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ग्लोबल तेल कीमतों में भारी गिरावट के बीच पाकिस्तान ने दी बड़ी राहत, पेट्रोल 74 और डीजल 67 रुपये प्रति लीटर सस्ता

इस्लामाबाद/नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज गिरावट का असर अब दक्षिण एशिया के देशों में भी दिखाई देने लगा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव में कमी तथा वैश्विक स्तर पर तेल आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितताओं के घटने से क्रूड ऑयल की कीमतों में उल्लेखनीय नरमी […]

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  • June 19, 2026 8:51 pm IST, Published 3 hours ago

इस्लामाबाद/नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज गिरावट का असर अब दक्षिण एशिया के देशों में भी दिखाई देने लगा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव में कमी तथा वैश्विक स्तर पर तेल आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितताओं के घटने से क्रूड ऑयल की कीमतों में उल्लेखनीय नरमी आई है। इसी बीच पाकिस्तान सरकार ने आम जनता को बड़ी राहत देते हुए पेट्रोल और डीजल की कीमतों में रिकॉर्ड कटौती की घोषणा की है। इस फैसले के बाद क्षेत्र में ईंधन कीमतों को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है और भारत में भी पेट्रोल-डीजल के दाम कम होने की उम्मीदें बढ़ गई हैं।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शुक्रवार को पेट्रोल की कीमत में 74 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल (HSD) की कीमत में 67 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर की कटौती का ऐलान किया। सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में आई गिरावट का लाभ सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जा रहा है ताकि आम लोगों को महंगाई से राहत मिल सके।

नई दरें लागू होने के बाद पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत 373.78 रुपये प्रति लीटर से घटकर 299.78 रुपये प्रति लीटर रह जाएगी। वहीं हाई-स्पीड डीजल की कीमत 378.78 रुपये प्रति लीटर से घटकर 311.78 रुपये प्रति लीटर हो जाएगी। विशेषज्ञों के अनुसार यह हाल के वर्षों में ईंधन कीमतों में की गई सबसे बड़ी कटौतियों में से एक है।

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि सरकार क्षेत्रीय आर्थिक परिस्थितियों में सुधार और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में आई कमी का लाभ जनता तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल राजस्व बढ़ाना नहीं बल्कि लोगों को राहत देना भी है। उन्होंने नागरिकों को आश्वस्त किया कि आने वाले समय में भी यदि वैश्विक बाजार में कीमतें कम रहती हैं तो सरकार राहत उपायों को जारी रखेगी।

आम जनता को मिलेगा सीधा फायदा

विशेषज्ञों का मानना है कि पेट्रोल की कीमतों में इतनी बड़ी कटौती का सबसे अधिक लाभ निजी वाहन चालकों, मोटरसाइकिल उपयोगकर्ताओं, टैक्सी संचालकों और छोटे व्यवसायियों को मिलेगा। ईंधन सस्ता होने से रोजमर्रा की यात्रा का खर्च कम होगा, जिससे मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोगों को राहत मिलेगी।

वहीं डीजल की कीमतों में कमी का असर और भी व्यापक हो सकता है। पाकिस्तान सहित अधिकांश देशों में माल परिवहन, कृषि मशीनरी, उद्योगों और भारी वाहनों में डीजल का बड़े पैमाने पर उपयोग होता है। ऐसे में डीजल सस्ता होने से परिवहन लागत घट सकती है, जिसका सकारात्मक प्रभाव खाद्य पदार्थों, उपभोक्ता वस्तुओं और अन्य आवश्यक सामानों की कीमतों पर पड़ सकता है।

क्यों गिरे कच्चे तेल के दाम?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में हालिया गिरावट का मुख्य कारण अमेरिका और ईरान के बीच तनाव में कमी को माना जा रहा है। पिछले कुछ समय से मध्य-पूर्व में भू-राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर चिंता बनी हुई थी, जिससे तेल बाजार में अस्थिरता देखी जा रही थी। लेकिन हालात में सुधार के संकेत मिलने के बाद निवेशकों का भरोसा बढ़ा और कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव कम हुआ।

इसके अलावा वैश्विक स्तर पर उत्पादन और आपूर्ति में सुधार भी कीमतों में नरमी का एक बड़ा कारण माना जा रहा है। ऊर्जा बाजार के जानकारों का कहना है कि यदि वर्तमान परिस्थितियां बनी रहती हैं तो आने वाले हफ्तों में तेल की कीमतें और स्थिर हो सकती हैं।

भारत में भी बढ़ीं उम्मीदें

पाकिस्तान द्वारा ईंधन कीमतों में बड़ी कटौती के बाद भारत में भी इस विषय पर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि फिलहाल भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के कारण भविष्य में राहत की संभावनाएं बढ़ी हैं।

भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल आयातकों में से एक है और अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में कमी का प्रभाव भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में ईंधन की कीमतें केवल कच्चे तेल की लागत पर निर्भर नहीं करतीं। केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले कर, रिफाइनिंग लागत, परिवहन खर्च और विपणन मार्जिन भी अंतिम कीमत तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

महंगाई पर पड़ सकता है असर

अर्थशास्त्रियों के अनुसार यदि वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें लंबे समय तक नीचे बनी रहती हैं और इसका लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाता है, तो इससे महंगाई दर को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। परिवहन लागत कम होने से खाद्य वस्तुओं और अन्य उपभोक्ता सामानों की कीमतों पर दबाव घट सकता है। इससे आम लोगों की क्रय शक्ति में भी सुधार होगा।

फिलहाल पाकिस्तान का यह कदम पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। आम जनता और बाजार विशेषज्ञ अब इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में जारी गिरावट का असर अन्य देशों की ईंधन नीतियों पर कितना पड़ता है। यदि क्रूड ऑयल की कीमतों में नरमी जारी रहती है, तो आने वाले दिनों में दक्षिण एशिया के कई देशों में पेट्रोल और डीजल को लेकर राहत भरी घोषणाएं देखने को मिल सकती हैं।

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