शुक्रवार को श्रीनगर में नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायकों ने विधायक कैसर जमशेद लोन के आवास पर बैठक की। मीडिया रिपोर्टों और सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में 18 विधायक व्यक्तिगत रूप से शामिल हुए, जबकि छह अन्य विधायकों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपनी भागीदारी दर्ज कराई। इस तरह कुल 24 विधायकों का समर्थन मिलने की बात सामने आई है। बैठक में हालिया मंत्रिमंडल विस्तार, वरिष्ठ नेताओं को जगह नहीं मिलने और सरकार में विधायकों की भूमिका जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
बैठक में शामिल असंतुष्ट विधायकों की प्रमुख मांग मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर असलम वानी को उनके पद से हटाने की बताई जा रही है। इसके अलावा उप मुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी सहित कुछ मंत्रियों को मंत्रिमंडल से हटाने की मांग भी उठाई गई है। सूत्रों के अनुसार, विधायकों ने इस संबंध में एक प्रस्ताव पर हस्ताक्षर भी किए हैं। उनका मानना है कि सरकार और संगठन में फैसले लेने की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होनी चाहिए और निर्वाचित प्रतिनिधियों को उचित महत्व मिलना चाहिए। एक असंतुष्ट विधायक के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, विधायक मुख्यमंत्री से मुलाकात कर अपनी मांगें रखना चाहते हैं। उनका कहना है कि वे नेशनल कॉन्फ्रेंस के खिलाफ नहीं हैं और न ही पार्टी से अलग होने की उनकी कोई मंशा है। लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में पहले की तरह काम करना संभव नहीं है। मुख्यमंत्री को विधायकों की शिकायतें सुननी चाहिए और पार्टी तथा सरकार के हित में आवश्यक बदलाव करने चाहिए।
विधायकों की ओर से केवल मंत्रियों को हटाने की मांग ही नहीं की गई है, बल्कि पार्टी के चुनावी घोषणापत्र को लागू करने के लिए स्पष्ट कार्ययोजना बनाने की बात भी कही गई है। इसके साथ ही विधायकों को अधिक अधिकार और जिम्मेदारी देने की मांग उठाई गई है। असंतुष्ट खेमे का कहना है कि पार्टी के भीतर लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत होनी चाहिए और सरकार के महत्वपूर्ण फैसलों में सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। दरअसल, हालिया कैबिनेट विस्तार से पहले भी मंत्रिपद की उम्मीद लगाए बैठे कई विधायकों में नाराजगी की चर्चा थी।
उमर अब्दुल्ला ने पहले ही संकेत दे दिया था कि मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने वाले नामों की सूची तैयार हो चुकी है और अब विधायकों को मंत्री बनने की मांग लेकर उनके पास नहीं आना चाहिए। इसके बाद हुए विस्तार में कुछ नए चेहरों को जगह मिली, लेकिन कई वरिष्ठ विधायक मंत्रिमंडल से बाहर रह गए। माना जा रहा है कि इसी घटनाक्रम ने पार्टी के भीतर असंतोष को और बढ़ाया। जम्मू-कश्मीर की 90 सदस्यीय विधानसभा में नेशनल कॉन्फ्रेंस के पास 41 विधायक हैं। कांग्रेस के छह विधायकों के अलावा कुछ छोटे दलों और निर्दलीय विधायकों का समर्थन भी सरकार को प्राप्त है। ऐसे में पार्टी के भीतर इतने बड़े समूह की नाराजगी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, केवल बैठक और मांगों के आधार पर सरकार के भविष्य को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
दूसरी ओर, असंतुष्ट विधायकों ने बगावत की बात को खारिज करते हुए कहा है कि वे पार्टी की एकता बनाए रखना चाहते हैं। उनका कहना है कि सरकार और संगठन को कुछ चुनिंदा लोगों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। अब सबकी नजर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की प्रतिक्रिया और असंतुष्ट विधायकों के साथ प्रस्तावित मुलाकात पर टिकी है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि पार्टी नेतृत्व इन मांगों पर क्या रुख अपनाता है और अंदरूनी मतभेदों को बातचीत के जरिए किस तरह सुलझाया जाता है। इस घटनाक्रम के बीच नेशनल कॉन्फ्रेंस की प्रवक्ता इफरा जान ने विधायकों की बैठक में शामिल सदस्यों की संख्या को लेकर सामने आ रही खबरों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि बैठक में 20 या उससे अधिक विधायकों के शामिल होने के दावे की पुष्टि किस आधार पर की जा रही है। इससे साफ है कि विधायकों की नाराजगी और बैठक में शामिल सदस्यों की वास्तविक संख्या को लेकर पार्टी के भीतर और बाहर चर्चा जारी है।