गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने मतदाता सूची पुनरीक्षण और चुनावी प्रक्रिया की निगरानी के लिए सुभ्रता गुप्ता को विशेष जिम्मेदारी सौंपी थी। अब सरकार बनने के बाद उन्हें मुख्यमंत्री कार्यालय में अहम भूमिका दी गई है।
राजनीतिक गलियारों में इस नियुक्ति को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विपक्ष इस फैसले पर सवाल उठा सकता है, जबकि सरकार इसे प्रशासनिक अनुभव और चुनावी प्रबंधन क्षमता के आधार पर लिया गया निर्णय बता रही है।