बरेली में वोटर लिस्ट विवाद: 40 नाम कटने पर BLO निलंबित

बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले से मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी का एक गंभीर मामला सामने आया है। शेरगढ़ ब्लॉक की ग्राम पंचायत मोहम्मदपुर में 40 मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाने के आरोप के बाद प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। मामले में सहायक अध्यापक एवं बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) नफीस […]

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  • November 6, 2026 4:00 pm IST, Published 33 minutes ago

बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले से मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी का एक गंभीर मामला सामने आया है। शेरगढ़ ब्लॉक की ग्राम पंचायत मोहम्मदपुर में 40 मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाने के आरोप के बाद प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। मामले में सहायक अध्यापक एवं बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) नफीस अहमद को निलंबित कर दिया गया है। आरोप है कि उन्होंने कथित रूप से द्वेषपूर्ण तरीके से हिंदू परिवारों के मतदाताओं के नाम सूची से हटाए। शिकायत मिलने के बाद प्रशासन ने मामले की जांच कराई, जिसमें मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं की बात सामने आई। अब प्रभावित मतदाताओं के नाम दोबारा जुड़वाने की प्रक्रिया शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई है।

तीन महीने पहले शुरू हुआ था पूरा मामला

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मोहम्मदपुर गांव के ग्राम प्रशासक राहुल गंगवार ने इस मामले की शुरुआत में चार परिचित लोगों के नए वोट बनवाने के लिए बीएलओ से संपर्क किया था। बताया गया कि करीब तीन महीने पहले नफीस अहमद को नए मतदाता पहचान पत्र बनवाने से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए गए थे। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि निर्धारित प्रक्रिया के तहत उनके परिवार के सदस्यों के नाम मतदाता सूची में शामिल हो जाएंगे।

हालांकि, अक्टूबर के पहले सप्ताह तक जब नए वोट बनने की स्थिति के बारे में जानकारी मांगी गई तो उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद ग्रामीणों ने ऑनलाइन माध्यम से अपनी EPIC ID के जरिए मतदाता सूची की जांच की। जांच के दौरान पता चला कि जिन चार लोगों के नए वोट बनवाने के लिए दस्तावेज दिए गए थे, उनके नाम सूची में शामिल नहीं हुए। इसके अतिरिक्त परिवार के लगभग 40 अन्य सदस्यों के नाम भी मतदाता सूची से हटाए जाने की जानकारी सामने आई।

इस जानकारी के बाद ग्रामीणों में नाराजगी फैल गई। उनका आरोप था कि मतदाता सूची में जानबूझकर गड़बड़ी की गई है और पात्र लोगों को मतदान के अधिकार से वंचित करने की कोशिश हुई है।

प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत के बाद भी नहीं हुई सुनवाई

ग्राम प्रशासक राहुल गंगवार के मुताबिक, मतदाता सूची में गड़बड़ी की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को पूरे मामले से अवगत कराया था। उनका कहना था कि प्रभावित परिवारों के पास मतदाता पहचान से जुड़े दस्तावेज मौजूद थे, इसके बावजूद उनके नाम सूची से हटाए जाने की जानकारी मिली।

ग्रामीणों ने इस मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित अधिकारियों से निष्पक्ष जांच कराने और हटाए गए नामों को दोबारा मतदाता सूची में शामिल कराने की मांग की। शुरुआती स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए उन्होंने शिकायत को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया।

मामले में शिकायतकर्ताओं ने यह भी सवाल उठाया कि यदि किसी मतदाता का नाम सूची से हटाया जाता है तो उसके पीछे निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन होना चाहिए। किसी भी पात्र नागरिक का नाम बिना उचित आधार के हटाया जाना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।

मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर पहुंची शिकायत

स्थानीय स्तर पर शिकायत के बाद भी समाधान नहीं मिलने पर ग्राम प्रशासक की ओर से मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई गई। इस शिकायत के बाद मामला प्रशासन के संज्ञान में आया और संबंधित अधिकारियों को इसकी जांच करने के निर्देश दिए गए।

प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उपलब्ध दस्तावेजों और मतदाता सूची से संबंधित रिकॉर्ड की जांच कराई। जांच के दौरान यह पता लगाने का प्रयास किया गया कि संबंधित मतदाताओं के नाम किस आधार पर हटाए गए और इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया था या नहीं।

