नोएडा: दिव्यांग और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण तथा उनके अधिकारों को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत की। पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने ‘ऑपरेशन अपराजेय’ नामक विशेष अभियान का शुभारंभ करते हुए कहा कि यह अभियान समाज के सबसे संवेदनशील वर्गों में शामिल बच्चों की सुरक्षा और कल्याण को प्राथमिकता देने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधिकारियों ने बताया कि अभियान के प्रथम चरण में कमिश्नरेट क्षेत्र के 1645 विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान की जा चुकी है। इन बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और समुचित देखभाल सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक कार्ययोजना लागू की जा रही है। इसके तहत प्रत्येक थाने में संचालित मिशन शक्ति केंद्रों के माध्यम से बच्चों, उनके अभिभावकों और देखभाल करने वालों का विवरण गोपनीय रूप से संकलित किया जाएगा।
अभियान के तहत महिला बीट अधिकारियों को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है। वे प्रत्येक 15 दिन में बच्चों के परिवारों और केयर टेकर से संपर्क कर उनकी आवश्यकताओं, स्वास्थ्य स्थिति और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों की जानकारी लेंगी। किसी भी आवश्यकता या समस्या की स्थिति में संबंधित बच्चों को स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य आवश्यक सहायता से जोड़ा जाएगा।
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि बच्चों और उनके अभिभावकों को डायल-112 तथा चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 जैसी आपातकालीन सेवाओं के बारे में भी जागरूक किया जाएगा। इसके अलावा दिव्यांग बच्चों की देखभाल कर रहे केयर टेकर का रिकॉर्ड रखा जाएगा और नियमित चरित्र सत्यापन जैसी प्रक्रियाएं भी अपनाई जाएंगी, ताकि बच्चों की सुरक्षा और गरिमा से किसी प्रकार का समझौता न हो।
अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए ‘नेबरहुड सिक्योरिटी प्लान’ तैयार किया जा रहा है, जिसके माध्यम से समुदाय आधारित सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। साथ ही पुलिस कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण देने के लिए स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों का सहयोग लिया जा रहा है।
दिव्यांग बच्चों और उनके परिवारों की सहायता के लिए पुलिस कमिश्नरेट ने हेल्पलाइन नंबर 8595902539 भी जारी किया है। इस नंबर पर संपर्क कर शिकायत, परामर्श या सहायता प्राप्त की जा सकती है।
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि ‘ऑपरेशन अपराजेय’ केवल एक अभियान नहीं, बल्कि दिव्यांग बच्चों के सम्मानजनक, सुरक्षित और बेहतर भविष्य की दिशा में एक संवेदनशील और समर्पित प्रयास है, जो उनके अधिकारों की रक्षा और समग्र विकास को नई मजबूती प्रदान करेगा।