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आईपीएल खेलने के लिए अदालत पहुंचे नुवान तुषारा, श्रीलंका बोर्ड से टकराव ने पकड़ा तूल

आईपीएल 2026 की शुरुआत से पहले ही एक बड़ा विवाद सामने आ गया है, जिसमें श्रीलंका के तेज गेंदबाज Nuwan Thushara और Sri Lanka Cricket आमने-सामने आ गए हैं। मामला इतना बढ़ गया कि खिलाड़ी को कोर्ट का सहारा लेना पड़ा। यह विवाद अब क्रिकेट जगत में चर्चा का विषय बन चुका है। दरअसल, तुषारा […]

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inkhbar News
  • April 3, 2026 2:29 pm IST, Updated 2 weeks ago

आईपीएल 2026 की शुरुआत से पहले ही एक बड़ा विवाद सामने आ गया है, जिसमें श्रीलंका के तेज गेंदबाज Nuwan Thushara और Sri Lanka Cricket आमने-सामने आ गए हैं। मामला इतना बढ़ गया कि खिलाड़ी को कोर्ट का सहारा लेना पड़ा। यह विवाद अब क्रिकेट जगत में चर्चा का विषय बन चुका है।

दरअसल, तुषारा Indian Premier League 2026 में Royal Challengers Bengaluru (RCB) के लिए खेलना चाहते हैं, लेकिन श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड ने उन्हें ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (NOC) देने से इनकार कर दिया। बोर्ड का कहना है कि खिलाड़ी फिटनेस टेस्ट में असफल रहे हैं, इसलिए उन्हें विदेशी लीग में खेलने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

क्या है पूरा मामला?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, आईपीएल 2026 शुरू होने से पहले तुषारा को अनिवार्य फिटनेस टेस्ट देना था, जिसमें वह पास नहीं हो पाए। इसी आधार पर श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड ने उनका NOC रोक दिया। लेकिन तुषारा का मानना है कि यह फैसला उनके करियर के साथ अन्याय है।

इसी के चलते उन्होंने कोलंबो की जिला अदालत में याचिका दायर की है। इस याचिका में उन्होंने कोर्ट से मांग की है कि बोर्ड को उन्हें NOC जारी करने का निर्देश दिया जाए, ताकि वह आईपीएल में हिस्सा ले सकें। इस मामले की अगली सुनवाई 9 अप्रैल को तय की गई है।

आरसीबी के लिए अहम खिलाड़ी

तुषारा Royal Challengers Bengaluru के लिए एक महत्वपूर्ण गेंदबाज माने जाते हैं। उन्हें IPL 2025 के मेगा ऑक्शन में 1.6 करोड़ रुपये में खरीदा गया था। इतना ही नहीं, वह उस सीजन में टीम के लिए उपयोगी साबित हुए थे और टीम की सफलता में उनका योगदान भी अहम रहा।

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फ्रेंचाइजी ने उनके प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें IPL 2026 के लिए भी रिटेन किया है। ऐसे में टीम प्रबंधन भी चाहेगा कि यह विवाद जल्द से जल्द खत्म हो और खिलाड़ी मैदान पर वापसी करे।

इंटरनेशनल क्रिकेट छोड़ने की तैयारी?

इस पूरे विवाद के बीच एक और बड़ा पहलू सामने आया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, तुषारा का श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड के साथ सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट 31 मार्च को समाप्त हो चुका है। बताया जा रहा है कि वह इस कॉन्ट्रैक्ट को आगे बढ़ाने के इच्छुक नहीं हैं।

इतना ही नहीं, उन्होंने बोर्ड को यह संकेत भी दिया है कि वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने पर विचार कर रहे हैं। यदि ऐसा होता है, तो यह श्रीलंका क्रिकेट के लिए एक बड़ा झटका हो सकता है।

हालांकि, अभी इस पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन अगर तुषारा इंटरनेशनल क्रिकेट छोड़ते हैं, तो वह पूरी तरह से फ्रेंचाइजी क्रिकेट पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।

खिलाड़ी बनाम बोर्ड – पुरानी कहानी

क्रिकेट में यह पहली बार नहीं है जब किसी खिलाड़ी और बोर्ड के बीच इस तरह का टकराव देखने को मिला हो। कई बार खिलाड़ी विदेशी लीग में खेलने के लिए बोर्ड की शर्तों से असहमत होते हैं।

श्रीलंका क्रिकेट में भी पहले ऐसे विवाद सामने आ चुके हैं, जहां खिलाड़ियों ने बोर्ड के फैसलों पर सवाल उठाए हैं। लेकिन इस बार मामला कोर्ट तक पहुंच गया है, जो इसे और गंभीर बना देता है।

फिटनेस या नीति?

इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह वास्तव में फिटनेस का मुद्दा है या फिर बोर्ड की सख्त नीति का परिणाम। कई विशेषज्ञ मानते हैं कि बोर्ड खिलाड़ियों को अनुशासन में रखने के लिए ऐसे फैसले लेता है, जबकि कुछ का मानना है कि खिलाड़ियों को अपने करियर के फैसले लेने की स्वतंत्रता होनी चाहिए।

अगर कोर्ट तुषारा के पक्ष में फैसला सुनाता है, तो यह भविष्य में अन्य खिलाड़ियों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है। वहीं, अगर बोर्ड का फैसला बरकरार रहता है, तो खिलाड़ियों के लिए विदेशी लीग में खेलना और कठिन हो सकता है।

आगे क्या?

अब सभी की नजरें 9 अप्रैल की सुनवाई पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि कोर्ट इस मामले में क्या फैसला सुनाता है। क्या तुषारा को आईपीएल खेलने की अनुमति मिलेगी या फिर उन्हें बोर्ड के फैसले का पालन करना होगा?

यह मामला सिर्फ एक खिलाड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्रिकेट की बदलती दुनिया और खिलाड़ियों की प्राथमिकताओं को भी दर्शाता है। आज के दौर में फ्रेंचाइजी क्रिकेट का महत्व तेजी से बढ़ रहा है, और खिलाड़ी भी इसे नजरअंदाज नहीं कर सकते।

निष्कर्ष

नुवान तुषारा और श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड के बीच यह विवाद आने वाले समय में बड़ा मोड़ ले सकता है। यह न केवल एक खिलाड़ी के करियर को प्रभावित करेगा, बल्कि क्रिकेट प्रशासन और खिलाड़ियों के रिश्तों पर भी असर डाल सकता है।

अब देखना यह है कि अदालत का फैसला किसके पक्ष में जाता है—खिलाड़ी की स्वतंत्रता या बोर्ड का अनुशासन। फिलहाल, क्रिकेट फैंस इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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