कोलकाता: पश्चिम बंगाल में अवैध घुसपैठ और प्रवासियों के मुद्दे पर सियासत एक बार फिर गरमा गई है। राज्य में नई सरकार बनने के बाद प्रशासन ने इस मामले में सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। सरकार की ओर से सभी जिला प्रशासन को निर्देश जारी किए गए हैं कि अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान कर कार्रवाई की जाए। इसके तहत विशेष रूप से अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या प्रवासियों को चिन्हित करने पर जोर दिया जा रहा है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, जिला स्तर पर अधिकारियों को कहा गया है कि संदिग्ध लोगों की जांच कर उन्हें हिरासत में लिया जाए और आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाए। प्रशासन का कहना है कि जिन लोगों के पास वैध दस्तावेज नहीं होंगे, उन्हें अस्थायी होल्डिंग सेंटर में रखा जा सकता है। इसके बाद संबंधित एजेंसियों और सीमा सुरक्षा बल को आगे की कार्रवाई के लिए जानकारी दी जाएगी।
इस पूरे मामले पर राज्य सरकार का कहना है कि यह कदम कानून व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए उठाया जा रहा है। अधिकारियों का दावा है कि राज्य में अवैध तरीके से रह रहे लोगों की पहचान करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए स्थानीय प्रशासन, पुलिस और अन्य एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाया जा रहा है।
वहीं विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार इस संवेदनशील विषय को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल कर रही है। कुछ नेताओं ने यह भी कहा कि कार्रवाई के दौरान यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि किसी निर्दोष नागरिक को परेशान न किया जाए।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में अवैध घुसपैठ का मुद्दा लंबे समय से चुनावी बहस का हिस्सा रहा है। सीमा से लगे इलाकों में सुरक्षा और पहचान को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में सरकार का यह नया रुख आने वाले समय में राज्य की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है।
हालांकि प्रशासन ने साफ किया है कि कार्रवाई पूरी तरह कानून के दायरे में रहकर की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कदम उठाने से पहले उसके दस्तावेज और पहचान की जांच की जाएगी। सरकार ने यह भी कहा कि अभियान के दौरान मानवाधिकारों और संवैधानिक प्रावधानों का पालन किया जाएगा।
फिलहाल इस मामले को लेकर राज्यभर में चर्चा तेज है और लोगों की नजर सरकार की अगली कार्रवाई पर बनी हुई है।