चंडीगढ़/नई दिल्ली। हरियाणा के कई जिलों को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) से बाहर किए जाने की चर्चाओं ने प्रदेश की राजनीति, उद्योग जगत और आम लोगों के बीच हलचल पैदा कर दी है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दावों के अनुसार 16 जून को होने वाली महत्वपूर्ण बैठक में जिंद, महेंद्रगढ़, भिवानी, चरखी दादरी और करनाल जैसे जिलों के NCR से बाहर होने पर फैसला लिया जा सकता है। हालांकि अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है और अंतिम निर्णय बैठक के बाद ही सामने आएगा।
सूत्रों के मुताबिक NCR की नई क्षेत्रीय योजना-2041 के तहत NCR की सीमाओं का पुनर्गठन प्रस्तावित है। इस योजना में राजधानी दिल्ली से 100 किलोमीटर के दायरे को प्राथमिक आधार बनाने पर विचार किया जा रहा है। यदि यह प्रस्ताव मंजूर होता है तो हरियाणा के कई दूरवर्ती जिले NCR के दायरे से बाहर हो सकते हैं।
वर्तमान में हरियाणा के 14 जिले NCR क्षेत्र का हिस्सा हैं। इनमें गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, पलवल, झज्जर, रोहतक, रेवाड़ी, नूंह, पानीपत, करनाल, जिंद, महेंद्रगढ़, भिवानी और चरखी दादरी शामिल हैं। NCR का दर्जा मिलने से इन जिलों को बुनियादी ढांचा विकास, परिवहन परियोजनाओं, औद्योगिक निवेश और शहरी योजनाओं में विशेष लाभ मिलता रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कुछ जिलों को NCR से बाहर किया जाता है तो इसका सबसे बड़ा असर विकास योजनाओं और निवेश पर पड़ सकता है। कई औद्योगिक परियोजनाएं, रियल एस्टेट निवेश और सरकारी योजनाएं NCR की स्थिति को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं। ऐसे में NCR का दर्जा खत्म होने से संबंधित क्षेत्रों की आर्थिक गतिविधियों पर प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
दूसरी ओर, सरकार और योजना विशेषज्ञों का तर्क है कि NCR का लगातार बढ़ता क्षेत्र प्रशासनिक और विकासात्मक चुनौतियां पैदा कर रहा है। NCR का मूल उद्देश्य दिल्ली पर बढ़ते जनसंख्या और विकास के दबाव को आसपास के क्षेत्रों में संतुलित करना था। लेकिन समय के साथ क्षेत्र का विस्तार इतना बढ़ गया कि कई दूरस्थ जिले भी इसमें शामिल हो गए। ऐसे में सीमाओं का पुनर्निर्धारण कर NCR को अधिक प्रभावी और व्यवस्थित बनाने की कोशिश की जा रही है।
सोशल मीडिया पर वायरल पोस्टों में यह दावा किया जा रहा है कि 16 जून को ही पांच जिले NCR से बाहर कर दिए जाएंगे, लेकिन फिलहाल इसे लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी जिले को NCR से बाहर करने का फैसला केवल एक बैठक में नहीं होता, बल्कि इसके लिए राज्यों, केंद्र सरकार और NCR योजना बोर्ड के बीच विस्तृत विचार-विमर्श और औपचारिक मंजूरी की प्रक्रिया अपनाई जाती है।
फिलहाल हरियाणा के लाखों लोगों, उद्योगपतियों और रियल एस्टेट क्षेत्र की नजर 16 जून की बैठक पर टिकी हुई है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो यह प्रदेश के विकास मॉडल और क्षेत्रीय योजना में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। वहीं यदि प्रस्ताव पर सहमति नहीं बनती, तो मौजूदा व्यवस्था जारी रह सकती है।
अब देखना यह होगा कि NCR के भविष्य को लेकर होने वाली यह अहम बैठक हरियाणा के इन जिलों के लिए क्या फैसला लेकर आती है। तब तक सोशल मीडिया पर चल रहे दावों को अंतिम सत्य मानने से बचने और आधिकारिक घोषणा का इंतजार करने की सलाह दी जा रही है।