• होम
  • Blog
  • चक्रवात अर्णब को लेकर झारखंड सरकार सतर्क, किसानों को मुआवजा देने की तैयारी

चक्रवात अर्णब को लेकर झारखंड सरकार सतर्क, किसानों को मुआवजा देने की तैयारी

बारिश और खराब मौसम के कारण उत्पन्न हो सकने वाली अन्य समस्याओं को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग को विशेष तैयारी करने को कहा गया है। इनमें वज्रपात, सर्पदंश और वर्षाजनित बीमारियों से निपटने की व्यवस्था शामिल है। संभावित जलभराव और ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन प्रभावित होने की स्थिति में स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए संबंधित...

Advertisement
Gauravshali Bharat
Gauravshali Bharat News
  • October 29, 2026 7:36 pm IST, Published 1 hour ago

रांची: बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवाती तूफान ‘अर्णब’ को देखते हुए झारखंड सरकार ने राज्य के सभी जिलों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं। संभावित खराब मौसम और बारिश से किसानों की धान की फसल को होने वाले नुकसान को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। राज्य के आपदा प्रबंधन मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने सभी जिलों के उपायुक्तों को पत्र लिखकर प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल स्थलीय सर्वेक्षण कराने और फसलों को हुए वास्तविक नुकसान का आकलन करने के निर्देश दिए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि नुकसान का आकलन निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से किया जाएगा तथा पात्र किसानों को निर्धारित नियमों के अनुसार मुआवजा उपलब्ध कराया जाएगा।

मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि किसान पूरे साल मेहनत करके अपनी फसल तैयार करते हैं। ऐसे में प्राकृतिक आपदा के कारण धान की फसल बर्बाद होने से उनकी आर्थिक स्थिति और परिवार की आजीविका पर सीधा असर पड़ता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि फसल नुकसान का सर्वे केवल औपचारिकता बनकर नहीं रहना चाहिए, बल्कि प्रभावित किसानों की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाना चाहिए। सर्वेक्षण के दौरान कृषि भूमि और फसल को हुए नुकसान का भी उचित रिकॉर्ड तैयार करने पर जोर दिया गया है।

राज्य सरकार का कहना है कि सर्वेक्षण पूरा होने के बाद निर्धारित प्रावधानों के तहत प्रभावित किसानों को राहत और क्षतिपूर्ति उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। इसके लिए जिला प्रशासन को अपने स्तर पर आवश्यक तैयारियां करने और संबंधित विभागों के साथ समन्वय बनाए रखने को कहा गया है। मंत्री ने साफ किया कि सर्वेक्षण में किसी प्रकार की लापरवाही, देरी या खानापूर्ति स्वीकार नहीं की जाएगी। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि नुकसान से प्रभावित किसानों की जानकारी सही तरीके से दर्ज हो, ताकि राहत वितरण में किसी पात्र व्यक्ति को परेशानी न हो। चक्रवाती तूफान के संभावित प्रभाव को देखते हुए सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।

सभी जिलों के सिविल सर्जनों को अलर्ट मोड में रहने और सदर अस्पताल, अनुमंडल अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था दुरुस्त रखने को कहा गया है। प्रशासन का उद्देश्य है कि खराब मौसम के दौरान किसी भी आपात स्थिति में मरीजों को समय पर इलाज मिल सके। निर्देशों के अनुसार, प्रत्येक सदर अस्पताल में कम से कम 10 अतिरिक्त बेड तैयार रखने को कहा गया है। इसके अलावा जरूरी दवाइयों, जीवनरक्षक औषधियों, ऑक्सीजन, एंबुलेंस और चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। अस्पतालों में चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की पर्याप्त तैनाती करने के साथ आपातकालीन सेवाओं को सक्रिय रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।

बारिश और खराब मौसम के कारण उत्पन्न हो सकने वाली अन्य समस्याओं को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग को विशेष तैयारी करने को कहा गया है। इनमें वज्रपात, सर्पदंश और वर्षाजनित बीमारियों से निपटने की व्यवस्था शामिल है। संभावित जलभराव और ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन प्रभावित होने की स्थिति में स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए संबंधित अधिकारियों को सतर्क रहने की जरूरत बताई गई है। आपदा प्रबंधन मंत्री ने जिला प्रशासन को संवेदनशील इलाकों, निचले क्षेत्रों, जलजमाव की आशंका वाले स्थानों और नदी-नालों के आसपास विशेष निगरानी रखने का निर्देश दिया है। जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और राहत एवं बचाव अभियान चलाने के लिए संबंधित विभागों के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखने को कहा गया है। अधिकारियों को किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए आवश्यक संसाधन और व्यवस्थाएं तैयार रखने की हिदायत दी गई है।

मंत्री ने दोहराया कि आपदा की स्थिति में प्रशासन की प्राथमिकता लोगों की सुरक्षा और किसानों को समय पर सहायता उपलब्ध कराना है। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को जिम्मेदारी के साथ काम करने और किसी भी स्तर पर संवेदनहीनता नहीं दिखाने का निर्देश दिया। अब मौसम की स्थिति, जिला स्तर पर किए जाने वाले सर्वेक्षण और प्रशासन की तैयारियों पर नजर रहेगी। फसल नुकसान की वास्तविक स्थिति सामने आने के बाद ही प्रभावित किसानों को मिलने वाली राहत का दायरा स्पष्ट हो सकेगा।

Advertisement