मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने संकेत दिए हैं कि आगामी मानसून सत्र में सरकार इस संबंध में महत्वपूर्ण कदम उठा सकती है। उन्होंने कहा कि यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा तो विधानसभा के इसी सत्र में UCC से जुड़ा प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाएगा।
विधानसभा परिसर में मीडिया से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार कई महत्वपूर्ण विषयों को लेकर आने वाली है, जिनमें समान नागरिक संहिता भी शामिल है। उन्होंने विश्वास जताया कि बाबा महाकाल के आशीर्वाद से यह प्रस्ताव आगे बढ़ेगा और मध्य प्रदेश इस दिशा में आगे बढ़ने वाले राज्यों में शामिल हो सकता है।
राज्य सरकार पहले ही UCC के मसौदे और सुझावों के अध्ययन के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन कर चुकी है। समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना देसाई कर रही हैं। समिति में प्रशासन, कानून, शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया है।
समिति ने विभिन्न सामाजिक वर्गों, संगठनों और नागरिकों से सुझाव प्राप्त करने की प्रक्रिया पूरी की है। ऑनलाइन माध्यम से भी लोगों की राय ली गई है ताकि प्रस्तावित कानून को व्यापक दृष्टिकोण के साथ तैयार किया जा सके। सरकारी सूत्रों के अनुसार समिति की रिपोर्ट और ड्राफ्ट बिल मिलने के बाद इसे विधानसभा में चर्चा के लिए प्रस्तुत किया जा सकता है। राज्य सरकार का लक्ष्य इस प्रक्रिया को निर्धारित समयसीमा के भीतर आगे बढ़ाना है।
वहीं, इस मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि देश और समाज की विविधता को ध्यान में रखते हुए ऐसे विषयों पर व्यापक चर्चा और सहमति जरूरी है। उनका आरोप है कि सरकार इस मुद्दे का राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है।
आने वाले मानसून सत्र में UCC को लेकर होने वाली चर्चा पर राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और आम जनता की नजरें टिकी रहेंगी। यदि प्रस्ताव विधानसभा में आता है, तो यह मध्य प्रदेश की राजनीति और नीति निर्माण के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जाएगा।