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सपनों को हकीकत में बदल सकते हैं मॉडल सीएलएफ – प्रवीणानंद, संयुक्त मिशन निदेशक

लखनऊ : जब ग्रामीण महिलाओं के सपनों को सही मार्गदर्शन, विश्वास और सामूहिक शक्ति मिलती है, तब केवल संगठन नहीं, बल्कि पूरे समाज के भविष्य का निर्माण होता है। इसी सोच को साकार करने की दिशा में उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत गठित मॉडल संकुल स्तरीय संघों को आत्मनिर्भर, दूरदर्शी एवं मजबूत […]

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  • May 10, 2026 10:34 pm IST, Published 5 days ago

लखनऊ : जब ग्रामीण महिलाओं के सपनों को सही मार्गदर्शन, विश्वास और सामूहिक शक्ति मिलती है, तब केवल संगठन नहीं, बल्कि पूरे समाज के भविष्य का निर्माण होता है। इसी सोच को साकार करने की दिशा में उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत गठित मॉडल संकुल स्तरीय संघों को आत्मनिर्भर, दूरदर्शी एवं मजबूत बनाने हेतु दीन दयाल उपाध्याय राज्य ग्राम्य विकास संस्थान, बख्शी का तालाब में 04 से 09 मई, 2026 तक छह दिवसीय आवासीय प्री-विजनिंग वर्कशॉप का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण श्रीमती दीपा रंजन, मिशन निदेशक, उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के निर्देशन में आयोजित था।

यह केवल एक कार्यशाला नहीं थी, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और भविष्य निर्माण की सोच को नई ऊर्जा देने वाला एक प्रेरणादायी अभियान सिद्ध हुआ। प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए जिला रिसोर्स पर्सन (DRP) प्रशिक्षुओं ने इसमें सहभागिता की।

प्रवीणानंद, संयुक्त मिशन निदेशक ने बताया कि मॉडल सीएलएफ अपने सपनों और योजनाओं को वास्तविकता में बदल सकते हैं। चुनौतियों के बीच भी आत्मनिर्भरता की राह बनाई जा सकती है। इसके गुर प्रशिक्षण में सिखाए गए हैं। जब महिलाओं को अवसर, मार्गदर्शन और विश्वास मिलता है, तब वे केवल अपने परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र के भविष्य को नई दिशा देने की क्षमता रखती हैं।

नेशनल रिसोर्स पर्सन देवाशीष मंडल ने अत्यंत सरल, भावनात्मक एवं व्यवहारिक शैली में प्रशिक्षण प्रदान किया। उन्होंने छोटे-छोटे जीवन्त उदाहरणों के माध्यम से यह बताया कि परिवर्तन किसी बड़े संसाधन से नहीं, बल्कि सही सोच, सामूहिक प्रयास और मजबूत संकल्प से आता है। उनकी संवाद शैली ने प्रतिभागियों के भीतर नई सोच, नई प्रेरणा और अपने दायित्वों के प्रति गहरी प्रतिबद्धता का भाव जागृत किया।

इस अवसर पर डॉ. नन्दकिशोर साह ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज का यह प्रशिक्षण आने वाले समय में हजारों ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का आधार बनेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रशिक्षित डीआरपी अपने-अपने जनपदों में जाकर मॉडल सीएलएफ एवं ग्राम संगठनों को विजनिंग आधारित प्रशिक्षण प्रदान करेंगे, जिससे महिलाएं केवल योजनाओं की सहभागी नहीं, बल्कि अपने परिवार और समाज के विकास की निर्णायक नेतृत्वकर्ता बन सकेंगी।

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समापन सत्र में संस्थान के अधिकारियों एवं प्रशिक्षकों की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस दौरान डॉ. विनीता रावत, श्री अमितेश, मोरिश कुमार, अनुपम पाण्डेय, अनीता पाण्डेय, हसीब उर रहमान, बैजनाथ राम सहित 29 रिसोर्स पर्सन ने प्रतिभाग किया। प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए।

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