CJP विवाद पर अन्नामलाई का भाजपा को जवाब, देशभक्ति पर उपदेश की जरूरत नहीं

उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों पर भी टिप्पणी की। अन्नामलाई के मुताबिक, यदि देश की संप्रभुता को किसी तरह का खतरा है, तो खुफिया ब्यूरो (आईबी) और रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) जैसी एजेंसियां मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में संबंधित एजेंसियों को जांच करनी चाहिए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने सोशल मीडिया पर अपुष्ट या मनगढ़ंत जानकारियां फैलाने से बचने की जरूरत बताई।

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  • October 23, 2026 1:35 pm IST, Published 2 hours ago

नई दिल्ली: तमिलनाडु भाजपा के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध-प्रदर्शनों को लेकर अपने रुख पर सफाई देते हुए कहा है कि उनके बयान को इस संगठन के समर्थन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीजेपी और भाजपा की राजनीतिक विचारधारा तथा एजेंडा अलग-अलग हैं। हालांकि, उन्होंने लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन करने और अपनी बात रखने के अधिकार का समर्थन किया। अन्नामलाई ने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल को कानून के दायरे में रहकर संघर्ष करने का अधिकार है और यदि किसी ने नियमों का उल्लंघन किया है, तो उसके खिलाफ उचित कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई होनी चाहिए।

अन्नामलाई ने गुरुवार को ‘वी द लीडर्स’ आंदोलन के एक कार्यक्रम में विभिन्न राजनीतिक मुद्दों पर अपनी बात रखी। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की और उनके नेतृत्व में किए जा रहे कार्यों को सकारात्मक बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का समर्थन करने का मतलब यह नहीं है कि सरकार के हर फैसले को बिना सवाल किए स्वीकार कर लिया जाए। उनके मुताबिक, लोकतंत्र में सरकार के कामकाज पर सवाल उठाना और गलत लगने वाले फैसलों की आलोचना करना भी जरूरी है। सीजेपी के प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दिल्ली में 10 अक्टूबर को हुई पुलिस कार्रवाई पर अन्नामलाई की टिप्पणी के बाद भाजपा के भीतर भी उनके बयान को लेकर सवाल उठे थे।

इसके जवाब में उन्होंने कहा कि उनकी बातों को संगठन के समर्थन से जोड़ना सही नहीं है। उन्होंने दोहराया कि सीजेपी का अपना एजेंडा है, जबकि भाजपा की राजनीतिक दिशा अलग है। इसके बावजूद किसी संगठन के विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई की निष्पक्षता और कानूनी प्रक्रिया पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक अधिकारों का हिस्सा है। अन्नामलाई ने देशभक्ति के मुद्दे पर भी अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उन्हें भारत की एकता, अखंडता और संप्रभुता की समझ है और इस विषय पर किसी से प्रमाणपत्र लेने की जरूरत नहीं है। उन्होंने अपने विभिन्न राज्यों में रहने और काम करने के अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की विविधता और उसकी एकता के महत्व को वह समझते हैं। उनके अनुसार, किसी भी मामले में कार्रवाई करते समय भावनाओं या बदले की भावना के बजाय कानून को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

सीजेपी के प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई का जिक्र करते हुए अन्नामलाई ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति ने गैरकानूनी काम किया है, तो संबंधित अधिकारियों को उसके खिलाफ कानून के अनुसार कदम उठाने चाहिए। उन्होंने गिरफ्तारी और जांच की प्रक्रिया में कानूनी प्रावधानों तथा उचित प्रक्रिया का पालन करने पर जोर दिया। उनका कहना था कि किसी भी कार्रवाई का आधार ठोस तथ्य और कानून होना चाहिए, न कि राजनीतिक विरोध या व्यक्तिगत नाराजगी। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों पर भी टिप्पणी की। अन्नामलाई के मुताबिक, यदि देश की संप्रभुता को किसी तरह का खतरा है, तो खुफिया ब्यूरो (आईबी) और रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) जैसी एजेंसियां मौजूद हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में संबंधित एजेंसियों को जांच करनी चाहिए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने सोशल मीडिया पर अपुष्ट या मनगढ़ंत जानकारियां फैलाने से बचने की जरूरत बताई। अन्नामलाई ने चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट जैसी संवैधानिक संस्थाओं पर जनता के विश्वास को बनाए रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में इन संस्थाओं की विश्वसनीयता महत्वपूर्ण है और इनके प्रति भरोसा कमजोर करने वाली गतिविधियों को गंभीरता से देखा जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा करते हुए अन्नामलाई ने कहा कि वह उन्हें अच्छा प्रधानमंत्री मानते हैं और उनके कामकाज का समर्थन करते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि समर्थन का अर्थ असहमति छोड़ देना नहीं है। यदि उन्हें सरकार का कोई फैसला गलत लगता है, तो वह उस पर सवाल उठाने से पीछे नहीं हटेंगे। उनके इस बयान से भाजपा के प्रति समर्थन और लोकतांत्रिक असहमति के अधिकार को लेकर उनकी स्थिति सामने आई है।

 

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