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रामलीला मैदान की अनुमति पर घमासान, कांग्रेस के आरोपों को दिल्ली पुलिस ने नकारा

वेणुगोपाल ने कहा कि कार्यक्रम के आयोजन में आ रही बाधाओं के बावजूद INDIA ब्लॉक पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने संकेत दिया कि विपक्ष किसी अन्य स्थान पर कार्यक्रम आयोजित करने के विकल्प पर विचार कर रहा है। उनके मुताबिक, कार्यक्रम की नई जगह और तारीख के बारे में जल्द जानकारी दी जाएगी। कांग्रेस नेता ने कहा कि मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और चुनाव आयोग की जवाबदेही से

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  • October 27, 2026 3:20 pm IST, Published 1 hour ago

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक ने केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ाने का संकेत दिया है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने मंगलवार को आरोप लगाया कि मोदी सरकार विपक्ष के विरोध प्रदर्शन और जन-अभियान को रोकने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम आयोजित करने के लिए प्रस्तावित स्थानों पर अनुमति को लेकर मुश्किलें आने के बावजूद विपक्ष अपना अभियान जारी रखेगा। हालांकि, रामलीला मैदान में रैली की अनुमति वापस लिए जाने के कांग्रेस के दावे पर दिल्ली पुलिस ने अलग रुख सामने रखा है।

वेणुगोपाल के मुताबिक, विपक्षी दल मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कथित वोट चोरी के मुद्दे पर चुनाव आयोग से जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। इसी क्रम में INDIA ब्लॉक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग उठा रहा है। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष की इस मुहिम को आगे बढ़ने से रोकना चाहती है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी ज्ञानेश कुमार को संरक्षण देने का आरोप लगाया। ये आरोप कांग्रेस की ओर से लगाए गए हैं; सरकार की मंशा को लेकर इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

विवाद के केंद्र में दिल्ली में प्रस्तावित राजनीतिक कार्यक्रमों के लिए जगह और अनुमति का मुद्दा है। वेणुगोपाल ने बताया कि विपक्ष ने सबसे पहले अशोक होटल के लॉन में कार्यक्रम आयोजित करने की संभावना तलाश की थी। उनके दावे के अनुसार, शुरुआत में होटल प्रबंधन इसके लिए तैयार था, लेकिन बाद में पुलिस के हस्तक्षेप के बाद अनुमति नहीं मिली। इसके बाद कांग्रेस ने रामलीला मैदान में कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी की और नौ दिनों के लिए मैदान बुक कराया। वेणुगोपाल का आरोप है कि पहले अनुमति मिलने के बाद उसे वापस ले लिया गया।

दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने रामलीला मैदान की अनुमति रद्द किए जाने के आरोप को खारिज किया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस को 25 अक्टूबर से 3 नवंबर तक रामलीला मैदान के इस्तेमाल के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) जारी किया गया था और पहले दी गई मंजूरी में कोई बदलाव नहीं किया गया है। सेंट्रल दिल्ली के पुलिस उपायुक्त रोहित राजबीर सिंह के अनुसार, कांग्रेस ने दिल्ली नगर निगम (MCD) से मैदान की उपलब्धता का प्रमाणपत्र लेने के बाद पुलिस से संपर्क किया था। पुलिस के इस बयान के बाद रैली की अनुमति को लेकर कांग्रेस और प्रशासन के दावों में अंतर सामने आया है।

अशोक होटल में प्रस्तावित मॉक पार्लियामेंट कार्यक्रम को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की गई है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, चूंकि अशोक होटल एक निजी परिसर है, इसलिए वहां कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति देने का फैसला होटल प्रबंधन के अधिकार क्षेत्र में आता है। ऐसे में होटल परिसर में कार्यक्रम नहीं हो पाने को लेकर कांग्रेस के आरोपों और पुलिस के स्पष्टीकरण के बीच विवाद बना हुआ है।

वेणुगोपाल ने कहा कि कार्यक्रम के आयोजन में आ रही बाधाओं के बावजूद INDIA ब्लॉक पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने संकेत दिया कि विपक्ष किसी अन्य स्थान पर कार्यक्रम आयोजित करने के विकल्प पर विचार कर रहा है। उनके मुताबिक, कार्यक्रम की नई जगह और तारीख के बारे में जल्द जानकारी दी जाएगी। कांग्रेस नेता ने कहा कि मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और चुनाव आयोग की जवाबदेही से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष का अभियान जारी रहेगा।

SIR को लेकर विपक्ष की प्रमुख आपत्तियों में मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया, मतदाताओं के नाम जोड़ने और हटाने के तरीके तथा चुनावी पारदर्शिता से जुड़े सवाल शामिल हैं। कांग्रेस और उसके सहयोगी दल इन मुद्दों पर चुनाव आयोग से जवाब मांग रहे हैं। वहीं, मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की मांग को लेकर विपक्ष राजनीतिक और सार्वजनिक स्तर पर अपनी मुहिम आगे बढ़ाना चाहता है।

फिलहाल इस पूरे विवाद में दो मुद्दे प्रमुख हैं। पहला, रामलीला मैदान में कार्यक्रम की अनुमति को लेकर कांग्रेस और दिल्ली पुलिस के अलग-अलग दावे। दूसरा, SIR और कथित वोट चोरी के आरोपों के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की विपक्ष की मांग। आने वाले दिनों में INDIA ब्लॉक के प्रस्तावित कार्यक्रम और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है। हालांकि, कार्यक्रम के आयोजन स्थल और आगे की रणनीति के बारे में अंतिम स्थिति विपक्ष की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी।

 

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