पश्चिम बंगाल में 3D अभियान शुरू, अवैध प्रवासियों की पहचान जारी

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में भारत-बांग्लादेश सीमा पर अवैध घुसपैठ को लेकर केंद्र और राज्य स्तर पर कार्रवाई तेज हो गई है। सीमावर्ती जिलों उत्तर 24 परगना, मालदा, मुर्शिदाबाद और नदिया में सुरक्षा एजेंसियों ने संयुक्त अभियान शुरू किया है। प्रशासन “डिटेक्ट, डिलीट एंड डिपोर्ट (3D)” नीति के तहत संदिग्ध अवैध प्रवासियों की पहचान, दस्तावेजों की […]

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  • May 27, 2026 1:47 pm IST, Published 2 hours ago

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में भारत-बांग्लादेश सीमा पर अवैध घुसपैठ को लेकर केंद्र और राज्य स्तर पर कार्रवाई तेज हो गई है। सीमावर्ती जिलों उत्तर 24 परगना, मालदा, मुर्शिदाबाद और नदिया में सुरक्षा एजेंसियों ने संयुक्त अभियान शुरू किया है। प्रशासन “डिटेक्ट, डिलीट एंड डिपोर्ट (3D)” नीति के तहत संदिग्ध अवैध प्रवासियों की पहचान, दस्तावेजों की जांच और कानूनी कार्रवाई कर रहा है। इस मुद्दे को लेकर अब राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ गई है।

गृह मंत्री अमित शाह के निर्देश पर केंद्र सरकार ने एक हाई-लेवल कमेटी का गठन किया है, जो सीमावर्ती इलाकों में अवैध घुसपैठ, जनसंख्या संरचना में बदलाव और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करेगी। समिति विभिन्न एजेंसियों से रिपोर्ट लेकर यह पता लगाएगी कि सीमा पार से हो रही घुसपैठ का सामाजिक, आर्थिक और सुरक्षा व्यवस्था पर कितना प्रभाव पड़ रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, बीएसएफ और राज्य पुलिस की संयुक्त टीमों ने कई इलाकों में विशेष सत्यापन अभियान चलाया है। संदिग्ध लोगों के पहचान पत्र, निवास प्रमाण और अन्य दस्तावेजों की जांच की जा रही है। जिन लोगों के दस्तावेज संदिग्ध पाए जा रहे हैं, उन्हें होल्डिंग सेंटर में रखकर आगे की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। सीमा पर चौकसी बढ़ाने के लिए अतिरिक्त जवानों की तैनाती भी की गई है।

राजनीतिक स्तर पर भी यह मुद्दा काफी गर्म हो गया है। विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर अवैध घुसपैठ रोकने में विफल रहने का आरोप लगाया है, जबकि राज्य सरकार का कहना है कि कानून के अनुसार कार्रवाई की जा रही है और किसी निर्दोष व्यक्ति को परेशान नहीं किया जाएगा। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर पश्चिम बंगाल की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में लगातार हो रही घुसपैठ से स्थानीय संसाधनों, रोजगार और सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव बढ़ता है। इसी कारण केंद्र सरकार अब इस विषय पर दीर्घकालिक रणनीति तैयार करने की दिशा में काम कर रही है। हाई-लेवल कमेटी अगले एक वर्ष में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके बाद आगे की नीति तय की जाएगी।

फिलहाल सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं और आने वाले दिनों में यह अभियान और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

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