ऑर्गेनिक खेती का बढ़ता महत्व: सेहत और मुनाफे का संतुलन

आज के समय में लोगों की जीवनशैली में तेजी से बदलाव आ रहा है और इसके साथ ही स्वस्थ भोजन की मांग भी बढ़ रही है। इसी कारण ऑर्गेनिक खेती (जैविक खेती) का महत्व दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। यह खेती का ऐसा तरीका है जिसमें रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग नहीं किया जाता। […]

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Gauravshali Bharat
inkhbar News
  • April 13, 2026 12:47 pm IST, Updated 2 days ago

आज के समय में लोगों की जीवनशैली में तेजी से बदलाव आ रहा है और इसके साथ ही स्वस्थ भोजन की मांग भी बढ़ रही है। इसी कारण ऑर्गेनिक खेती (जैविक खेती) का महत्व दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। यह खेती का ऐसा तरीका है जिसमें रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग नहीं किया जाता।

ऑर्गेनिक खेती में प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग किया जाता है, जैसे गोबर की खाद, कंपोस्ट, वर्मी-कंपोस्ट और जैविक कीटनाशक। इससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और पर्यावरण को भी नुकसान नहीं होता। साथ ही, इससे उत्पन्न फसल स्वास्थ्य के लिए अधिक सुरक्षित होती है।

आज के उपभोक्ता भी केमिकल फ्री उत्पादों की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। बाजार में ऑर्गेनिक उत्पादों की कीमत सामान्य उत्पादों से अधिक होती है, जिससे किसानों को अच्छा मुनाफा मिल सकता है। यही कारण है कि कई किसान अब पारंपरिक खेती छोड़कर जैविक खेती की ओर बढ़ रहे हैं।

सरकार भी ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही है। किसानों को प्रशिक्षण, प्रमाणन (Certification) और मार्केटिंग में सहायता दी जा रही है। इसके अलावा, कई निजी कंपनियां भी ऑर्गेनिक उत्पादों की खरीद के लिए किसानों से सीधे संपर्क कर रही हैं।

हालांकि, ऑर्गेनिक खेती में शुरुआत में उत्पादन थोड़ा कम हो सकता है और इसे पूरी तरह अपनाने में समय लगता है। लेकिन लंबे समय में यह अधिक लाभदायक और टिकाऊ साबित होती है।

अंत में, ऑर्गेनिक खेती केवल एक खेती का तरीका नहीं है, बल्कि यह एक स्वस्थ जीवनशैली की दिशा में एक कदम है। यह किसानों, उपभोक्ताओं और पर्यावरण तीनों के लिए फायदेमंद है।

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