नई दिल्ली। केंद्र सरकार के विशेष स्वच्छता अभियान में इस बार सफाई के साथ-साथ कबाड़ के निपटान से कमाई के मामले में भी नया रिकॉर्ड बना है। दो से 31 अक्टूबर तक देशभर में चलाए गए विशेष अभियान 6.0 के दौरान सरकारी विभागों ने पुराने कबाड़ और ई-कचरे को बेचकर कुल 970.33 करोड़ रुपये की कमाई की। इसमें सबसे बड़ा योगदान रेलवे का रहा, जिसने अकेले 618.06 करोड़ रुपये जुटाए। अभियान के दौरान लाखों सरकारी कार्यालयों और अन्य स्थानों पर सफाई की गई तथा बड़ी संख्या में पुरानी फाइलों और अनुपयोगी सामान का निपटारा किया गया।
केंद्र सरकार के कार्मिक मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 2021 में वार्षिक विशेष स्वच्छता अभियान की शुरुआत के बाद इस बार कई मामलों में अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज किया गया है। अभियान के दौरान कबाड़ और ई-कचरे के निपटान से हुई 970.33 करोड़ रुपये की कमाई पिछले अभियान के मुकाबले करीब 16 प्रतिशत अधिक है।
विभागों के प्रदर्शन की बात करें तो रेलवे बोर्ड पहले स्थान पर रहा। रेलवे ने कबाड़ बेचकर 618.06 करोड़ रुपये की कमाई की। इसके बाद रक्षा मंत्रालय के सैन्य मामलों के विभाग ने 88.96 करोड़ रुपये और कोयला मंत्रालय ने 61.41 करोड़ रुपये जुटाए। वहीं, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय को कबाड़ के निपटान से 34.81 करोड़ रुपये की आय हुई।
अभियान के दौरान केवल पुराने लोहे, मशीनों और अनुपयोगी सामान को ही नहीं बेचा गया, बल्कि ई-कचरे के निपटान पर भी विशेष ध्यान दिया गया। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और अन्य अनुपयोगी सामग्री के निपटान से सरकार को करीब 50 करोड़ रुपये मिले।
इस पहल का उद्देश्य सरकारी कार्यालयों में जमा अनुपयोगी सामान को हटाना, संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करना और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले कचरे का उचित निपटान सुनिश्चित करना रहा।
विशेष स्वच्छता अभियान 6.0 के दौरान देशभर में कुल 19,88,826 स्थानों पर सफाई की गई। यह आंकड़ा पिछले वर्ष के 11,59,783 स्थानों के मुकाबले करीब 71 प्रतिशत अधिक है। इससे अभियान के दायरे में हुई बढ़ोतरी का अंदाजा लगाया जा सकता है।
सरकारी कार्यालयों में सफाई और कबाड़ हटाने के बाद 277.82 लाख वर्ग फीट जगह खाली कराई गई। यह पिछले अभियान की तुलना में लगभग 19 प्रतिशत अधिक है। जगह खाली कराने के मामले में कोयला मंत्रालय सबसे आगे रहा, जिसने 1.48 करोड़ वर्ग फीट क्षेत्र को खाली कराया।
अभियान के दौरान सरकारी कामकाज को अधिक व्यवस्थित और सरल बनाने के लिए पुरानी फाइलों की भी समीक्षा की गई। इस दौरान 26,79,875 भौतिक फाइलों की जांच की गई, जिनमें से 15,76,828 फाइलों को हटाया गया।
इसके अलावा 9,58,864 ई-फाइलों की समीक्षा की गई और 7,01,723 ई-फाइलों को बंद किया गया। सरकार का उद्देश्य अनावश्यक दस्तावेजों का बोझ कम करना और कार्यालयों में कामकाज की व्यवस्था को बेहतर बनाना रहा।
विशेष अभियान के दौरान आम लोगों की समस्याओं के समाधान पर भी ध्यान दिया गया। सरकारी विभागों ने कुल 9,99,168 जन शिकायतों का निपटारा किया। इसके साथ ही 40,878 अपीलों पर भी कार्रवाई की गई।
स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने 7.01 लाख से अधिक स्थानों पर सफाई अभियान चलाकर पहला स्थान हासिल किया। वहीं, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 6.52 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों और अन्य संस्थानों में स्वच्छता अभियान संचालित किया।
विशेष स्वच्छता अभियान 6.0 के आंकड़े बताते हैं कि सरकारी विभागों में सफाई के साथ अनुपयोगी संसाधनों के निपटान को भी प्राथमिकता दी जा रही है। कबाड़ बेचकर मिली 970 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सरकारी संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल की एक बड़ी उपलब्धि है।
हालांकि, इस अभियान की असली सफलता केवल कबाड़ से हुई कमाई तक सीमित नहीं होनी चाहिए। सरकारी कार्यालयों में नियमित सफाई, कचरे का वैज्ञानिक निपटान और खाली कराई गई जगहों का उपयोग सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है। तभी स्वच्छता अभियान का उद्देश्य लंबे समय तक प्रभावी रूप से पूरा हो सकेगा।