नई दिल्ली : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) एक बार फिर प्लास्टिक या पॉलिमर करेंसी नोटों को भारतीय बाजार में उतारने की योजना पर गंभीरता से विचार कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार RBI की हालिया बोर्ड बैठकों में इस विषय पर चर्चा हुई है। यदि यह प्रस्ताव मंजूर होता है, तो भारत की मुद्रा व्यवस्था में पिछले कई दशकों का सबसे बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
वर्तमान में देश में विशेष सुरक्षा फीचर्स वाले कागजी नोटों का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि लगातार उपयोग, नमी और खराब रखरखाव के कारण ये नोट अपेक्षाकृत जल्दी खराब हो जाते हैं। यही वजह है कि रिजर्व बैंक लंबे समय से अधिक टिकाऊ विकल्प तलाश रहा है। पॉलिमर नोट कागज के नोटों की तुलना में कई गुना अधिक मजबूत होते हैं और इनकी उम्र भी ज्यादा होती है।
दरअसल, प्लास्टिक नोटों का विचार नया नहीं है। वर्ष 2012 में भी RBI और केंद्र सरकार ने कुछ चुनिंदा शहरों में पॉलिमर नोटों के पायलट प्रोजेक्ट की तैयारी की थी। लेकिन तकनीकी चुनौतियों और उत्पादन संबंधी समस्याओं के चलते यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी। अब एक बार फिर इस दिशा में पहल होने की संभावना जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पॉलिमर नोटों से नोटों की छपाई और बार-बार उन्हें बदलने की लागत में कमी आएगी। RBI की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में नोटों की छपाई पर 6,372 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुए, जो पिछले वर्ष की तुलना में काफी ज्यादा है। बड़ी संख्या में खराब हो रहे नोटों को बदलने पर होने वाला खर्च भी लगातार बढ़ रहा है।
प्लास्टिक नोटों का सबसे बड़ा फायदा उनकी सुरक्षा मानी जाती है। इनमें आधुनिक सुरक्षा फीचर्स, पारदर्शी विंडो और विशेष डिजाइन जोड़े जा सकते हैं, जिससे नकली नोट तैयार करना काफी मुश्किल हो जाता है। यही कारण है कि ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड और कई अन्य देशों में पॉलिमर नोट सफलतापूर्वक चलन में हैं।
यदि RBI इस योजना को मंजूरी देता है तो शुरुआत में कुछ मूल्यवर्ग के नोटों को पायलट प्रोजेक्ट के तहत जारी किया जा सकता है। इसके परिणामों के आधार पर भविष्य में बड़े पैमाने पर प्लास्टिक नोटों को लागू करने का फैसला लिया जाएगा।
हालांकि RBI की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन बढ़ती छपाई लागत, नोटों की कम आयु और बेहतर सुरक्षा की जरूरत को देखते हुए पॉलिमर नोटों की संभावना पहले से अधिक मजबूत नजर आ रही है। आने वाले समय में भारतीयों के हाथों में कागज की जगह प्लास्टिक के नोट दिखाई दे सकते हैं, जो देश की मुद्रा व्यवस्था में एक नए युग की शुरुआत साबित हो सकता है।