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नितिन नवीन और जेपी नड्डा का कांग्रेस पर हमला, 1984 दंगों का मुद्दा उठाया

नितिन नवीन ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के चुनाव से जुड़े ऐतिहासिक घटनाक्रम का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि सरकारी मशीनरी के इस्तेमाल से चुनाव प्रभावित किया गया था। उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले का उल्लेख किया, जिसमें इंदिरा गांधी के रायबरेली से...

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  • November 1, 2026 2:46 pm IST, Published 1 hour ago

नई दिल्ली। देश में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। दिल्ली के रामलीला मैदान में विपक्षी दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं का जमावड़ा देखने को मिल रहा है। विपक्ष की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने का दावा किया जा रहा है। इससे पहले शुक्रवार को मॉक पार्लियामेंट का आयोजन भी किया गया था। विपक्ष जहां चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची के मुद्दे पर सरकार तथा चुनाव आयोग को घेर रहा है, वहीं भारतीय जनता पार्टी ने भी देशभर में कार्यक्रम और रैलियां आयोजित कर कांग्रेस के आरोपों का जवाब देना शुरू कर दिया है।

इसी क्रम में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन हरियाणा के रोहतक पहुंचे। यहां आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कांग्रेस और गांधी परिवार पर निशाना साधते हुए देश के राजनीतिक इतिहास की कई घटनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज कांग्रेस के नेता संविधान की प्रति लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं के साथ कैसा व्यवहार हुआ, इस पर भी उन्हें जवाब देना चाहिए।

नितिन नवीन ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के चुनाव से जुड़े ऐतिहासिक घटनाक्रम का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि सरकारी मशीनरी के इस्तेमाल से चुनाव प्रभावित किया गया था। उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले का उल्लेख किया, जिसमें इंदिरा गांधी के रायबरेली से चुनाव को अमान्य घोषित किया गया था। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस को लोकतंत्र और चुनावी निष्पक्षता पर सवाल उठाने से पहले अपने राजनीतिक इतिहास पर भी विचार करना चाहिए।

उन्होंने 1984 के सिख विरोधी दंगों का उल्लेख करते हुए कांग्रेस नेतृत्व से पीड़ित परिवारों के प्रति जवाबदेही की मांग की। नितिन नवीन ने तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के उस चर्चित बयान का संदर्भ दिया, जिसमें बड़े पेड़ के गिरने पर धरती हिलने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि उस हिंसा में जान गंवाने वाले लोगों और प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करने के साथ माफी और न्याय की दिशा में गंभीर प्रयास होने चाहिए थे।

नितिन नवीन ने भाजपा की पदयात्रा और जनसंपर्क कार्यक्रम को लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास बताया। उनका कहना था कि जब विपक्ष जनादेश और चुनावी प्रक्रियाओं पर सवाल उठाता है, तब भाजपा कार्यकर्ता जनता के बीच जाकर अपनी बात रखते हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए राजनीतिक दलों को जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

दूसरी ओर, भाजपा के वरिष्ठ नेता जेपी नड्डा ने भी विपक्षी दलों और कांग्रेस पर तीखे आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि त्योहारों का समय व्यापारियों के लिए आर्थिक गतिविधियों और कारोबार का महत्वपूर्ण अवसर होता है। ऐसे समय में बड़े राजनीतिक प्रदर्शनों के आयोजन से बाजार और व्यापार प्रभावित हो सकते हैं। नड्डा ने दावा किया कि दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन के कारण व्यापारिक गतिविधियों को नुकसान पहुंचने की आशंका है। उन्होंने चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) की ओर से राहुल गांधी को भेजे गए पत्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि व्यापारिक संगठनों ने प्रदर्शन के आयोजन और उसके संभावित प्रभावों को लेकर चिंता जताई थी। नड्डा ने अनुमान व्यक्त किया कि इस आयोजन के कारण कारोबार को करीब 10 हजार करोड़ रुपये तक का नुकसान हो सकता है। हालांकि यह आंकड़ा उनका दावा है।

जेपी नड्डा ने विपक्षी गठबंधन के नेताओं से सवाल किया कि क्या वे भी ऐसे आयोजनों से व्यापारियों को होने वाली परेशानी की जिम्मेदारी स्वीकार करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के प्रति राजनीतिक विरोध के चलते आम जनता और व्यापारिक समुदाय के हितों की अनदेखी की जा रही है।नड्डा ने 1984 के सिख विरोधी दंगों का मुद्दा उठाते हुए कांग्रेस नेतृत्व पर पीड़ित परिवारों से पर्याप्त माफी नहीं मांगने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उस हिंसा में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई और अनेक परिवारों को लंबे समय तक पीड़ा झेलनी पड़ी। उनके अनुसार, ऐसे संवेदनशील विषयों पर राजनीतिक दलों को पीड़ितों के प्रति जवाबदेही दिखानी चाहिए।

गौरतलब है कि SIR, मतदाता सूची के पुनरीक्षण, चुनाव आयोग की निष्पक्षता और मताधिकार की सुरक्षा को लेकर देश में राजनीतिक बहस लगातार तेज हो रही है। विपक्ष इन मुद्दों पर सरकार और चुनाव आयोग से जवाब मांग रहा है, जबकि भाजपा कांग्रेस के पुराने राजनीतिक घटनाक्रमों और विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों को लेकर सवाल उठा रही है। इस पूरे घटनाक्रम से स्पष्ट है कि चुनावी प्रक्रिया, लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका, राजनीतिक जवाबदेही और नागरिकों के मतदान अधिकार जैसे मुद्दे आने वाले दिनों में भी राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में बने रह सकते हैं।

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