नाटी इमली में राम-भरत मिलन के साक्षी बने लाखों श्रद्धालु

नाटी इमली से लेकर जैतपुरा, लोहटिया और मैदागिन तक श्रद्धालुओं की मौजूदगी दिखाई दी। आयोजकों के अनुसार, इस बार करीब पांच लाख लोगों के जुटने का अनुमान रहा। लगभग 500 मीटर के आयोजन क्षेत्र में भारी भीड़ के कारण कई स्थानों पर चलने तक की जगह कम पड़ गई। ऐसे बड़े धार्मिक आयोजन में भीड़ का प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुरक्षा महत्वपूर्ण रहती है। लोगों की सुविधा के लिए प्रशासनिक...

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  • October 22, 2026 6:00 pm IST, Published 41 minutes ago

वाराणसी: धर्म और आस्था की नगरी काशी में विश्वप्रसिद्ध भरत मिलाप का आयोजन श्रद्धा और उल्लास के साथ हुआ। गुरुवार को नाटी इमली के ऐतिहासिक मैदान में भगवान श्रीराम और उनके तीनों भाइयों के मिलन का दृश्य देखने के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। चारों भाइयों के महामिलन की प्रतीक्षा में हजारों लोग घंटों पहले से आयोजन स्थल पर जुटने लगे थे। मैदान से लेकर आसपास की गलियों और छतों तक लोगों की भीड़ दिखाई दी। हर-हर महादेव और सियावर रामचंद्र की जय के जयकारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा।

चित्रकूट रामलीला समिति की ओर से आयोजित इस पारंपरिक उत्सव में श्रद्धालुओं की आस्था देखते ही बनी। नाटी इमली के मुख्य आयोजन स्थल पर जगह कम पड़ने के कारण कई लोग आसपास की इमारतों और छतों से लीला का दृश्य देखने के लिए खड़े रहे। गलियों में भी लोगों की आवाजाही बनी रही। हर किसी की कोशिश थी कि वह भगवान श्रीराम और भरत के मिलन के ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बन सके। आयोजन स्थल पर रामचरितमानस के पाठ और धार्मिक जयकारों के बीच वातावरण पूरी तरह भक्तिमय नजर आया।

काशी का भरत मिलाप करीब 483 वर्ष पुरानी परंपरा माना जाता है। मान्यता है कि संत मेघा भगत ने इस आयोजन की शुरुआत की थी। तब से यह परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती रही है। समय के साथ शहर का विस्तार हुआ और श्रद्धालुओं की संख्या भी बढ़ी, लेकिन इस धार्मिक आयोजन के प्रति लोगों की आस्था आज भी बरकरार है। भरत मिलाप काशी की सांस्कृतिक पहचान और धार्मिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस आयोजन का सबसे भावुक क्षण वह होता है, जब वनवास पूरा कर लौटे भगवान श्रीराम अपने भाई भरत से मिलते हैं। निर्धारित मुहूर्त पर पुष्पक विमान के प्रतीकात्मक रथ से उतरकर श्रीराम ने भरत को गले लगाया। इस दृश्य को देखने के लिए मौजूद श्रद्धालुओं की निगाहें भाइयों के मिलन पर टिकी रहीं। कुछ ही मिनटों में संपन्न होने वाली इस लीला का इंतजार लोग लंबे समय तक करते हैं। मिलन का दृश्य सामने आते ही जयकारों से पूरा मैदान गूंज उठा और श्रद्धालुओं ने हाथ जोड़कर भगवान के दर्शन किए।

भरत मिलाप की विशेषता इसकी संक्षिप्त अवधि और उससे जुड़ी गहरी भावनाएं हैं। यह लीला लगभग तीन मिनट 36 सेकंड में पूरी होती है। इतने कम समय के आयोजन को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग दूर-दराज के इलाकों से काशी पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं के लिए यह केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भाईचारे, त्याग, प्रेम और पारिवारिक समर्पण का संदेश देने वाला अवसर भी है। राम और भरत का मिलन लोगों को रिश्तों की गरिमा और कर्तव्य के महत्व की याद दिलाता है।

नाटी इमली से लेकर जैतपुरा, लोहटिया और मैदागिन तक श्रद्धालुओं की मौजूदगी दिखाई दी। आयोजकों के अनुसार, इस बार करीब पांच लाख लोगों के जुटने का अनुमान रहा। लगभग 500 मीटर के आयोजन क्षेत्र में भारी भीड़ के कारण कई स्थानों पर चलने तक की जगह कम पड़ गई। ऐसे बड़े धार्मिक आयोजन में भीड़ का प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुरक्षा महत्वपूर्ण रहती है। लोगों की सुविधा के लिए प्रशासनिक व्यवस्था और आयोजन समिति की भूमिका भी अहम रही।

काशी का भरत मिलाप अपनी ऐतिहासिक परंपरा, धार्मिक महत्व और जनभागीदारी के कारण देशभर में विशेष पहचान रखता है। हर वर्ष यह आयोजन भगवान राम के आदर्शों और पारिवारिक संबंधों की महत्ता को नए सिरे से सामने लाता है। कुछ मिनटों के इस दृश्य के लिए घंटों इंतजार करने वाले श्रद्धालुओं की मौजूदगी बताती है कि काशी में इस परंपरा के प्रति लोगों का जुड़ाव कितना गहरा है। इस बार भी नाटी इमली का मैदान भक्ति, उत्साह और आस्था के अद्भुत संगम का गवाह बना।

 

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