अलीगढ़: अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) का कैनेडी ऑडिटोरियम शुक्रवार को उस समय राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया, जब उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री दिनेश प्रताप सिंह के संबोधन के दौरान सभागार ‘जय श्रीराम’, ‘हर-हर महादेव’ और ‘भारत माता की जय’ के नारों से गूंज उठा। विश्वविद्यालय के इतिहास में इस तरह की घटना को लेकर जहां समर्थक इसे एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक क्षण बता रहे हैं, वहीं विरोधी पक्ष इसे शैक्षणिक संस्थान की परंपराओं के विपरीत मान रहा है।
दरअसल, AMU के कैनेडी ऑडिटोरियम में उद्यान विभाग की ओर से “औद्यानिक उन्नयन गोष्ठी” का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम में अलीगढ़, आगरा और मेरठ मंडल के विभिन्न जिलों से आए सैकड़ों प्रगतिशील किसानों, कृषि विशेषज्ञों और अधिकारियों ने भाग लिया। मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे प्रदेश के उद्यान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार एवं कृषि निर्यात राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह ने अपने संबोधन की शुरुआत “भारत माता की जय” के उद्घोष से की। इसके बाद सभागार में मौजूद लोगों ने भी उनका साथ दिया और पूरे हॉल में जयकारे गूंजने लगे।
अपने भाषण के दौरान मंत्री ने कहा कि AMU के कैनेडी हॉल के इतिहास में पहली बार इस तरह का कार्यक्रम आयोजित किया गया है। उन्होंने इसे एक सकारात्मक बदलाव बताते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों को केवल शिक्षा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि किसानों, युवाओं और समाज के अन्य वर्गों से भी जुड़ना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश सरकार के विकास कार्यों और कृषि क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों को लेकर किसानों में उत्साह दिखाई दे रहा है।
मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार कृषि और बागवानी क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने किसानों को आधुनिक तकनीकों को अपनाने, फसल विविधीकरण पर जोर देने और निर्यात आधारित खेती की ओर बढ़ने की सलाह दी। कार्यक्रम में किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं और बागवानी संबंधी नई तकनीकों की जानकारी भी दी गई।
हालांकि कार्यक्रम के दौरान लगे धार्मिक नारों ने पूरे आयोजन को राजनीतिक और सामाजिक बहस के केंद्र में ला दिया। मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने अपने संबोधन के अंत में “जय श्रीराम” और “हर-हर महादेव” के नारे लगाए, जिनका सभागार में मौजूद कई लोगों ने समर्थन किया। कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही इस घटना को लेकर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई।
AMU के कुछ पूर्व छात्रों और छात्र संगठनों ने इस पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय की पहचान उसकी अकादमिक उत्कृष्टता, विविधता और समावेशी संस्कृति रही है। ऐसे में किसी भी प्रकार की धार्मिक नारेबाजी परिसर के माहौल को प्रभावित कर सकती है। कुछ पूर्व छात्रों ने प्रशासन से इस मामले पर स्पष्ट रुख अपनाने की मांग भी की है।
वहीं दूसरी ओर कई लोगों ने मंत्री के समर्थन में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “जय श्रीराम” और “हर-हर महादेव” जैसे उद्घोष भारतीय संस्कृति और आस्था का हिस्सा हैं। उनका तर्क है कि कार्यक्रम में किसी समुदाय विशेष के खिलाफ कोई टिप्पणी नहीं की गई, इसलिए इसे विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि AMU जैसे ऐतिहासिक और संवेदनशील शैक्षणिक संस्थान में हुई यह घटना आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन सकती है। खासकर ऐसे समय में जब देशभर में शिक्षा संस्थानों की भूमिका, सांस्कृतिक पहचान और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर लगातार चर्चा चल रही है।
फिलहाल, कैनेडी ऑडिटोरियम में लगे इन नारों का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और AMU एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में आ गया है। समर्थक इसे ऐतिहासिक क्षण बता रहे हैं, जबकि आलोचक इसे विश्वविद्यालय की मूल भावना से जोड़कर देख रहे हैं। ऐसे में यह मामला आने वाले दिनों में और अधिक चर्चा का विषय बना रह सकता है।