यूपी में स्कूल बंद होने पर भड़के अखिलेश, भाजपा सरकार को घेरा

अखिलेश यादव ने भाजपा पर आरोप लगाया कि एक तरफ सरकार डिजिटल इंडिया और आर्थिक विकास की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ स्कूलों के बंद होने जैसे मुद्दे शिक्षा के प्रति उसकी गंभीरता पर सवाल खड़े करते हैं। उन्होंने कहा कि देश की तरक्की केवल बड़े आर्थिक आंकड़ों और नारों से नहीं मापी जा सकती।

Advertisement
Gauravshali Bharat
Gauravshali Bharat News
  • October 31, 2026 12:14 pm IST, Published 48 minutes ago

लखनऊ: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए शिक्षा, रोजगार और प्रदेश के विकास से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार विकास के बड़े-बड़े दावे तो करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के बजाय उसे कमजोर किया जा रहा है। अखिलेश यादव ने दावा किया कि प्रदेश में 26 हजार स्कूल बंद हो चुके हैं। उन्होंने इस मुद्दे को उठाते हुए सरकार की नीतियों और प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े किए।
लखनऊ में अपने बयान के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा ने देश को स्वच्छ भारत, एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था और डिजिटल इंडिया जैसे सपने दिखाए हैं। सरकार की ओर से विकास और आधुनिक भारत की तस्वीर पेश की जाती है, लेकिन शिक्षा के क्षेत्र में सामने आ रहे हालात चिंताजनक हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज और देश का भविष्य शिक्षा से बेहतर बनता है। बच्चों को अच्छी शिक्षा उपलब्ध कराना सरकार की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में शामिल होना चाहिए।

सपा प्रमुख ने 26 हजार स्कूलों के बंद होने का दावा करते हुए एक और विवादित आशंका जताई। उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसी जानकारी मिली है कि बंद हुए स्कूलों में शराब के ठेके खोले जाने की तैयारी है। हालांकि, इस दावे के समर्थन में उन्होंने अपने बयान में कोई आधिकारिक दस्तावेज या विस्तृत जानकारी पेश नहीं की। उनके इस बयान ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और सरकारी संपत्तियों के इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक बहस को नया मुद्दा दे दिया है। अखिलेश यादव ने कहा कि मानव जीवन में वास्तविक सुधार शिक्षा के माध्यम से ही संभव है। यदि बच्चों को स्कूल और बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं नहीं मिलेंगी तो समाज का भविष्य प्रभावित होगा।

अखिलेश यादव ने भाजपा पर आरोप लगाया कि एक तरफ सरकार डिजिटल इंडिया और आर्थिक विकास की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ स्कूलों के बंद होने जैसे मुद्दे शिक्षा के प्रति उसकी गंभीरता पर सवाल खड़े करते हैं। उन्होंने कहा कि देश की तरक्की केवल बड़े आर्थिक आंकड़ों और नारों से नहीं मापी जा सकती। विकास का वास्तविक अर्थ यह है कि आम नागरिक को बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और जीवन की बुनियादी सुविधाएं मिलें। स्कूलों की उपलब्धता और शिक्षा की गुणवत्ता किसी भी प्रदेश की प्रगति का महत्वपूर्ण पैमाना है। ऐसे में सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि स्कूलों को बंद करने के पीछे क्या कारण हैं और वहां पढ़ने वाले बच्चों की शिक्षा की व्यवस्था किस तरह की गई है।

अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग और भाजपा के सदस्यों से जुड़े सवाल पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि भाजपा के सदस्य को चुनाव आयोग भारत का नागरिक और मतदाता मानता है। उनके इस बयान को राजनीतिक और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर उनकी आपत्ति के तौर पर देखा जा रहा है। आगामी राजनीतिक चुनौतियों का जिक्र करते हुए सपा अध्यक्ष ने कहा कि समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता एकजुट हैं और भाजपा का मुकाबला करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से संगठनात्मक एकता बनाए रखने और राजनीतिक लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभाने का संदेश दिया। अखिलेश यादव के मुताबिक, भाजपा को चुनौती देने के लिए विपक्षी कार्यकर्ताओं का एकजुट होना जरूरी है।

उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि भाजपा उत्तर प्रदेश से सत्ता से बाहर होती है तो उसका असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ेगा। उनका कहना था कि भाजपा की राजनीतिक स्थिति उत्तर प्रदेश से काफी हद तक जुड़ी हुई है। इसलिए प्रदेश की राजनीति आने वाले समय में देश की राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। अखिलेश यादव के इस बयान से उत्तर प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था, स्कूलों के बंद होने और सरकारी नीतियों को लेकर सियासी बहस तेज होने की संभावना है। समाजवादी पार्टी जहां इन मुद्दों को उठाकर भाजपा सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है, वहीं इन आरोपों पर सरकार का पक्ष और स्कूलों की वास्तविक स्थिति भी चर्चा के केंद्र में रहेंगे।


Advertisement