पुणे: महाराष्ट्र के आईटी हब पुणे से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने देशभर के युवाओं और नौकरीपेशा लोगों को झकझोर कर रख दिया है। एक निजी आईटी कंपनी के अचानक बंद हो जाने से 700 से अधिक कर्मचारी और इंटर्न एक झटके में बेरोजगार हो गए। कर्मचारियों का आरोप है कि कंपनी महीनों से वेतन देने में टालमटोल कर रही थी और आखिरकार रातोंरात दफ्तर पर ताला लगाकर प्रबंधन गायब हो गया। मामले में पुलिस ने कंपनी के CEO हर्षल ठाकरे को गिरफ्तार कर लिया है और पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, कंपनी ने वर्ष 2025 के दौरान बड़ी संख्या में फ्रेशर्स और युवाओं की भर्ती की थी। नौकरी की तलाश कर रहे सैकड़ों युवाओं को आकर्षक वेतन, करियर ग्रोथ और प्रशिक्षण का सपना दिखाया गया। कई इंटर्न्स को हर महीने 15 हजार रुपये स्टाइपेंड देने का वादा किया गया था। शुरुआत में वेतन और स्टाइपेंड समय पर दिए गए, जिससे कर्मचारियों का भरोसा मजबूत हुआ और कंपनी की साख बढ़ी।
लेकिन कुछ ही महीनों बाद हालात बदलने लगे। कर्मचारियों का दावा है कि फरवरी 2026 से वेतन आना बंद हो गया। जब कर्मचारियों ने इस बारे में प्रबंधन से सवाल किए तो उन्हें बताया गया कि कंपनी का आंतरिक ऑडिट चल रहा है और जल्द ही सभी बकाया भुगतान कर दिए जाएंगे। CEO और HR विभाग की ओर से लगातार आश्वासन दिए जाते रहे कि कुछ समय की देरी है, लेकिन किसी कर्मचारी का पैसा नहीं रुकेगा।
कर्मचारियों के मुताबिक, पहले फरवरी के अंत तक भुगतान का भरोसा दिया गया। फिर मार्च, उसके बाद 20 अप्रैल, 29 अप्रैल और 30 अप्रैल जैसी नई-नई तारीखें दी जाती रहीं। हर बार कर्मचारियों को उम्मीद बंधाई गई कि उनका वेतन जल्द खाते में पहुंच जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस बीच कई कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति खराब होने लगी। किराया, लोन की किश्तें और घरेलू खर्च चलाना मुश्किल हो गया।
मामला तब और गंभीर हो गया जब कंपनी की ओर से कर्मचारियों को दिए गए कुछ चेक कथित रूप से बाउंस हो गए। कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें जानबूझकर ऐसे चेक दिए गए जिनमें पर्याप्त राशि नहीं थी। इससे कर्मचारियों का भरोसा पूरी तरह टूट गया और उन्होंने कंपनी के खिलाफ आवाज उठानी शुरू कर दी।
सबसे बड़ा झटका तब लगा जब कर्मचारी एक दिन कार्यालय पहुंचे और देखा कि कंपनी का दफ्तर बंद पड़ा है। मुख्य गेट पर ताला लगा हुआ था और प्रबंधन का कोई अधिकारी वहां मौजूद नहीं था। कर्मचारियों को कंपनी बंद होने की कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई थी। कई लोग घंटों तक कार्यालय के बाहर खड़े रहे और अपने अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश करते रहे, लेकिन किसी ने जवाब नहीं दिया।
पीड़ित कर्मचारियों का यह भी आरोप है कि इंटर्न्स से सिक्योरिटी डिपॉजिट के नाम पर 15-15 हजार रुपये लिए गए थे। कंपनी ने दावा किया था कि यह राशि प्रशिक्षण और उपकरणों की सुरक्षा के लिए ली जा रही है और बाद में लौटा दी जाएगी। लेकिन कंपनी बंद होने के बाद यह रकम भी वापस नहीं मिली। कई युवाओं का कहना है कि उन्होंने परिवार से उधार लेकर यह पैसा जमा किया था।
घटना के बाद बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने पुलिस से संपर्क किया और शिकायत दर्ज कराई। जांच के दौरान पुलिस को प्रारंभिक तौर पर वित्तीय अनियमितताओं और कर्मचारियों के साथ कथित धोखाधड़ी के संकेत मिले। इसके बाद कंपनी के CEO हर्षल ठाकरे को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस अब कंपनी के बैंक खातों, वित्तीय लेन-देन और भर्ती प्रक्रिया की विस्तार से जांच कर रही है।
इस घटना ने देश के स्टार्टअप और आईटी सेक्टर में काम करने वाले युवाओं के बीच चिंता बढ़ा दी है। सोशल मीडिया पर भी मामला तेजी से चर्चा का विषय बना हुआ है। कई लोगों का कहना है कि निजी कंपनियों में भर्ती के दौरान युवाओं को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है, जबकि विशेषज्ञ कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए सख्त नियमों की मांग कर रहे हैं।
फिलहाल पुलिस जांच जारी है और प्रभावित कर्मचारी अपने बकाया वेतन तथा जमा राशि वापस मिलने की उम्मीद लगाए हुए हैं। यह मामला केवल एक कंपनी के बंद होने का नहीं, बल्कि उन सैकड़ों युवाओं के टूटे सपनों की कहानी बन गया है जिन्होंने अपने बेहतर भविष्य की उम्मीद में इस कंपनी का दामन थामा था।