पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग से आने वाले प्रसिद्ध वनस्पतिशास्त्री, शिक्षाविद और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले प्रोफेसर गम्भीर सिंह योंजन को वर्ष 2026 के लिए पद्म श्री सम्मान से सम्मानित किए जाने की घोषणा की गई है। यह सम्मान उन्हें शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में दशकों से किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यों के लिए प्रदान किया जाएगा।
86 वर्षीय प्रो. योंजन लंबे समय से हिमालयी क्षेत्रों में जैव विविधता संरक्षण और पर्यावरण शिक्षा को बढ़ावा देने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा पहाड़ी इलाकों की वनस्पतियों, प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के अध्ययन एवं संरक्षण को समर्पित किया है। उनके कार्यों का लाभ केवल पश्चिम बंगाल ही नहीं बल्कि पूरे पूर्वोत्तर और हिमालयी क्षेत्रों को मिला है।
प्रो. योंजन ने शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कई शिक्षण संस्थानों से जुड़कर विद्यार्थियों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने का कार्य किया। उनका मानना रहा है कि प्रकृति संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए समाज और युवाओं की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। इसी सोच के साथ उन्होंने वर्षों तक छात्रों और स्थानीय समुदायों के बीच पर्यावरण जागरूकता अभियान चलाए।
उनकी पहल पर दार्जिलिंग और आसपास के क्षेत्रों में कई वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किए गए। उन्होंने स्थानीय पौधों और औषधीय वनस्पतियों के संरक्षण पर विशेष जोर दिया। पहाड़ी क्षेत्रों में बढ़ते शहरीकरण और जंगलों की कटाई को लेकर उन्होंने समय-समय पर चिंता जताई और लोगों को पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए प्रेरित किया।
प्रो. गम्भीर सिंह योंजन को साहित्य और शोध के क्षेत्र में भी विशेष पहचान मिली है। उन्होंने पर्यावरण, वनस्पति विज्ञान और हिमालयी जैव विविधता पर कई लेख और शोध पत्र लिखे हैं। उनके लेखन को विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के बीच काफी सराहना मिली है। वे मानते हैं कि प्रकृति और संस्कृति एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हुई हैं और दोनों का संरक्षण समान रूप से जरूरी है।
पद्म श्री सम्मान की घोषणा के बाद दार्जिलिंग सहित पूरे पश्चिम बंगाल में खुशी का माहौल है। शिक्षकों, पर्यावरणविदों और सामाजिक संगठनों ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रो. योंजन ने हमेशा समाज और पर्यावरण के हित में काम किया और नई पीढ़ी को प्रकृति से जुड़ने की प्रेरणा दी।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे व्यक्तित्वों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलने से पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों की रुचि और जागरूकता बढ़ती है। आज जब दुनिया जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संकट जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है, तब प्रो. योंजन जैसे लोगों का योगदान समाज के लिए प्रेरणास्रोत बनता है।
पद्म श्री भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जो विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों को दिया जाता है। प्रो. गम्भीर सिंह योंजन का चयन इस बात का प्रमाण है कि पर्यावरण संरक्षण और शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान बेहद महत्वपूर्ण और प्रभावशाली रहा है।
उनकी इस उपलब्धि से दार्जिलिंग और पश्चिम बंगाल के लोगों में गर्व की भावना है। स्थानीय नागरिकों ने उम्मीद जताई है कि आने वाली पीढ़ियां भी प्रो. योंजन के कार्यों से प्रेरणा लेकर प्रकृति संरक्षण और समाज सेवा की दिशा में आगे बढ़ेंगी।