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भारतीय दवा की कीमत देख अमेरिकी महिला हैरान, बोली- US हेल्थकेयर सिस्टम एक ‘स्कैम’

वॉशिंगटन/नई दिल्ली: अमेरिका की एक महिला द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किया गया वीडियो इन दिनों तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में महिला ने दावा किया है कि जिस दवा के लिए उसे अमेरिका में लगभग 1,000 डॉलर (करीब 85,000 से 95,000 रुपये) खर्च करने पड़ते थे, वही दवा उसे भारत से मात्र […]

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  • June 14, 2026 5:34 pm IST, Published 3 hours ago

वॉशिंगटन/नई दिल्ली: अमेरिका की एक महिला द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किया गया वीडियो इन दिनों तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में महिला ने दावा किया है कि जिस दवा के लिए उसे अमेरिका में लगभग 1,000 डॉलर (करीब 85,000 से 95,000 रुपये) खर्च करने पड़ते थे, वही दवा उसे भारत से मात्र 25 डॉलर (करीब 2,000 से 2,300 रुपये) में उपलब्ध हो गई। इस अनुभव के बाद महिला ने अमेरिकी हेल्थकेयर सिस्टम को “स्कैम” यानी आम लोगों के लिए बेहद महंगा और अव्यवस्थित बताया।

वायरल वीडियो में महिला, जिसकी पहचान विक्टोरिया के रूप में बताई जा रही है, कहती है कि वह लंबे समय से एक विशेष दवा का उपयोग कर रही थी। अमेरिका में उस दवा की कीमत इतनी अधिक थी कि उसके इलाज का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा था। दवा की लागत और स्वास्थ्य सेवाओं पर आने वाले भारी खर्च से परेशान होकर उसने अन्य विकल्पों की तलाश शुरू की।

महिला के अनुसार, उसके डॉक्टर ने उसे कनाडा की एक फार्मेसी से संपर्क करने की सलाह दी। फार्मेसी ने संबंधित दवा सीधे भारतीय निर्माता से मंगवाई। जब दवा उसके पास पहुंची तो उसकी कीमत देखकर वह चौंक गई। जिस दवा के लिए अमेरिका में हजारों डॉलर खर्च करने पड़ते थे, वही दवा भारत से बेहद कम कीमत पर उपलब्ध हो गई।

वीडियो में महिला ने कहा कि यह केवल दवा की कीमत का मामला नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि दुनिया के अलग-अलग देशों में स्वास्थ्य सेवाओं और दवाओं की लागत में कितना बड़ा अंतर है। उसने सवाल उठाया कि आखिर एक ही दवा की कीमत अमेरिका में इतनी अधिक और भारत जैसे देशों में इतनी कम क्यों है।

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी प्रतिक्रियाएं दीं। कई यूजर्स ने अमेरिकी स्वास्थ्य व्यवस्था की आलोचना करते हुए कहा कि वहां दवाओं और चिकित्सा सेवाओं की कीमतें आम नागरिकों की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं। वहीं कुछ लोगों ने टिप्पणी की कि भारत दुनिया के सबसे बड़े जेनेरिक दवा उत्पादकों में से एक है, जिसके कारण यहां कई दवाएं अपेक्षाकृत सस्ती उपलब्ध हो जाती हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में जेनेरिक दवाओं का बड़ा उत्पादन, प्रतिस्पर्धी बाजार और सरकारी मूल्य नियंत्रण जैसी नीतियां दवाओं की कीमत कम रखने में मदद करती हैं। दूसरी ओर अमेरिका में अनुसंधान एवं विकास लागत, बीमा व्यवस्था, वितरण तंत्र और फार्मास्यूटिकल कंपनियों की मूल्य निर्धारण नीतियां दवाओं को महंगा बना सकती हैं।

हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि किसी दवा की कीमत की तुलना करते समय उसकी गुणवत्ता, ब्रांड, जेनेरिक संस्करण, आयात नियम और स्थानीय स्वास्थ्य नीतियों को भी ध्यान में रखना जरूरी है। कई बार एक ही दवा के अलग-अलग संस्करणों की कीमतों में बड़ा अंतर देखने को मिलता है।

विक्टोरिया का यह वीडियो अब वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की लागत को लेकर बहस का विषय बन गया है। भारत की सस्ती दवा व्यवस्था की चर्चा जहां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रही है, वहीं अमेरिका की स्वास्थ्य प्रणाली को लेकर भी नए सवाल उठने लगे हैं। सोशल मीडिया पर लाखों लोग इस वीडियो को देख चुके हैं और दवाओं की कीमतों में भारी अंतर पर अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं।

यह मामला एक बार फिर इस बात को सामने लाता है कि स्वास्थ्य सेवाएं और दवाएं केवल चिकित्सा का विषय नहीं हैं, बल्कि वे आर्थिक और सामाजिक नीतियों से भी गहराई से जुड़ी हुई हैं। भारत और अमेरिका के बीच दवा कीमतों का यह अंतर अब वैश्विक चर्चा का विषय बन चुका है।

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