नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों के दौरान बढ़ते वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए एक नवंबर से नए प्रतिबंध लागू हो गए हैं। इसके तहत दिल्ली के बाहर पंजीकृत बीएस-6 मानक से नीचे की पेट्रोल और डीजल गाड़ियों के राजधानी में प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। सरकारी और निजी कार्यालयों में एक समय पर केवल 50 प्रतिशत कर्मचारी ही दफ्तर आ सकेंगे, जबकि बाकी कर्मचारियों को घर से काम करना होगा। इसके अलावा कई सार्वजनिक पार्किंग स्थलों पर शुल्क दोगुना कर दिया गया है।
दिल्ली सरकार ने जुलाई में शीतकालीन प्रदूषण कार्ययोजना को मंजूरी दी थी। इसके तहत हर साल एक नवंबर से 28 फरवरी तक प्रदूषण नियंत्रण के लिए पहले से निर्धारित उपाय लागू किए जाएंगे। इसका उद्देश्य प्रदूषण का स्तर गंभीर होने का इंतजार किए बिना समय रहते कार्रवाई करना है।
नए नियमों के अनुसार, एक नवंबर से 31 जनवरी 2027 तक दिल्ली के बाहर पंजीकृत बीएस-6 से कम मानक वाली पेट्रोल और डीजल गाड़ियां राजधानी में प्रवेश नहीं कर सकेंगी। इस प्रतिबंध के दायरे में नोएडा, गुरुग्राम, फरीदाबाद और गाजियाबाद से दिल्ली आने वाली पुरानी गाड़ियां भी शामिल हैं।
हालांकि, इलेक्ट्रिक और सीएनजी वाहनों को इस प्रतिबंध से छूट दी गई है। एंबुलेंस, दमकल और अन्य आवश्यक सेवाओं से जुड़े वाहनों को भी राजधानी में आने की अनुमति होगी।
धूल से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए एक नवंबर से 31 जनवरी तक निर्माण और तोड़फोड़ की गतिविधियों पर रोक रहेगी। जरूरी सार्वजनिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को निर्धारित शर्तों के आधार पर छूट दी जा सकती है।
वहीं, इमारतों के अंदर बिजली, पाइपलाइन और फिनिशिंग से जुड़े काम जारी रह सकेंगे। इसके अलावा 10 दिसंबर से 20 जनवरी तक निर्माण और तोड़फोड़ से संबंधित गतिविधियों पर और सख्त प्रतिबंध लागू होंगे।
प्रदूषण कम करने के लिए सरकारी और निजी कार्यालयों में कर्मचारियों की उपस्थिति सीमित की गई है। अब एक समय पर अधिकतम 50 प्रतिशत कर्मचारी ही कार्यालय आ सकेंगे, जबकि शेष कर्मचारियों को घर से काम करना होगा। यह व्यवस्था 28 फरवरी 2027 तक लागू रहेगी। आवश्यक और आपातकालीन सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों को इससे छूट दी गई है।
दिल्ली नगर निगम के कार्यालय सुबह 8:30 बजे से शाम 5 बजे तक और दिल्ली सरकार के कार्यालय सुबह 10 बजे से शाम 6:30 बजे तक संचालित होंगे। निजी कंपनियों को कर्मचारियों के बीच साझा वाहन व्यवस्था और सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए गए हैं।
निजी वाहनों के इस्तेमाल को कम करने के उद्देश्य से दिल्ली के कई सार्वजनिक पार्किंग स्थलों पर एक नवंबर से 28 फरवरी तक पार्किंग शुल्क दोगुना कर दिया गया है। हालांकि, दिल्ली मेट्रो द्वारा संचालित पार्किंग स्थलों पर यह बढ़ोतरी लागू नहीं होगी।
सरकार का मानना है कि पार्किंग शुल्क बढ़ने से लोग निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन का अधिक इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित होंगे।
दिल्ली में बिना वैध प्रदूषण जांच प्रमाणपत्र (पीयूसी) वाले वाहनों को पेट्रोल, डीजल और सीएनजी नहीं दी जाएगी। इस नियम की निगरानी के लिए राजधानी के 500 पेट्रोल पंपों पर स्वचालित नंबर प्लेट पहचान कैमरे लगाए गए हैं।
ये कैमरे वाहनों की नंबर प्लेट पढ़कर उनकी जानकारी की जांच करेंगे। यदि किसी वाहन का प्रदूषण जांच प्रमाणपत्र वैध नहीं पाया जाता है, तो उसे ईंधन देने से रोका जा सकता है।
नए प्रतिबंधों को प्रभावी ढंग से लागू कराने के लिए विशेष निगरानी टीमें तैनात की गई हैं। स्वचालित नंबर प्लेट पहचान कैमरों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीक की मदद से वाहनों पर नजर रखी जाएगी। नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के ई-चालान काटे जाएंगे।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने नागरिकों से प्रदूषण नियंत्रण के लिए बनाए गए नियमों का पालन करने की अपील की है। सरकार का कहना है कि दिल्ली की हवा को साफ रखने के लिए केवल सरकारी कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि आम लोगों को भी निजी वाहनों का इस्तेमाल कम करने और सार्वजनिक परिवहन अपनाने में सहयोग करना होगा।
पहले दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण बढ़ने के बाद वायु गुणवत्ता के स्तर के आधार पर चरणबद्ध प्रतिबंध लागू किए जाते थे। इसे ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (ग्रेप) कहा जाता है। जनवरी 2017 में लागू हुई इस व्यवस्था के तहत वायु गुणवत्ता सूचकांक के आधार पर चार चरणों में पाबंदियां लगाई जाती हैं।
नई शीतकालीन कार्ययोजना में कुछ प्रतिबंधों के लिए तारीख पहले से निर्धारित कर दी गई है। इससे प्रदूषण का स्तर बढ़ने से पहले ही नियंत्रण के उपाय शुरू किए जा सकेंगे। अब इन नियमों का असर कितना दिखाई देता है, यह उनके जमीनी स्तर पर पालन और आम लोगों के सहयोग पर निर्भर करेगा।