• होम
  • उत्तर प्रदेश
  • अग्निकांड, ओलावृष्टि और अतिवृष्टि से फसल नुक़सान पर राहत, सीएम के निर्देश पर फील्ड में सक्रिय प्रशासन

अग्निकांड, ओलावृष्टि और अतिवृष्टि से फसल नुक़सान पर राहत, सीएम के निर्देश पर फील्ड में सक्रिय प्रशासन

लखनऊ :  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर उत्तर प्रदेश सरकार ने हालिया खराब मौसम, आंधी, अग्निकांड, ओलावृष्टि और अतिवृष्टि से प्रभावित किसानों को राहत पहुंचाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। प्रशासन को फील्ड में सक्रिय रहते हुए त्वरित आकलन और सहायता वितरण के निर्देश दिए गए हैं, ताकि कोई भी प्रभावित किसान सहायता […]

Advertisement
Gauravshali Bharat
Gauravshali Bharat News
  • April 30, 2026 9:09 pm IST, Published 2 hours ago

लखनऊ :  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर उत्तर प्रदेश सरकार ने हालिया खराब मौसम, आंधी, अग्निकांड, ओलावृष्टि और अतिवृष्टि से प्रभावित किसानों को राहत पहुंचाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। प्रशासन को फील्ड में सक्रिय रहते हुए त्वरित आकलन और सहायता वितरण के निर्देश दिए गए हैं, ताकि कोई भी प्रभावित किसान सहायता से वंचित न रह जाए।
इस साल 2026-27 में अग्निकांड की घटनाओं से बाराबंकी, बलिया, बांदा, महराजगंज, मथुरा, पीलीभीत, रामपुर और सोनभद्र सहित 8 जनपदों में कुल 111.134 हेक्टेयर फसल क्षति दर्ज की गई है। इसके सापेक्ष 668 प्रभावित किसानों में से 51 किसानों को अब तक ₹1,81,963 की राहत राशि वितरित की जा चुकी है। वहीं ओलावृष्टि से मथुरा, जालौन, हरदोई, बुलंदशहर, औरैया, संभल, शाहजहांपुर, आगरा, अलीगढ़, कन्नौज, ललितपुर, सहारनपुर और उन्नाव सहित 13 जनपदों में 38,369.72 हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई है। इस आपदा से प्रभावित 1,07,104 किसानों में से 23,983 किसानों को ₹14,92,60,448 की सहायता राशि प्रदान की जा चुकी है।
इसके अलावा अतिवृष्टि के कारण कानपुर देहात, शाहजहांपुर, रामपुर, जालौन, बुलंदशहर, गोंडा, मथुरा, पीलीभीत और सहारनपुर सहित 9 जनपदों में 1,358.678 हेक्टेयर फसल क्षति दर्ज की गई है। यहां 3,920 प्रभावित किसानों में से 1,849 किसानों को ₹1,09,87,132 की राहत राशि वितरित की गई है।
राज्य सरकार द्वारा फसल क्षति का आकलन तेजी से कराया जा रहा है और शेष प्रभावित किसानों को भी शीघ्र सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासनिक स्तर पर लगातार निगरानी सुनिश्चित की जा रही है, जिससे किसानों को समयबद्ध राहत मिल सके और वे आगामी फसल की तैयारी बिना बाधा कर सकें।

Advertisement