प्रयागराज/झांसी: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी के एक शिक्षक की पदोन्नति से जुड़े मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन और राज्य सरकार को निर्धारित समयसीमा के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि शिक्षक की सेवानिवृत्ति से पहले मामले का निस्तारण किया जाना आवश्यक है। न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान विश्वविद्यालय और संबंधित अधिकारियों को तीन सप्ताह के भीतर आवश्यक कार्रवाई पूरी कर अंतिम निर्णय लेने का आदेश दिया। मामले की अगली सुनवाई 24 जून 2026 को निर्धारित की गई है।
अदालत ने निर्देश दिया कि तब तक लिए गए निर्णय की प्रति न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जाए। याचिकाकर्ता डॉ. राजेंद्र प्रसाद का कहना है कि कुलाधिपति द्वारा मार्च 2026 में उनके पक्ष में निर्णय दिया जा चुका था। इसके बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन ने निर्धारित अवधि के भीतर कोई आदेश जारी नहीं किया।
याचिकाकर्ता 30 जून 2026 को सेवानिवृत्त होने वाले हैं और समय पर निर्णय न होने से उन्हें सेवा तथा आर्थिक लाभों में नुकसान उठाना पड़ सकता है। सुनवाई के दौरान विश्वविद्यालय की ओर से बताया गया कि मामले की समीक्षा के लिए छह सदस्यीय समिति गठित की गई है। समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद विषय को कार्य परिषद के समक्ष रखा जाएगा। हालांकि अदालत ने कहा कि सेवानिवृत्ति की तिथि निकट होने के कारण अनावश्यक विलंब उचित नहीं है। कोर्ट ने विश्वविद्यालय के कुलपति और रजिस्ट्रार को निर्देश दिया कि कुलाधिपति के आदेशों के अनुरूप सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करते हुए तीन सप्ताह के भीतर अंतिम निर्णय लिया जाए।