कांटे’ के निर्देशक संजय गुप्ता का निधन, 57 साल की उम्र में

घर पर गिरने से सिर में लगी गंभीर चोट, फिल्म निर्माता अशोक पंडित ने दी निधन की जानकारी; ‘कांटे’, ‘जिंदा’, ‘शूटआउट एट वडाला’ और ‘काबिल’ जैसी फिल्मों से बनाई थी खास पहचान।

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  • October 31, 2026 2:09 pm IST, Published 31 seconds ago

मुंबई: हिंदी सिनेमा जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। मशहूर फिल्म निर्देशक और निर्माता संजय गुप्ता का 30 अक्टूबर 2026 को निधन हो गया। वह 57 वर्ष के थे। उनके अचानक चले जाने की खबर से बॉलीवुड में शोक की लहर दौड़ गई है। संजय गुप्ता ने अपने फिल्मी करियर में कई ऐसी फिल्मों का निर्देशन किया, जिन्होंने दर्शकों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई। खासतौर पर क्राइम, एक्शन और गैंगस्टर ड्रामा फिल्मों को बड़े पर्दे पर एक अलग अंदाज में पेश करने के लिए उन्हें जाना जाता था।

फिल्म निर्माता एवं निर्देशक अशोक पंडित ने सोशल मीडिया के माध्यम से संजय गुप्ता के निधन की जानकारी साझा की। उन्होंने अपने संदेश में इस घटना को बेहद दुखद बताते हुए कहा कि संजय गुप्ता उनके करीबी मित्र और प्रतिभाशाली फिल्मकार थे। उनके अनुसार, घर पर गिरने के कारण संजय गुप्ता के सिर में चोट लगी थी, जिसके बाद उनका निधन हो गया। इस खबर ने फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कलाकारों, निर्देशकों और प्रशंसकों को स्तब्ध कर दिया है।

अचानक निधन से फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर

संजय गुप्ता के निधन की खबर 31 अक्टूबर की सुबह सामने आई। शुरुआती मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वह 30 अक्टूबर को अपने मुंबई स्थित आवास पर गिर गए थे। इस दुर्घटना में उनके सिर पर गंभीर चोट आई। घटना के बाद उनके निधन की जानकारी सामने आई।

उनके निधन की परिस्थितियों को लेकर शुरुआती रिपोर्टों में कुछ अंतर है। हालांकि, अशोक पंडित और फिल्मकार मिलाप जावेरी की ओर से उनके निधन की पुष्टि की गई है। दुर्घटना से संबंधित अन्य विस्तृत आधिकारिक जानकारियों का इंतजार है।

संजय गुप्ता के अचानक चले जाने से हिंदी फिल्म जगत ने एक ऐसे निर्देशक को खो दिया है, जिन्होंने अपनी अलग सिनेमाई शैली के माध्यम से दर्शकों के बीच मजबूत पहचान बनाई थी।

‘कांटे’ ने दिलाई अलग पहचान

संजय गुप्ता के निर्देशन में बनी फिल्म ‘कांटे’ उनके करियर की सबसे चर्चित फिल्मों में शामिल रही। वर्ष 2002 में रिलीज हुई इस फिल्म में अमिताभ बच्चन, संजय दत्त, सुनील शेट्टी, कुमार गौरव और महेश मांजरेकर जैसे कलाकार नजर आए थे।

फिल्म की कहानी, एक्शन, संवाद और प्रस्तुति ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। इस फिल्म ने संजय गुप्ता को हिंदी सिनेमा में एक अलग पहचान दिलाई। उन्होंने पारंपरिक कहानी कहने के तरीके से अलग हटकर अपराध की दुनिया, गैंगस्टर किरदारों और शहरी जीवन की जटिलताओं को पर्दे पर प्रस्तुत किया।

‘कांटे’ की सफलता के बाद संजय गुप्ता की पहचान एक ऐसे फिल्मकार के रूप में मजबूत हुई, जो बड़े सितारों के साथ दमदार एक्शन और रोमांच से भरपूर कहानियां प्रस्तुत करने की क्षमता रखते थे।

‘शूटआउट’ सीरीज से बनाई खास पहचान

संजय गुप्ता के करियर की एक और बड़ी उपलब्धि ‘शूटआउट एट लोखंडवाला’ रही। वर्ष 2007 में रिलीज हुई इस फिल्म में विवेक ओबेरॉय, संजय दत्त, अमिताभ बच्चन, सुनील शेट्टी और तुषार कपूर सहित कई कलाकारों ने महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई थीं।

यह फिल्म मुंबई के चर्चित लोखंडवाला शूटआउट की घटना से प्रेरित थी। फिल्म में पुलिस और अपराधियों के बीच मुठभेड़ को प्रभावशाली अंदाज में दिखाया गया था। इसके बाद वर्ष 2013 में उन्होंने ‘शूटआउट एट वडाला’ का निर्देशन किया। इस फिल्म में जॉन अब्राहम, अनिल कपूर, कंगना रनौत और तुषार कपूर जैसे कलाकार नजर आए।

इन फिल्मों के माध्यम से संजय गुप्ता ने मुंबई की अपराध की दुनिया और गैंगस्टर संस्कृति पर आधारित कहानियों को मुख्यधारा के दर्शकों तक पहुंचाया। उनकी फिल्मों में तेज रफ्तार घटनाक्रम, प्रभावशाली संवाद और एक्शन सीक्वेंस प्रमुख विशेषताएं रहे।

