देश में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को आईसीयू (इंटेंसिव केयर यूनिट) और क्रिटिकल केयर सेवाओं के लिए न्यूनतम मानक तय करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि बढ़ती आबादी के मुकाबले देश की स्वास्थ्य व्यवस्था अभी भी पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण नहीं बन पाई है।
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों को जीवन का अधिकार मिला है और इसमें बेहतर तथा सुलभ क्रिटिकल केयर सुविधाएं भी शामिल हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी अस्पताल में आईसीयू सबसे महत्वपूर्ण इकाई होती है, इसलिए इसकी व्यवस्था मजबूत और मानकों के अनुरूप होना जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को निर्देश दिया है कि वे अपने यहां मौजूद आईसीयू सुविधाओं की स्थिति और कमियों का आकलन करें तथा दो महीने के भीतर विस्तृत रिपोर्ट अदालत में पेश करें। कोर्ट ने तीन-स्तरीय आईसीयू मॉडल को मंजूरी देते हुए कहा कि इससे छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों तक बेहतर क्रिटिकल केयर सुविधाएं पहुंचाई जा सकेंगी।
यह मामला वर्ष 2016 से लंबित उन याचिकाओं से जुड़ा है, जिनमें देशभर में आईसीयू सेवाओं के लिए समान सुरक्षा मानक और भर्ती प्रक्रिया तय करने की मांग की गई थी। मामले की अगली सुनवाई 13 अगस्त को होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गंभीर मरीजों को समय पर इलाज मिलना बेहद जरूरी है और इसके लिए मजबूत आईसीयू नेटवर्क होना चाहिए। अदालत ने सरकारों को स्वास्थ्य क्षेत्र में बुनियादी ढांचे और प्रशिक्षित स्टाफ की संख्या बढ़ाने पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी है।