जांच में सामने आई अनियमितताओं के बाद संबंधित बीएलओ के विरुद्ध कार्रवाई की गई। दैनिक जागरण की 6 नवंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, मामले में 40 मतदाताओं के नाम हटाए जाने की पुष्टि के बाद नफीस अहमद को निलंबित किया गया है।

जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने लिया मामले का संज्ञान

मामले में बरेली के जिलाधिकारी अविनाश सिंह की ओर से भी प्रशासनिक कार्रवाई की गई। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर संबंधित कर्मचारी के निलंबन की कार्रवाई की जानकारी सामने आई है।

नफीस अहमद कंपोजिट विद्यालय मोहम्मदपुर में सहायक अध्यापक के पद पर तैनात थे। इसके साथ ही उन्हें बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी। बीएलओ का काम मतदाता सूची को अद्यतन रखने, नए मतदाताओं का पंजीकरण कराने और मतदाता संबंधी आवश्यक प्रक्रियाओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण होता है।

ऐसे में मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने का मामला सामने आने के बाद उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हुए। रिपोर्ट के मुताबिक, बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) की ओर से भी इस संबंध में आवश्यक विभागीय पत्राचार किया गया है।

पहले 26 और अब 40 नामों का मामला चर्चा में

इस प्रकरण में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि 4 और 5 नवंबर को प्रकाशित कुछ मीडिया रिपोर्टों में 26 मतदाताओं के नाम हटाए जाने का उल्लेख किया गया था। इन रिपोर्टों के अनुसार, तीन सदस्यीय जांच समिति ने प्रारंभिक जांच में अनियमितताएं पाई थीं और बीएसए ने नफीस मोहम्मद खान को निलंबित किया था।

वहीं, 6 नवंबर को प्रकाशित रिपोर्ट में 40 मतदाताओं के नाम हटाए जाने की जानकारी दी गई है। इस प्रकार अलग-अलग रिपोर्टों में प्रभावित मतदाताओं की संख्या को लेकर अंतर दिखाई देता है। इसलिए अंतिम संख्या का निर्धारण संबंधित प्रशासनिक रिकॉर्ड और विस्तृत जांच रिपोर्ट के आधार पर ही किया जाना उचित होगा।

प्रभावित मतदाताओं के नाम दोबारा जुड़वाने की प्रक्रिया शुरू

प्रशासनिक कार्रवाई के बाद अब उन लोगों के नाम दोबारा मतदाता सूची में शामिल कराने की प्रक्रिया शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई है, जिनके नाम हटाए जाने की शिकायत की गई थी।

यह प्रक्रिया प्रभावित परिवारों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि मतदाता सूची में नाम नहीं होने की स्थिति में पात्र नागरिक आगामी चुनाव में अपने मताधिकार का इस्तेमाल नहीं कर सकते। ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी है कि सभी पात्र मतदाताओं के दस्तावेजों का सत्यापन करते हुए नियमानुसार उनके नाम सूची में शामिल किए जाएं।

ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ उनके परिवारों के सभी पात्र सदस्यों के नाम भी मतदाता सूची में दोबारा दर्ज किए जाएंगे। इसके लिए आवश्यक दस्तावेज और पहचान संबंधी प्रमाण उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

मतदाता सूची की पारदर्शिता पर फिर उठे सवाल

बरेली का यह मामला एक बार फिर मतदाता सूची तैयार करने और उसमें संशोधन की प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर चर्चा का विषय बन गया है। लोकतंत्र में मतदान का अधिकार प्रत्येक पात्र नागरिक के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। मतदाता सूची में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता सीधे नागरिकों के संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों को प्रभावित कर सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने या संशोधित करने की प्रत्येक प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत होनी चाहिए। किसी भी मतदाता का नाम हटाने से पहले आवश्यक दस्तावेजों, कारणों और निर्धारित प्रक्रिया का उचित सत्यापन जरूरी है।

इस मामले से प्रशासनिक अधिकारियों के सामने भी यह चुनौती सामने आई है कि भविष्य में ऐसी शिकायतों की समय रहते जांच हो और पात्र मतदाताओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

फिलहाल मोहम्मदपुर गांव का यह मामला बरेली जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। बीएलओ के निलंबन के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल प्रभावित मतदाताओं के नाम दोबारा सूची में शामिल कराने और पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच का है। प्रशासनिक कार्रवाई के साथ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा कि भविष्य में किसी भी पात्र नागरिक को मतदाता सूची से जुड़ी अनियमितता के कारण अपने मताधिकार से वंचित न होना पड़े।

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