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नेहरू-पटेल विवाद से SIR तक, संबित पात्रा ने कांग्रेस पर साधा निशाना

भाजपा सांसद ने यह भी कहा कि एक व्यक्ति का नाम दो अलग-अलग स्थानों की मतदाता सूची में दर्ज नहीं होना चाहिए। यदि किसी का नाम दिल्ली और आंध्र प्रदेश या बिहार और दिल्ली दोनों जगह दर्ज है तो उसे अपने वास्तविक निवास के अनुसार एक स्थान पर पंजीकरण रखना चाहिए।

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Gauravshali Bharat News
  • October 31, 2026 8:00 pm IST, Published 1 hour ago

नयी दिल्लीः भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद और पुरी से लोकसभा सदस्य संबित पात्रा ने कांग्रेस की ओर से आयोजित मॉक संसद कार्यक्रम को लेकर विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कांग्रेस पर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को लेकर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया। पात्रा ने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल संसद की कार्यवाही बाधित करते हैं और अब मॉक संसद आयोजित कर लोकतंत्र के नाम पर राजनीतिक प्रदर्शन कर रहे हैं।

संबित पात्रा ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की ओर से उठाए गए वोट चोरी के मुद्दे पर भी पलटवार किया। उन्होंने कहा कि यदि देश के राजनीतिक इतिहास में वोट चोरी की बात की जाए तो इसकी शुरुआत पंडित जवाहरलाल नेहरू के समय से जोड़कर देखी जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वतंत्रता के बाद प्रधानमंत्री के चयन के दौरान सरदार वल्लभभाई पटेल को कांग्रेस के अधिकांश वरिष्ठ नेताओं का समर्थन प्राप्त था, लेकिन इसके बावजूद जवाहरलाल नेहरू देश के पहले प्रधानमंत्री बने।

भाजपा सांसद ने दावा किया कि कांग्रेस के भीतर उस समय नेताओं की राय को महत्व नहीं दिया गया और पटेल के पक्ष में मिले समर्थन के बावजूद नेहरू को प्रधानमंत्री बनाया गया। उन्होंने इस ऐतिहासिक घटनाक्रम को वोट चोरी से जोड़ते हुए कांग्रेस पर सवाल उठाए। हालांकि, यह संबित पात्रा की राजनीतिक व्याख्या और आरोप है, जिसे उन्होंने कांग्रेस के मौजूदा वोट चोरी संबंधी आरोपों के जवाब में उठाया।  उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस को चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची पर सवाल उठाने से पहले अपने राजनीतिक इतिहास पर भी विचार करना चाहिए। पात्रा ने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव और मतदान की प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण है और मतदाता सूची को सही रखना चुनाव की निष्पक्षता के लिए जरूरी है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में संबित पात्रा ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने दावा किया कि विभिन्न राज्यों में करीब 13 करोड़ लोगों के नाम अभी अंतिम मतदाता सूची में शामिल नहीं हुए हैं। उन्होंने इस प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले ASDD फॉर्मूले का जिक्र करते हुए बताया कि इसके तहत मतदाता सूची में कुछ विशेष श्रेणियों की पहचान की जाती है। पात्रा के अनुसार, ASDD में ‘A’ का अर्थ Absent यानी अनुपस्थित, ‘S’ का अर्थ Shifted यानी स्थान बदलकर दूसरे स्थान पर चले जाना, जबकि दोनों ‘D’ का अर्थ Dead यानी मृत और Duplicate यानी एक से अधिक स्थानों पर दर्ज नाम है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची को दुरुस्त करने के लिए इन श्रेणियों को समझना आवश्यक है।

उन्होंने बताया कि अनुपस्थित श्रेणी में ऐसे लोगों को रखा जाता है, जो सत्यापन के दौरान अपने पंजीकृत पते पर उपलब्ध नहीं मिलते। उनके मुताबिक, बूथ लेवल अधिकारी मतदाताओं के पते पर जाकर जानकारी जुटाते हैं और निर्धारित प्रयासों के बावजूद संपर्क नहीं होने पर नाम को अनुपस्थित श्रेणी में दर्ज किया जा सकता है। स्थान परिवर्तन के मुद्दे पर पात्रा ने कहा कि बड़ी संख्या में लोग नौकरी, कारोबार या अन्य कारणों से एक शहर से दूसरे शहर में चले जाते हैं। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति जोर बाग से सिविल लाइंस में रहने चला जाता है तो उसे नए पते पर मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए फॉर्म-6 भरना चाहिए। उन्होंने कहा कि कई लोग इस प्रक्रिया को समय पर पूरा नहीं करते और बाद में मतदाता सूची में नाम को लेकर परेशानी का सामना करते हैं।

भाजपा सांसद ने यह भी कहा कि एक व्यक्ति का नाम दो अलग-अलग स्थानों की मतदाता सूची में दर्ज नहीं होना चाहिए। यदि किसी का नाम दिल्ली और आंध्र प्रदेश या बिहार और दिल्ली दोनों जगह दर्ज है तो उसे अपने वास्तविक निवास के अनुसार एक स्थान पर पंजीकरण रखना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि SIR की प्रक्रिया का उद्देश्य ऐसे डुप्लीकेट नामों और गलत प्रविष्टियों को हटाकर मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना है। पात्रा ने कांग्रेस के इस आरोप पर भी सवाल उठाए कि SIR के माध्यम से बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया को लेकर भ्रम फैलाने के बजाय मतदाता सूची के सत्यापन की वास्तविक जरूरत को समझना चाहिए। उनके मुताबिक, चुनावी व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए मृत, स्थानांतरित और डुप्लीकेट मतदाताओं की पहचान करना जरूरी है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि देश में अब तक 12 बार SIR की प्रक्रिया हो चुकी है और इनमें से 10 बार यह कांग्रेस के शासनकाल में आयोजित हुई थी। उनके इस बयान का उद्देश्य विपक्ष के उस विरोध पर सवाल उठाना था, जिसमें मौजूदा SIR प्रक्रिया को लेकर आपत्तियां जताई जा रही हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस SIR की प्रक्रिया पर लगातार सवाल उठा रही है। पार्टी का आरोप है कि इस अभियान के दौरान बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम भी सूची से बाहर हो सकते हैं। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने पहले भी ASDD श्रेणियों और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर आपत्ति जताई है। विपक्ष की मांग है कि जिन योग्य मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, उन्हें दोबारा सूची में शामिल किया जाए।

गौरतलब है कि 31 अक्टूबर को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर इंडिया गठबंधन की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रतीकात्मक सार्वजनिक महाभियोग कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसी कार्यक्रम को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हुई है।  संबित पात्रा के बयान से साफ है कि भाजपा ने मॉक संसद, नेहरू-पटेल विवाद और SIR के मुद्दे को लेकर कांग्रेस पर राजनीतिक जवाबी हमला तेज कर दिया है। वहीं, मतदाता सूची की पारदर्शिता और पात्र मतदाताओं के अधिकारों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस जारी है।


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