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सुप्रीम कोर्ट सख्त: देशभर में ICU सेवाओं के लिए एक समान मानक बनाने के निर्देश

देश में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को आईसीयू (इंटेंसिव केयर यूनिट) और क्रिटिकल केयर सेवाओं के लिए न्यूनतम मानक तय करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि बढ़ती आबादी के मुकाबले देश की स्वास्थ्य व्यवस्था अभी भी पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण नहीं बन […]

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  • May 21, 2026 11:40 am IST, Published 3 hours ago

देश में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को आईसीयू (इंटेंसिव केयर यूनिट) और क्रिटिकल केयर सेवाओं के लिए न्यूनतम मानक तय करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि बढ़ती आबादी के मुकाबले देश की स्वास्थ्य व्यवस्था अभी भी पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण नहीं बन पाई है।

जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों को जीवन का अधिकार मिला है और इसमें बेहतर तथा सुलभ क्रिटिकल केयर सुविधाएं भी शामिल हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी अस्पताल में आईसीयू सबसे महत्वपूर्ण इकाई होती है, इसलिए इसकी व्यवस्था मजबूत और मानकों के अनुरूप होना जरूरी है।

सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को निर्देश दिया है कि वे अपने यहां मौजूद आईसीयू सुविधाओं की स्थिति और कमियों का आकलन करें तथा दो महीने के भीतर विस्तृत रिपोर्ट अदालत में पेश करें। कोर्ट ने तीन-स्तरीय आईसीयू मॉडल को मंजूरी देते हुए कहा कि इससे छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों तक बेहतर क्रिटिकल केयर सुविधाएं पहुंचाई जा सकेंगी।

यह मामला वर्ष 2016 से लंबित उन याचिकाओं से जुड़ा है, जिनमें देशभर में आईसीयू सेवाओं के लिए समान सुरक्षा मानक और भर्ती प्रक्रिया तय करने की मांग की गई थी। मामले की अगली सुनवाई 13 अगस्त को होगी।

  • अस्पतालों में आईसीयू बेड की उपलब्धता सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाए।
  • राज्यों को जिला और स्थानीय स्तर पर बेसिक आईसीयू सुविधाएं विकसित करनी होंगी।
  • नर्सिंग संस्थानों को आईसीयू अस्पतालों से जोड़ा जाए या उन्हें 1 किलोमीटर के दायरे में स्थापित किया जाए।
  • आईसीयू इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने के लिए CSR और NGO फंडिंग की संभावनाएं तलाशने के निर्देश।
  • हर राज्य में वेंटिलेटर और प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ से लैस कम से कम पांच एम्बुलेंस की व्यवहार्यता जांचने को कहा गया।
  • केंद्र सरकार अस्पतालों और आईसीयू सुविधाओं के लिए GPS आधारित ट्रैकिंग सिस्टम विकसित करे।
  • मरीजों के आसान ट्रांसफर के लिए अस्पतालों के बीच बेहतर नेटवर्क तैयार किया जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गंभीर मरीजों को समय पर इलाज मिलना बेहद जरूरी है और इसके लिए मजबूत आईसीयू नेटवर्क होना चाहिए। अदालत ने सरकारों को स्वास्थ्य क्षेत्र में बुनियादी ढांचे और प्रशिक्षित स्टाफ की संख्या बढ़ाने पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी है।

 

 

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