परिवार ने अदालत से अनुरोध किया है कि पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी को सौंपी जाए और इसकी निगरानी सेवानिवृत्त न्यायाधीश के माध्यम से कराई जाए। उनका मानना है कि निष्पक्ष जांच से घटना से जुड़े सभी पहलुओं और कथित भेदभाव की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी। याचिका में साहिल के हॉस्टल जीवन से जुड़ी एक घटना का भी उल्लेख किया गया है। माता-पिता के मुताबिक, जब साहिल को हॉस्टल में कमरा मिला था, तब वह वहां डॉ. भीमराव आंबेडकर की तस्वीर लगाना चाहता था। आरोप है कि उसके रूममेट्स ने उसे ऐसा करने से यह कहते हुए रोका कि इससे उसे जातिगत भेदभाव का सामना करना पड़ सकता है। परिवार का कहना है कि विवाद से बचने के उद्देश्य से उन्होंने भी उस समय साहिल को तस्वीर नहीं लगाने की सलाह दी थी।
मामले में 18 सितंबर को आयोजित परीक्षा से जुड़ी घटनाओं को भी महत्वपूर्ण बताया गया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि परीक्षा के दौरान निगरानी की जिम्मेदारी निभा रहे प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला ने साहिल के प्रति कथित तौर पर अपमानजनक और जातिसूचक टिप्पणियां की थीं। परिवार ने इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। विशेष अदालत में दाखिल आवेदन में यह सवाल भी उठाया गया है कि जांच लंबित रहने के दौरान संबंधित प्रोफेसर विदेश गए थे या नहीं। इसी आधार पर परिवार ने उनकी उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए लुक आउट सर्कुलर (LOC) जारी करने अथवा पासपोर्ट से संबंधित उचित कदम उठाने की मांग की है।
परिजनों ने मामले से जुड़े डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्यों को सुरक्षित रखने पर भी जोर दिया है। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया है कि IIT बॉम्बे परिसर में घटना वाले दिन के सभी सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखे जाएं। साथ ही उस समय मौजूद छात्रों और फैकल्टी सदस्यों पर किसी तरह का दबाव नहीं बनाया जाए, ताकि वे बिना किसी भय के जांच में अपना बयान दे सकें। इस मामले में परीक्षा की उत्तर पुस्तिका को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। अदालत में प्रस्तुत दस्तावेजों के मुताबिक, पुलिस की जांच में उत्तर पुस्तिका की एक शीट गायब होने की बात सामने आई थी। परिवार ने मूल उत्तर पुस्तिका को फॉरेंसिक जांच के लिए सुरक्षित रखने और संस्थान के डिजिटल रिकॉर्ड या स्कैन में गायब पन्ने की उपलब्धता की जांच कराने की मांग की है।
इसके अलावा परिवार ने आरोप लगाया है कि संस्थान से जुड़े कुछ सीसीटीवी फुटेज, निजी फोन बातचीत और कथित माफीनामे से संबंधित सामग्री मीडिया में लीक की गई। उनका दावा है कि चुनिंदा जानकारियां सार्वजनिक करके मामले को एकतरफा तरीके से पेश किया गया और साहिल की छवि प्रभावित करने की कोशिश हुई। फिलहाल साहिल वाकोडे की मौत का मामला न्यायिक प्रक्रिया के महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गया है। अब बॉम्बे हाईकोर्ट और विशेष अदालत में होने वाली सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं। परिवार की मांग है कि हर आरोप की निष्पक्ष जांच हो, सभी सबूत सुरक्षित रखे जाएं और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए। इस मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।