी से विधायक मदन मित्रा ने विजयादशमी के मौके पर मौजूदा राजनीतिक माहौल पर निराशा जाहिर की। उन्होंने कहा कि राजनीति में अनैतिक गतिविधियां बढ़ने से उनका भरोसा कमजोर हुआ है और अब उन्हें इस व्यवस्था से वितृष्णा होने लगी है। हालांकि, उन्होंने राजनीति छोड़ने का कोई औपचारिक ऐलान नहीं किया, लेकिन उनके बयान से साफ है कि वह मौजूदा परिस्थितियों से बेहद परेशान हैं।

मदन मित्रा ने अपनी भावनाएं जाहिर करते हुए कहा कि राजनीति का हिस्सा होने के कारण उन्हें कभी-कभी खुद से भी नफरत महसूस होने लगती है। उनके मुताबिक, जिस राजनीति को जनता की सेवा का माध्यम होना चाहिए, वहां अनैतिक आचरण बढ़ने से परिस्थितियां निराशाजनक होती जा रही हैं। उन्होंने मौजूदा राजनीतिक हालात की तुलना चावल में कंकड़ की अधिकता से करते हुए कहा कि जब गलत काम करने वालों की संख्या बढ़ जाती है, तो सही और गलत के बीच अंतर करना मुश्किल हो जाता है।

विजयादशमी के अवसर पर अपने समर्थकों और मतदाताओं से मुलाकात नहीं कर पाने का दर्द भी विधायक ने साझा किया। उन्होंने कहा कि इस बार वह उन लोगों से नहीं मिल सके, जिन्होंने उन्हें चुनाव में जीत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसके पीछे उन्होंने हिंसा और सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं का हवाला दिया। मदन मित्रा के अनुसार, उन पर जानलेवा हमला करने की कोशिश भी हुई थी। उन्होंने दावा किया कि इस मामले की जानकारी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को दी गई थी और मुख्यमंत्री ने पुलिस को आवश्यक निर्देश भी दिए थे। मदन मित्रा के इन बयानों को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर चर्चाएं चल रही हैं। पार्टी के अंदर बदलते समीकरणों के बीच उनके रुख को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

बताया जा रहा है कि मदन मित्रा पहले ममता बनर्जी के साथ नजर आए थे, लेकिन बाद में वह ऋतब्रत बनर्जी के गुट के करीब दिखाई दिए। हालांकि, इस बदलाव को लेकर पूछे गए सवालों पर उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। पार्टी के भीतर अपनी स्थिति और मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों पर प्रतिक्रिया देते हुए मदन मित्रा ने कहा कि मुश्किल समय में ईश्वर के अलावा कोई किसी को वास्तविक आश्रय नहीं दे सकता। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब उनके राजनीतिक रुख और भविष्य की भूमिका को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि, उन्होंने किसी गुट के साथ अपने संबंधों या पार्टी में आगे की रणनीति को लेकर कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की।

विजयादशमी के मौके पर मदन मित्रा ने पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी, दोनों को शुभकामनाएं दीं। साथ ही उन्होंने राजनीतिक नेताओं को अहंकार से दूर रहने और जनता को प्राथमिकता देने की नसीहत भी दी। उन्होंने कहा कि सत्ता और राजनीतिक प्रभाव के बीच नेताओं को यह नहीं भूलना चाहिए कि जनता ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है।

मदन मित्रा का बयान उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर नई चर्चा शुरू करता है। राजनीति से थकान, अनैतिक गतिविधियों के प्रति नाराजगी और सुरक्षा संबंधी चिंताओं का जिक्र करते हुए उन्होंने अपनी मनोदशा सामने रखी है। हालांकि, राजनीति से संन्यास लेने का अंतिम फैसला उन्होंने अभी नहीं किया है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले दिनों में वह अपने राजनीतिक सफर को जारी रखते हैं या सक्रिय राजनीति से दूरी बनाने की दिशा में कोई कदम उठाते हैं।

 

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