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खेतिहर मजदूर से भाजपा जिलाध्यक्ष तक: जानिए कौन हैं रामशकल पटेल, जिन्हें काशी की कमान मिली

वाराणसी: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने संगठनात्मक पुनर्गठन के तहत उत्तर प्रदेश के पांच जिलों में नए जिलाध्यक्षों की घोषणा कर दी है। इनमें सबसे अधिक चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की हो रही है, जहां भाजपा नेतृत्व ने जमीनी स्तर से जुड़े कार्यकर्ता रामशकल पटेल को जिले की कमान सौंपकर बड़ा संदेश […]

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  • May 29, 2026 11:20 am IST, Published 9 hours ago

वाराणसी: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने संगठनात्मक पुनर्गठन के तहत उत्तर प्रदेश के पांच जिलों में नए जिलाध्यक्षों की घोषणा कर दी है। इनमें सबसे अधिक चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की हो रही है, जहां भाजपा नेतृत्व ने जमीनी स्तर से जुड़े कार्यकर्ता रामशकल पटेल को जिले की कमान सौंपकर बड़ा संदेश दिया है। खेतों में मेहनत-मजदूरी करने वाले रामशकल पटेल का भाजपा जिलाध्यक्ष बनना न केवल उनकी वर्षों की संगठनात्मक मेहनत का परिणाम है, बल्कि यह पार्टी की उस कार्यशैली को भी दर्शाता है जिसमें बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को शीर्ष जिम्मेदारियां देने का प्रयास किया जाता है।

भाजपा प्रदेश नेतृत्व द्वारा जैसे ही रामशकल पटेल के नाम की घोषणा की गई, राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। लंबे समय से संगठन में सक्रिय रहने वाले रामशकल पटेल का नाम जिलाध्यक्ष पद की दौड़ में जरूर था, लेकिन अंतिम निर्णय तक स्थिति स्पष्ट नहीं थी। पार्टी के फैसले ने सभी अटकलों पर विराम लगा दिया और वाराणसी भाजपा को नया नेतृत्व मिल गया।

खेत से निकली नेतृत्व की नई कहानी

रामशकल पटेल वाराणसी के सेवापुरी विधानसभा क्षेत्र के मेहंदीगंज गांव के निवासी हैं। सामान्य किसान परिवार से आने वाले रामशकल आज भी खेती-किसानी से जुड़े हुए हैं। बताया जाता है कि जिलाध्यक्ष बनाए जाने की सूचना उन्हें उस समय मिली जब वे अपने खेत में काम कर रहे थे। अचानक मिली इस बड़ी जिम्मेदारी से वह भावुक भी नजर आए। उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी बिल्कुल उम्मीद नहीं थी कि पार्टी एक साधारण कार्यकर्ता को इतनी बड़ी जिम्मेदारी सौंपेगी। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, भाजपा प्रदेश नेतृत्व और संगठन के वरिष्ठ नेताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वह पार्टी की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का पूरा प्रयास करेंगे।

1993 से भाजपा के सिपाही

रामशकल पटेल का राजनीतिक सफर करीब तीन दशक पुराना है। उन्होंने वर्ष 1993 में भाजपा की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण की थी। इसके बाद उन्होंने संगठन में लगातार सक्रिय भूमिका निभाई और विभिन्न पदों पर जिम्मेदारियां संभालीं। वर्ष 1996 में उन्हें गंगापुर विधानसभा क्षेत्र का प्रभारी बनाया गया। बाद में वर्ष 2004 में वह जिला कार्यसमिति के सदस्य बने।

राजनीति विज्ञान में एमए की डिग्री प्राप्त रामशकल पटेल ने भाजपा युवा मोर्चा और किसान मोर्चा में भी सक्रिय भूमिका निभाई। संगठन में उनकी सक्रियता और कार्यकर्ताओं के बीच मजबूत पकड़ के कारण उन्हें लगातार महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलती रहीं।

चुनावी रणनीति में भी निभाई अहम भूमिका

रामशकल पटेल केवल संगठनात्मक कार्यों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने कई महत्वपूर्ण चुनावों में पार्टी के लिए सक्रिय भूमिका निभाई। वर्ष 2009 और 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्हें सेवापुरी क्षेत्र का चुनाव कार्यालय प्रभारी बनाया गया था। चुनावी प्रबंधन और कार्यकर्ताओं के समन्वय में उनकी भूमिका को पार्टी ने काफी सराहा।

वर्ष 2015 में उन्हें भाजपा किसान मोर्चा की प्रदेश कार्यसमिति में स्थान मिला। वहीं 2021 में उन्हें सेवापुरी मंडल प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई। लगातार संगठन के लिए काम करने का ही परिणाम है कि आज वह वाराणसी भाजपा के जिलाध्यक्ष पद तक पहुंचे हैं।

सामाजिक समीकरणों का भी संदेश

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि रामशकल पटेल की नियुक्ति केवल संगठनात्मक फैसला नहीं है, बल्कि इसके पीछे सामाजिक और राजनीतिक रणनीति भी जुड़ी हुई है। पटेल समुदाय पूर्वांचल की राजनीति में प्रभावशाली माना जाता है। ऐसे में भाजपा ने एक अनुभवी ओबीसी चेहरे को आगे कर पिछड़े वर्गों के बीच अपनी पकड़ और मजबूत करने का संकेत दिया है।

वाराणसी भाजपा में इससे पहले हंसराज विश्वकर्मा जिलाध्यक्ष थे, जिन्हें हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री बनाया गया है। उनके स्थान पर रामशकल पटेल को जिम्मेदारी देकर पार्टी ने संगठन और सरकार के बीच संतुलन साधने का प्रयास किया है।

भाजपा की बड़ी रणनीति का हिस्सा

भाजपा ने वाराणसी के अलावा गोरखपुर महानगर, देवरिया, अंबेडकरनगर और चंदौली में भी नए जिलाध्यक्ष नियुक्त किए हैं। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि नए चेहरों के जरिए संगठन को और अधिक सक्रिय बनाया जा सकेगा तथा आगामी चुनावों के लिए मजबूत आधार तैयार होगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि वाराणसी जैसे महत्वपूर्ण जिले में जिलाध्यक्ष की भूमिका बेहद अहम होती है। यह जिला सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र होने के कारण राष्ट्रीय राजनीति का केंद्र माना जाता है। ऐसे में रामशकल पटेल के सामने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने, कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने और पार्टी की योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।

साधारण कार्यकर्ता से जिलाध्यक्ष तक

रामशकल पटेल की कहानी उन हजारों कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा है जो वर्षों तक बिना किसी पद या पहचान की अपेक्षा के संगठन के लिए काम करते हैं। खेतों में मेहनत करने वाले एक सामान्य किसान और कार्यकर्ता का भाजपा जैसे बड़े राजनीतिक दल में जिलाध्यक्ष बनना इस बात का उदाहरण है कि निरंतर मेहनत, संगठन के प्रति समर्पण और जमीनी जुड़ाव किसी भी व्यक्ति को नेतृत्व के सर्वोच्च पदों तक पहुंचा सकता है।

काशी की राजनीति में अब सभी की निगाहें रामशकल पटेल पर होंगी, जिनके कंधों पर भाजपा के सबसे महत्वपूर्ण जिलों में से एक की जिम्मेदारी आ गई है। आने वाले दिनों में उनका नेतृत्व संगठन को किस दिशा में ले जाता है, यह देखना दिलचस्प होगा।

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