‘काबिल’ से साबित की निर्देशन की विविधता

संजय गुप्ता को केवल क्राइम और एक्शन फिल्मों तक सीमित नहीं माना जा सकता। वर्ष 2017 में रिलीज हुई फिल्म ‘काबिल’ ने उनके निर्देशन की एक अलग छवि प्रस्तुत की।

ऋतिक रोशन और यामी गौतम अभिनीत इस फिल्म की कहानी एक दृष्टिबाधित दंपती के जीवन, संघर्ष और न्याय की लड़ाई के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म को दर्शकों के बीच अच्छी प्रतिक्रिया मिली और इसने संजय गुप्ता की निर्देशन क्षमता के दूसरे पहलू को सामने रखा।

इस फिल्म के जरिए उन्होंने यह भी दिखाया कि वह केवल गैंगस्टर और अपराध आधारित कहानियां ही नहीं, बल्कि भावनात्मक विषयों को भी प्रभावी तरीके से पर्दे पर उतार सकते हैं।

‘आतिश’ से शुरू हुआ था फिल्मी सफर

संजय गुप्ता ने वर्ष 1994 में फिल्म ‘आतिश: फील द फायर’ से निर्देशन की दुनिया में कदम रखा था। इस फिल्म में संजय दत्त और आदित्य पंचोली जैसे कलाकार नजर आए थे। शुरुआती दौर से ही उनकी फिल्मों में एक्शन और अपराध की दुनिया का प्रभाव दिखाई देने लगा था।

इसके बाद उन्होंने ‘राम शास्त्र’, ‘खौफ’, ‘जंग’, ‘हमेशा’, ‘मुसाफिर’ और ‘जिंदा’ जैसी फिल्मों का निर्देशन किया। वर्ष 2007 में आई ‘दस कहानियां’ भी उनके महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स में शामिल रही।

संजय गुप्ता की फिल्मोग्राफी में ‘एसिड फैक्ट्री’, ‘जज्बा’ और ‘मुंबई सागा’ जैसी फिल्में भी शामिल हैं। इन फिल्मों के जरिए उन्होंने अलग-अलग विषयों और कलाकारों के साथ काम किया।

निर्माता के रूप में भी छोड़ी छाप

निर्देशन के साथ-साथ संजय गुप्ता ने फिल्म निर्माण के क्षेत्र में भी अपनी सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने वर्ष 2001 में व्हाइट फेदर फिल्म्स नाम से अपना प्रोडक्शन हाउस स्थापित किया था।

इस बैनर के माध्यम से उन्होंने कई फिल्मों के निर्माण और प्रस्तुति में योगदान दिया। एक निर्देशक के रूप में जहां उनकी पहचान एक्शन और क्राइम फिल्मों से बनी, वहीं निर्माता के तौर पर उन्होंने नए प्रोजेक्ट्स और अलग-अलग विषयों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया।

उनकी फिल्मों में कहानी के साथ-साथ तकनीकी प्रस्तुति, संगीत, सिनेमैटोग्राफी और एक्शन पर भी विशेष ध्यान दिया जाता था। यही वजह रही कि उनकी फिल्मों की एक अलग शैली विकसित हुई।

आखिरी फिल्मों में ‘द मिरांडा ब्रदर्स’ शामिल

संजय गुप्ता के हालिया निर्देशकीय प्रोजेक्ट्स में ‘द मिरांडा ब्रदर्स’ का नाम भी शामिल है। वर्ष 2024 में रिलीज हुई इस फिल्म में मीजान जाफरी और हर्षवर्धन राणे नजर आए थे। इसके अलावा ‘विस्फोट’ जैसी फिल्म से भी उनका जुड़ाव रहा।

तीन दशक से अधिक लंबे फिल्मी सफर में उन्होंने कई बड़े कलाकारों के साथ काम किया। संजय दत्त, जॉन अब्राहम और ऋतिक रोशन जैसे सितारों के साथ उनकी फिल्मों ने दर्शकों के बीच लोकप्रियता हासिल की।

बॉलीवुड ने खोया एक अलग अंदाज वाला फिल्मकार

संजय गुप्ता का निधन हिंदी सिनेमा के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है। उन्होंने अपनी फिल्मों के माध्यम से एक ऐसी शैली विकसित की, जिसमें अपराध की दुनिया, दमदार किरदार, एक्शन और भावनात्मक संघर्ष का मिश्रण देखने को मिलता था।

उनके जाने से फिल्म जगत में एक ऐसी रचनात्मक आवाज का अंत हुआ है, जिसने कई यादगार फिल्मों के जरिए दर्शकों का मनोरंजन किया। उनके निर्देशन में बनी ‘कांटे’, ‘जिंदा’, ‘शूटआउट एट लोखंडवाला’, ‘शूटआउट एट वडाला’ और ‘काबिल’ जैसी फिल्में लंबे समय तक दर्शकों के बीच याद की जाती रहेंगी।

फिल्मी दुनिया में उनके योगदान को याद करते हुए प्रशंसक और सहयोगी उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं। संजय गुप्ता भले ही अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके निर्देशन में बनी फिल्में हिंदी सिनेमा में उनकी पहचान को हमेशा जीवित रखेंगी।

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