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सुशासन और डिजिटल प्रशासन को मिलेगी गति, लखनऊ में 12 राज्यों की कार्यशाला शुरू

कार्यक्रम के दौरान सरकारी कर्मचारियों के प्रशिक्षण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को सम्मानित किया गया। मिशन कर्मयोगी के तहत विभिन्न श्रेणियों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले उत्तर प्रदेश के विभागों को भी सम्मान दिया गया। इस पहल का उद्देश्य प्रशिक्षण और क्षमता विकास के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने वाली इकाइयों को प्रोत्साहित करना है।

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  • October 23, 2026 5:23 pm IST, Published 1 hour ago

लखनऊ: केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक केंद्रित बनाने पर जोर दिया। लखनऊ में मिशन कर्मयोगी के तहत आयोजित उत्तरी क्षेत्रीय कार्यशाला ‘साधना शृंखला’ के उद्घाटन अवसर पर दोनों नेताओं ने कहा कि सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाना सुशासन तथा विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए जरूरी है। इस कार्यक्रम में 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशिक्षण संस्थानों के रूपांतरण पर चर्चा की गई। साथ ही, प्रशासनिक प्रशिक्षण को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप बनाने से जुड़े प्रयासों को आगे बढ़ाने पर बल दिया गया।

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2014 से प्रशासनिक सुधारों को प्राथमिकता दी जा रही है। इसका उद्देश्य ऐसी सरकारी व्यवस्था तैयार करना है, जिसमें नागरिकों का भरोसा मजबूत हो और सेवाएं सरलता, पारदर्शिता तथा जवाबदेही के साथ उपलब्ध कराई जा सकें। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश ने मिशन कर्मयोगी के क्रियान्वयन और सरकारी अधिकारियों की क्षमता बढ़ाने के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। प्रदेश का प्रशिक्षण के मामले में अग्रणी स्थान हासिल करना और आई-गॉट कर्मयोगी मंच पर बड़ी संख्या में प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरे करना महत्वपूर्ण उपलब्धियां हैं।

कार्यशाला का आयोजन डॉ. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी तथा भारत सरकार के क्षमता विकास आयोग के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। इसमें सरकारी प्रशिक्षण संस्थानों की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने, अधिकारियों को नई तकनीकों से परिचित कराने और प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के उपायों पर विचार किया गया। कार्यक्रम में यूएनएनएटीआई कैपेबिलिटी इंडेक्स और नेशनल करिकुलम डिजाइन फ्रेमवर्क का भी शुभारंभ किया गया। इन पहलों का उद्देश्य प्रशिक्षण की गुणवत्ता और सरकारी कर्मचारियों की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने के प्रयासों को व्यवस्थित दिशा देना है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए प्रभावी नीतियां बनाने के साथ उनका सही तरीके से क्रियान्वयन भी आवश्यक है। इसके लिए सक्षम, संवेदनशील और परिणामों पर केंद्रित प्रशासनिक व्यवस्था विकसित करनी होगी। उन्होंने लोक सेवा की कार्यसंस्कृति में बदलाव को राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा बनाने की जरूरत बताई। मुख्यमंत्री के अनुसार, सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को बदलते समय की चुनौतियों के अनुरूप तैयार करना होगा, ताकि नागरिकों को योजनाओं और सेवाओं का लाभ समय पर मिल सके।

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योगी आदित्यनाथ ने राज्य में बुनियादी ढांचे और जनकल्याणकारी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में सड़क, रेल और हवाई संपर्क के विस्तार पर काम किया गया है। उन्होंने दावा किया कि पिछले साढ़े नौ वर्षों में 65 लाख गरीब परिवारों को आवास उपलब्ध कराने, तीन करोड़ से अधिक परिवारों को शौचालय देने और 15 करोड़ से ज्यादा लोगों तक प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना का लाभ पहुंचाने के प्रयास किए गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक ईमानदारी से पहुंचाना प्रशासन की प्रमुख जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल तकनीक को प्रशासनिक व्यवस्था में हो रहे बदलावों का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि इन तकनीकों के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए लोक सेवकों को प्रशिक्षित करना आवश्यक है। अधिकारियों को नई तकनीकों की समझ देने से सरकारी कामकाज की गति, निर्णय लेने की क्षमता और सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है। इसके लिए प्रशिक्षण संस्थानों को भी अपनी पाठ्यक्रम व्यवस्था और शिक्षण पद्धतियों में आवश्यक बदलाव करने होंगे।

कार्यक्रम के दौरान सरकारी कर्मचारियों के प्रशिक्षण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को सम्मानित किया गया। मिशन कर्मयोगी के तहत विभिन्न श्रेणियों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले उत्तर प्रदेश के विभागों को भी सम्मान दिया गया। इस पहल का उद्देश्य प्रशिक्षण और क्षमता विकास के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने वाली इकाइयों को प्रोत्साहित करना है।

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मिशन कर्मयोगी केंद्र सरकार की ऐसी पहल है, जिसका लक्ष्य सरकारी कर्मचारियों को नियम आधारित कार्यप्रणाली से आगे बढ़ाकर भूमिका और दक्षता आधारित व्यवस्था की ओर ले जाना है। इसके तहत प्रशिक्षण, तकनीकी ज्ञान, व्यवहार कौशल और नागरिकों के प्रति संवेदनशीलता पर जोर दिया जाता है। लखनऊ में आयोजित कार्यशाला के माध्यम से प्रशिक्षण संस्थानों को मजबूत बनाने और प्रशासनिक क्षमता बढ़ाने के प्रयासों को नई गति देने पर बल दिया गया। कार्यक्रम में व्यक्त विचारों के अनुसार, बेहतर प्रशिक्षण और जवाबदेह कार्यसंस्कृति ही सरकारी योजनाओं को प्रभावी ढंग से जनता तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

 

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