सरदार पटेल की जयंती पर योगी ने दिलाई एकता और अखंडता की शपथ

सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम ने एक बार फिर देश के एकीकरण में उनके ऐतिहासिक योगदान को रेखांकित किया। आजादी के बाद बिखरी हुई रियासतों को एक राष्ट्र के रूप में संगठित करने का उनका प्रयास आधुनिक भारत की आधारशिला माना जाता है। उनका जीवन यह संदेश देता है कि राष्ट्रीय एकता...

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  • October 31, 2026 11:37 am IST, Published 59 minutes ago

लखनऊ: लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती और राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पटेल चौक स्थित सरदार पटेल की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक समेत कई जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य लोग मौजूद रहे। इस दौरान मुख्यमंत्री ने उपस्थित लोगों को देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता बनाए रखने की शपथ भी दिलाई।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और इसकी सबसे बड़ी ताकत राष्ट्रीय एकता है। उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल के ऐतिहासिक योगदान को याद करते हुए कहा कि आजादी के बाद देश के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक अलग-अलग रियासतों को एक राष्ट्रीय व्यवस्था में शामिल करना था। सरदार पटेल ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति, राजनीतिक समझ और कुशल नेतृत्व के बल पर इस चुनौती का सामना किया और सैकड़ों रियासतों को एक सूत्र में पिरोकर अखंड भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरदार पटेल ने देश की एकता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी थी। उनके प्रयासों के कारण स्वतंत्रता के बाद भारत का राजनीतिक एकीकरण संभव हो सका। हैदराबाद रियासत का भारत में विलय भी इसी ऐतिहासिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा था। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल का जीवन प्रत्येक भारतीय के लिए राष्ट्रप्रेम, समर्पण और दृढ़ संकल्प की प्रेरणा देता है। उनके आदर्शों को अपनाकर ही देश की एकता और अखंडता को मजबूत बनाया जा सकता है। सीएम योगी ने अपने संबोधन में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने इस ऐतिहासिक प्रावधान को समाप्त कर राष्ट्रीय एकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया। मुख्यमंत्री के अनुसार, राष्ट्रवाद की भावना को मजबूत करते हुए देश को आगे बढ़ाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे समाज को जाति, क्षेत्र और अन्य आधारों पर बांटने वाली मानसिकता से दूर रहें और राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखें।

मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश की पिछली राजनीतिक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में तुष्टीकरण, जातिवाद और परिवारवाद की राजनीति के कारण सामाजिक विभाजन को बढ़ावा मिला। उनके अनुसार, ऐसी राजनीति ने सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकात्मता की भावना को कमजोर किया। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2017 के बाद प्रदेश में सरकार की प्राथमिकताओं में बदलाव आया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में डबल इंजन सरकार ने राष्ट्रहित को शासन का प्रमुख आधार बनाया है। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्तमान सरकार ने ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ के मंत्र के साथ आगे बढ़ते हुए सामाजिक समरसता को मजबूत करने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि शासन और विकास की योजनाओं में राष्ट्र प्रथम की भावना को केंद्र में रखा गया है। मुख्यमंत्री ने सरदार पटेल की विरासत को केवल इतिहास तक सीमित न रखने की बात कही और इसे वर्तमान पीढ़ी के व्यवहार तथा राष्ट्रीय जीवन का हिस्सा बनाने पर जोर दिया।

उन्होंने राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर आयोजित ‘रन फॉर यूनिटी’ को भी इसी उद्देश्य से जुड़ा महत्वपूर्ण आयोजन बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि एकता दौड़ में भाग लेना केवल शारीरिक गतिविधि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता व्यक्त करने का अवसर है। उन्होंने प्रदेशवासियों और युवाओं से इस आयोजन में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि दौड़ में उठने वाला हर कदम राष्ट्र की एकता के प्रति समर्पण और देश को सर्वोपरि रखने की भावना का प्रतीक होना चाहिए। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक की मौजूदगी ने आयोजन को राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बनाया। पटेल चौक स्थित प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद नेताओं ने सरदार पटेल के योगदान को याद किया। इस दौरान राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने का संदेश दिया गया।

सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम ने एक बार फिर देश के एकीकरण में उनके ऐतिहासिक योगदान को रेखांकित किया। आजादी के बाद बिखरी हुई रियासतों को एक राष्ट्र के रूप में संगठित करने का उनका प्रयास आधुनिक भारत की आधारशिला माना जाता है। उनका जीवन यह संदेश देता है कि राष्ट्रीय एकता केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन के माध्यम से लोगों से आह्वान किया कि वे आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर देश की एकता और अखंडता के लिए काम करें। उन्होंने राष्ट्रवाद, सामाजिक समरसता और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने पर जोर दिया। राष्ट्रीय एकता दिवस पर लखनऊ से दिया गया संदेश यही रहा कि सरदार पटेल के आदर्शों को आत्मसात करते हुए एक मजबूत, समरस और एकजुट भारत के निर्माण में हर नागरिक को अपनी भूमिका निभानी चाहिए।

 

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