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LPG सिलेंडर डिलीवरी में नया नियम: DAC के बिना नहीं मिलेगी गैस, जानिए असली और फर्जी मैसेज की पहचान

नई दिल्ली : घरेलू एलपीजी सिलेंडर की डिलीवरी को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए तेल कंपनियों ने अब DAC यानी Delivery Authentication Code सिस्टम को अनिवार्य कर दिया है। इंडेन, भारत गैस और एचपी गैस जैसी कंपनियां ग्राहकों को सिलेंडर की डिलीवरी से पहले मोबाइल पर एक विशेष कोड भेज रही हैं। यह कदम […]

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  • May 18, 2026 7:14 pm IST, Published 13 hours ago

नई दिल्ली : घरेलू एलपीजी सिलेंडर की डिलीवरी को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए तेल कंपनियों ने अब DAC यानी Delivery Authentication Code सिस्टम को अनिवार्य कर दिया है। इंडेन, भारत गैस और एचपी गैस जैसी कंपनियां ग्राहकों को सिलेंडर की डिलीवरी से पहले मोबाइल पर एक विशेष कोड भेज रही हैं। यह कदम जहां फर्जी डिलीवरी और ब्लैक मार्केटिंग रोकने के लिए उठाया गया है, वहीं साइबर ठग भी इसका फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं।

हाल के दिनों में कई उपभोक्ताओं को फर्जी कॉल और मैसेज मिलने की शिकायतें सामने आई हैं, जिनमें खुद को गैस एजेंसी का कर्मचारी बताकर DAC या OTP मांगा जा रहा है। ऐसे में ग्राहकों के लिए असली और नकली मैसेज की पहचान करना बेहद जरूरी हो गया है।

क्या है DAC सिस्टम?

DAC यानी Delivery Authentication Code एक 4 या 6 अंकों का सिक्योरिटी कोड होता है। जब ग्राहक गैस सिलेंडर बुक करता है, तब गैस कंपनी उसके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर यह कोड भेजती है। सिलेंडर डिलीवरी के समय ग्राहक को यह कोड डिलीवरी बॉय को बताना होता है। कोड मिलान होने के बाद ही डिलीवरी पूरी मानी जाती है।

कंपनियों का कहना है कि इस प्रक्रिया से यह सुनिश्चित होगा कि सिलेंडर सही उपभोक्ता तक ही पहुंचे और किसी तरह की फर्जी एंट्री या गलत डिलीवरी न हो।

क्यों लागू किया गया यह नया नियम?

तेल कंपनियों के अनुसार कई शहरों में ऐसी शिकायतें मिल रही थीं कि बिना ग्राहक की जानकारी के सिलेंडर डिलीवर दिखा दिया जाता था। कुछ मामलों में घरेलू सिलेंडर की कालाबाजारी हो रही थी।नकली डिलीवरी एंट्री बनाकर सब्सिडी का गलत फायदा उठाया जा रहा था। इन समस्याओं को रोकने के लिए DAC सिस्टम लागू किया गया है। इससे हर डिलीवरी डिजिटल रूप से सत्यापित होगी।

असली DAC मैसेज की पहचान कैसे करें?

विशेषज्ञों के मुताबिक ग्राहक इन बातों का ध्यान रखें:

1. केवल आधिकारिक नंबर से आता है मैसेज

DAC हमेशा गैस कंपनी के आधिकारिक SMS चैनल से आता है। मैसेज में ग्राहक का नाम, बुकिंग नंबर और एजेंसी की जानकारी भी होती है।

2. किसी लिंक पर क्लिक करने की जरूरत नहीं

असली DAC मैसेज में आमतौर पर कोई संदिग्ध लिंक नहीं होता। अगर मैसेज में APK डाउनलोड करने या लिंक खोलने को कहा जाए तो सावधान हो जाएं।

3. डिलीवरी के समय ही मांगा जाता है कोड

गैस कंपनी कभी फोन करके पहले से DAC नहीं मांगती। कोड केवल डिलीवरी के वक्त डिलीवरी बॉय को बताया जाता है।

4. OTP और DAC अलग चीजें हैं

कई ठग OTP के नाम पर DAC मांग लेते हैं। ग्राहक यह समझें कि दोनों सुरक्षा कोड हैं और इन्हें किसी अनजान व्यक्ति से साझा नहीं करना चाहिए।

ऐसे हो रही है ठगी

साइबर अपराधी अब गैस एजेंसी के नाम से कॉल कर रहे हैं और कह रहे हैं आपकी गैस बुकिंग कैंसिल हो जाएगी।

KYC अपडेट करनी है

सब्सिडी बंद हो जाएगी”

DAC बताइए तभी डिलीवरी होगी

कुछ मामलों में फर्जी ऐप डाउनलोड करवाकर मोबाइल डेटा और बैंक जानकारी भी चुराई जा रही है।

ग्राहकों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?

केवल रजिस्टर्ड गैस एजेंसी पर भरोसा करें।

अनजान नंबरों से आए कॉल पर DAC साझा न करें।

मोबाइल नंबर हमेशा अपडेट रखें।

डिलीवरी बॉय का नाम और बुकिंग डिटेल जांच लें।

किसी भी संदिग्ध गतिविधि की शिकायत तुरंत गैस कंपनी हेल्पलाइन पर करें।

गैस कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप का ही इस्तेमाल करें।

कंपनियों का क्या कहना है?

तेल कंपनियों का कहना है कि DAC व्यवस्था पूरी तरह उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए बनाई गई है। इससे डिलीवरी प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी होगी और गलत तरीके से सिलेंडर वितरण पर रोक लगेगी। डिजिटल सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर जागरूकता भी उतनी ही जरूरी है। थोड़ी सी सावधानी उपभोक्ताओं को बड़े नुकसान से बचा सकती है।

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